अन्ना के मंच पर पहुँचे राजनीतिक प्रतिनिधि

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सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हज़ारे एक बार फिर अनशन पर हैं. इस बार अन्ना ने लोकपाल बिल के मुद्दे पर दिल्ली के जंतर-मंदर में रविवार को एक दिन का सांकेतिक अनशन रखा है. भारतीय जनता पार्टी और वामदलों के प्रतिनिधि पहुँचे हुए हैं और लोकपाल पर अपनी राय रख रहे हैं. लेकिन सत्ताधारी कांग्रेस की ओर से कोई नहीं आया है.

मंच पर आने वाले नेताओं में अरूण जेटली, एबी बर्धन और वृंदा करात शामिल हैं.

अन्ना सुबह-सुबह पहले राजघाट गए और वहाँ कुछ वक़्त बिताया जिसके बाद वे जंतर-मंतर पहुँचे और अनशन शुरु किया.

जंतर-मंतर पहुँचने के बाद अन्ना ने केवल भारत माता की जय का नारा लगाया और फिर अनशन पर बैठ गए. मंच पर किरण बेदी और अरविंद केजरीवाल भी मौजूद हैं.

अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेस की तीखी आलोचना की है और सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाने की माँग की है.

संसद के दोनों सदनों में लोकपाल विधेयक के मसौदे पर स्थाई समिति की रिपोर्ट पेश कर दी गई है लेकिन लेकिन अन्ना हज़ारे इस बिल के मसौदे से नाखु़श हैं.

उन्होंने कहा है कि स्थाई समिति ने कमज़ोर लोकपाल बिल संसद में भेजा है और ये देश के साथ धोखा है. स्टैडिंग कमेटी की रिपोर्ट में लोकपाल को संवैधानिक दर्जा दिए जाने की सिफ़ारिश की गई है.

लोकपाल

स्थाई समिति के अध्यक्ष अभिषेक मनु सिंघवी के मुताबिक लोकपाल को अभियोजन प्रक्रिया शुरू करने के लिए किसी भी तरह की पूर्व-अनुमति नहीं चाहिए होगी, लोकपाल के चुनाव के लिए चयन समिति में प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायधीश, लोकसभा के अध्यक्ष और लोकसभा में नेता विपक्ष के अलावा एक चौथा व्यक्ति भी होगा लेकि सीबीआई की तहक़ीक़ात और लोकपाल की अभियोजन प्रक्रिया अलग-अलग होंगी.

प्रधानमंत्री को लोकपाल में शामिल किए जाने पर ये सुझाव रखे गए हैं– लोकपाल के दायरे में लेकिन सुरक्षा के प्रावधानों के साथ, लोकपाल के दायरे में लेकिन अभियोजन प्रक्रिया पद छोड़ने के बाद ही या लोकपाल के दायरे से बाहर.

लेकिन अन्ना का कहना है कि ये मसौदा बेहद कमज़ोर है और इससे भ्रष्टाचार घटने के बजाए बढ़ जाएगा.

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