'सशक्त बिल पास न हुआ तो 30 दिसंबर से जेल भरो आंदोलन'

अन्ना हज़ारे
Image caption अन्ना हज़ारे ने शीतकालीन सत्र में लोकपाल बिल पारित होने पर संदेह जताया है.

अन्ना हज़ारे ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को एक पत्र भेजकर कहा है कि अगर शीतकालीन सत्र में एक 'सशक्त, स्वतंत्र और प्रभावी' लोकपाल बिल नहीं पास किया गया तो वह 27 दिसंबर से अनिश्चतकालीन अनशन पर जाएंगे जिसके बाद 30 दिसंबर से देश भर में जेल भरो आंदोलन शुरू किया जाएगा.

शनिवार को प्रधानमंत्री को भेजे गए चार पन्नों के ख़त में अन्ना हज़ारे ने कई सवाल उठाए हैं जिन्हें क्रमवार दर्ज किया गया है. ये चिट्ठी 'इंडिया अगेंस्ट करप्शन' के लेटर पैड पर लिखी गई है.

भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ केंद्र की कांग्रेस सरकार पर लोकपाल क़ानून बनाने का सशक्त दबाव बनाने वाले अन्ना हज़ारे ने आरोप लगाया है कि सरकार अभी भी केंद्रीय जांच एजेंसी पर से अपना शिकंजा ढीला करने को तैयार नहीं दिखती.

उन्होंने कहा है कि "आज तक हर पार्टी की सरकार ने - चाहे वह बीजेपी की रही हो या कांग्रेस की - उन्होंने सीबीआई का ग़लत इस्तेमाल किया है. अपनी सरकार को बचाने के लिए राजनीतिक प्रतिद्वंदियों पर झूठे आरोप लगाए जाते रहे हैं. अपनी सरकार के भ्रष्टाचारी एंव आपराधिक तत्वों को सीबीआई के ज़रिए संरक्षण दिया जाता है."

उन्होंने कहा है कि अगर सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधी शाखा को लोकपाल की जांच एजेंसी नहीं बनाया जाता, जैसा कि उन्होंने सुझाव दिया था, तो लोकपाल को बनाने का कोई फायदा नहीं होगा.

उन्होंने सवाल किया है, ''तो क्या लोकपाल की अपनी जांच एजेंसी नहीं होगी? बिना जांच एजेंसी का लोकपाल क्या करेगा? इससे तो अच्छा है कि आप लोकपाल न ही बनाए.''

उन्होंने संदेह जताया है कि लोकपाल बिल इस संसद सत्र में पारित हो पाएगा.

'दूषित' चयन प्रक्रिया

अन्ना हज़ारे ने स्थाई समिति द्वारा सुझाई गई लोकपाल की चयन प्रक्रिया को भी 'दूषित' बताया है और कहा है कि "चयन समिति में राजनेताओं की बहुतायत है जिनके भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लोकपाल को जांच करनी है."

पत्र में आगे लिखा गया है, ''...यानि चयन समिति में कुछ नेता बैठकर जिसे चाहे उसे लोकपाल बना देंगे. ज़ाहिर है कि लोकपाल कमज़ोर और भ्रष्ट होगा.''

सिटीज़न चार्टर पर सवाल

उन्होंने इस बात पर आश्चर्य का इज़हार किया है कि कैबिनट ने एक अलग सिटीज़न चार्टर कानून लाने का फ़ैसला किया है.

उनका कहना है कि संसद के प्रस्ताव के अनुसार इसे लोकपाल बिल का हिस्सा होना चाहिए था.

अन्ना हज़ारे आगे कहते हैं कि ''अब कहा जा रहा है कि इसे फिर से स्थाई समिति को भेजा जाएगा, फिर से चार महीने लगेंगे.''

उन्होंने प्रधान मंत्री से पूछा है, ''क्या आपको नहीं लगता कि देश की जनता के साथ धोखे पे धोखा हो रहा है? सरकार का यह रवैया बिल्कुल ठीक नहीं है.''

इससे पहले गुरुवार को टीम अन्ना की कोर कमेटी की बैठक के बाद अन्ना हज़ारे ने कहा था कि जो भी सांसद लोकपाल विधेयक का विरोध करेंगे, उनके घरों के सामने धरना दिया जाएगा.

उन्होंने कहा था कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी के घर के सामने होने वाले धरनों में वो ख़ुद शामिल होंगे.

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