भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अब युवाओं की पदयात्रा

ग्रुप के सदस्य
Image caption ग्रुप के सदस्य अपने अभियान के लिए फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे सामाजिक नेटवर्किंग वेबसाइटों का भी उपयोग करेंगे

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अन्ना हज़ारे के देशव्यापी आंदोलन के बीच हैदराबाद में युवाओं का एक समूह "ईमानदार देश" के निर्माण के नारे के साथ एक अभियान शुरू करने जा रहा है.

'प्राउड इंडियन्स' नाम का ये समूह 18 दिसंबर से भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ पदयात्रा शुरू करेगा.

पदयात्रा की शुरूआत कन्याकुमारी से होगी और 120 दिनों में पांच हज़ार किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद सात अप्रैल को दिल्ली के राजघाट पहुँचेगी.

इस समूह में आईटी और इंजीनियरिंग के छात्र समेत कई अलग पृष्ठभूमि के लोग भी शामिल है जो भ्रष्टाचार के विरुद्ध जागृति पैदा करना चाहते है.

ये पदयात्रा 120 दिनों की अवधि में सौ से ज़्यादा शहरों, क़स्बों और हज़ारों गाँव से होकर गुज़रेगी.

इस पदयात्रा को "ईमानदारी के क़दम" का नाम दिया गया है.

'चरित्र निर्माण का रास्ता'

समूह के युवाओं का कहना है कि उन्हे इस तरह के अभियान का विचार उस समय आया जब वो भ्रष्टाचार के विषय पर एक बहस के लिए जमा हुए थे.

एक सांस्कृतिक केंद्र चलाने वाले युवा अशर फ़रहान ने कहा, "हम ने इस विषय को लेकर पदयात्रा का फ़ैसला किया है क्योंकि ये चरित्र निर्माण का एक बेहतरीन रास्ता है. महात्मा गाँधी ने भी कहा था कि परिवर्तन लाने में यह सकारात्मक भूमिका निभा सकता है."

समूह के एक सदस्य अब्दुल मुजीब ख़ान ने बताया की पदयात्रा के दौरान हर रात वो जहाँ भी पड़ाव डालेंगे वहाँ के स्थानीय लोगों से वो बात करेंगे और बेईमानी के ख़िलाफ़ जागृति लाने की कोशिश करेंगे.

पदयात्रा में शामिल सदस्य आम लोगों के साथ छात्रों और अलग अलग व्यवसाय के लोगों से भी बातचीत करेंगे.

'32 रूपए में गुज़ारेंगे दिन'

Image caption इस पदयात्रा को "ईमानदारी के कदम" का नाम दिया गया है.

समूह का उद्देश्य है कि इस पदयात्रा के दौरान वह कम से कम दस लाख लोगों को इस अभियान से जोड़ने की कोशिश करेगा और आठ अप्रैल को "ज़ीरो करप्शन डे" यानि शून्य भ्रष्टाचार दिवस मनाने का आह्वान करेगा.

इस कार्यक्रम में कई ऐसी बातें हैं जो इसे काफ़ी अनूठा बनाती हैं. मिसाल के तौर पर इस ग्रुप का हर सदस्य पदयात्रा के दौरान प्रतिदिन केवल 32 रुपए ख़र्च करेगा.

समूह के सदस्य मुजीब ख़ान ने कहा, "हमारे खाने-पीने और दूसरे तमाम कार्यों पर केवल 32 रूपए ख़र्च किए जाएंगे. इसका उद्देश्य ये समझाना है कि ग़रीबी की रेखा के नीचे रहने वाले लोग अपना जीवन कैसे बिताते हैं".

समूह के एक और सदस्य रोहित लिंगिनेनी ने कहा, "हम आम लोगों को बताऐंगे कि किस तरह हम में से हर एक व्यक्ति भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रहा है".

ग्रुप के सदस्य अपने अभियान के लिए फ़ेसबुक और ट्विटर जैसे सामाजिक नेटवर्किंग वेबसाइटों का भी उपयोग करेंगे ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक उनका संदेश पहुँच सके.

संबंधित समाचार