बुनकरों की समस्या को लेकर आंदोलन-गडकरी

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Image caption भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी बुनकरों को संबोधित करते हुए

भारतीय जनता पार्टी ने अपनी नई रणनीति के तहत बुनकरों और कारीगरों की समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करने का मन बनाया है.

देश के सबसे बड़े विपक्षी दल भाजपा ने अपना सामजिक आधार बढ़ाने के लिए हथकरघा बुनकरों, मछुआरों और दूसरे गृह उद्योग कारीगरों की समस्याओं पर ध्यान केन्द्रित करने का फैसला किया है. इसी कड़ी में भाजपा के सचिव मुरलीधर राव द्वारा हैदराबाद में बुनकरों की समस्याओं को लेकर किया गया तीन दिन का व्रत खत्म हो गया. इस अवसर पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने घोषणा की, कि बुनकरों और दूसरे कारीगरों की समस्याओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए उनकी पार्टी देशव्यापी आन्दोलन करेगी.

उन्होंने कहा की ऐसा करना इसलिए भी ज़रूरी हो गया है क्योंकि केंद्र सरकार की ग़लत आर्थिक नीतियों के कारण कारीगर समुदायों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है.

गडकरी के मुताबिक "जो बुनकर देश के सांस्कृतिक विरासत का एक अहम हिस्सा हैं और जिनके द्वारा बनाए गए कपड़ों की विदेशों में ज़बरदस्त मांग है, सरकार की लापरवाही के कारण वे आत्महत्या करने और भूखों मरने के लिए मजबूर हैं".

गडकरी ने बुनकर और कारीगर समुदायों को विश्वास दिलाया कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो वो बुनकरों के पूरे कर्ज़ माफ़ कर देगी.

इसके अलावा पार्टी उन्हें मुफ्त बिजली देने के अलावा वो सभी सुविधाएं भी मुहैय्या कराएगी जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन बिताने वाले परिवारों को मिलती हैं.

गडकरी ने बुनकर और मछुआरों को बैंकों से कर्ज नहीं दिए जाने पर, इन लोगों के महाजनों से ऊंचे दर में कर्ज़ लेने स्थिति की भी कड़ी आलोचना की है.

भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी के अनुसार भाजपा सांसद जल्द ही इस मुद्दे को संसद के दोनों सदनों में उठाएंगे और प्रधानमंत्री से भेंट कर इस समस्या के समाधान की मांग करेंगे.

बुनकरों के हक के लिए आंदोलन

भाजपा दिल्ली में बुनकरों का एक राष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित करेगी.

पिछले तीन दिनों से बुनकरों की समस्याओं के मुद्दे पर भूख हड़ताल पर बैठे मुरलीधर राव ने कहा कि अकेले आंध्रप्रदेश में अब तक दो हज़ार से ज़्यादा बुनकर ग़रीबी के कारण आत्महत्या कर चुके हैं.

मुरलीधर राव ने 1997 से लेकर अब आत्महत्या करने वाले 694 बुनकरों की सूची भी जारी की. उन्होंने कहा कि उन्हें ये व्रत सरकार की लापरवाही के कारण रखना पड़ा, और ये केवल शुरुआत है. उन्होंने आगे कहा कि अगर सरकार अभी भी बुनकरों की सहायता के लिए सामने नहीं आती है तो वे अपना आंदोलन और तेज़ करेंगे.

भाजपा की मांगों में बुनकरों के पूर्ववर्ती कर्ज़ माफ करने, तीन प्रतिशत सालाना की दर पर ताज़ा कर्ज़ देने, बुनकरों के लिए अलग मंत्रालय बनाने, हथकरघा उद्योग के लिए अलग पार्क स्थापित करना और बुनकरों को ग्रामीण रोज़गार योजना के तहत लाना शामिल है.

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