काला धन मामले पर 'लाल' हुआ विपक्ष

Image caption आडवाणी ने अपनी यात्रा के दौरान भी काले धन का मुद्दा उठाया था.

लोकसभा में काले धन पर हो रही बहस के दौरान विपक्षी दलों ने सरकार से मांग की है कि विदेशी बैंकों में अवैध रुप से जमा करोड़ों रुपए वापस लाए जाएं और लोगों के नाम उजागर किए जाएं लेकिन सरकार का कहना है कि यह काम इतना आसान नहीं है.

इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाते हुए विपक्षी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने मांग की कि सरकार इस मामले में श्वेत पत्र जारी किया जाए ताकि ये पता चले कि कितना पैसा विदेशों में जमा है और सरकार ने इसे वापस लाने के लिए क्या क़दम उठाए हैं.

सदन में मौजूद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी को संबोधित करते हुए आडवाणी का कहना था, ‘‘दुनिया को ये बताइए कि हम इस मुद्दे पर सारी बात सामने रखना चाहते हैं. हमारे पास छुपाने के लिए कुछ नहीं है.’’

उन्होंने कहा, ‘‘आपके पास जो नाम है वो उजागर किए जाएं. ये बड़ी शर्मनाक बात होगी कि हमें ये नाम अपने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से न पता चले बल्कि विकीलीक्स के जूलियन असांज से पता चले जिन्होंने कहा है कि वो 2012 में ये नाम उजागर कर देंगे.’’

आडवाणी और अन्य नेताओं के भाषणों के बाद सरकार का पक्ष रखते हुए वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने काला धन वापस लाने की दिशा में दो साल में कई प्रयास किए हैं लेकिन मामला अंतरराष्ट्रीय होने की वजह से कई तरह की दिक्कतें सामने आ रही हैं.

मुखर्जी ने ये भी कहा कि इस मामले में लोगों के कयास बहुत अधिक हैं और सच्चाई इससे थोड़ी अलग है.

उनका कहना था, ''बहुत बड़े बड़े आकड़े दिए गए हैं. इतना अधिक पैसा नहीं है. हमने स्विस सरकार के साथ भी समझौता किया है ताकि हमें जानकारी मिले लेकिन वो समझौता स्विटज़रलैंड में अनुमोदित होने में समय लगेगा. हम उनके अनुमोदन के बिना नाम कैसे उजागर करें. ये बात सबको समझनी चाहिए.''

'सरकार के क़दम'

मुखर्जी ने कई शोधों का हवाला दिया और कहा कि सरकार ने काले धन को वापस लाने की दिशा में कई क़दम उठाए हैं.

स्थगन प्रस्ताव विदेशों में जमा धन और इससे संबंधित व्यक्तियों के ख़िलाफ़ सरकार की कार्रवाई पर है. स्थगन प्रस्ताव लाने पर सरकार और बीजेपी के बीच समझौता हुआ था.

हालांकि बीजेपी का कहना है कि स्थगन प्रस्ताव के लिए राज़ी होना ही दिखाता है कि सरकार इस मामले में असफल रही है.

आडवाणी का कहना था, ‘‘स्थगन प्रस्ताव के शब्दों में भले ही बदलाव हुआ हो लेकिन ये प्रस्ताव ही दर्शाता है कि सरकार असफल रही है.’’

आडवाणी के भाषण के जवाब में कांग्रेस के प्रवक्ता मनीष तिवारी ने कहा कि काले धन के मुद्दे पर सिर्फ यूपीए को दोष देना सही नहीं होगा.

तिवारी ने लोकसभा में कहा, ‘‘यूपीए सरकार को काले धन के लिए दोष नहीं दिया जा सकता. पिछले दो वर्षों में काले धन को देश में वापस लाने के लिए यूपीए सरकार ने बहुत कुछ किया है. बीजेपी ने अपने छह साल के शासन में क्यों कुछ नहीं किया.’’

विदेशों में अवैध रुप से धन जमा करने वालों के नाम उजागर नहीं करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि स्विटज़रलैंड के क़ानूनों के अनुसार ये नाम उजागर नहीं किए जा सकते हैं.

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