खाद्य सुरक्षा विधेयक को मंत्रिमंडल की मंज़ूरी

 रविवार, 18 दिसंबर, 2011 को 22:57 IST तक के समाचार

यूपीए सहयोगियों तथा कुछ कांग्रेसी सदस्यों की चिंताओं को दूर करने के बाद मंत्रिमंडल की बैठक में खाद्य सुरक्षा विधेयक को मंजूरी मिली.

ग़रीबों को सस्ते दरों पर अनाज मुहैया कराने के मक़सद से बने खाद्य सुरक्षा विधेयक को मंत्रिमंडल ने पारित कर दिया गया है.

रविवार शाम दिल्ली में प्रधानमंत्री निवास पर यूपीए सहयोगियों तथा कुछ कांग्रेसी सदस्यों की चिंताओं को दूर करने के बाद मंत्रिमंडल की बैठक में खाद्य सुरक्षा विधेयक को मंजूरी मिली.

खाद्य मंत्री के वी थॉमस ने बताया कि बैठक में सारे सहयोगी मौजू़द थे और अब इसे संसद की मंज़ूरी के लिए सदन में पेश किया जाएगा.

इस विधेयक के तहत भारत के लगभग 63 फ़ीसदी आबादी को सस्ती दरों पर अनाज पाने का अधिकार हासिल हो जाएगा.

इससे सरकारी खज़ाने पर 27,663 करोड़ रूपए का अतिरिक्त भार डालेगा.

महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी क़ानून के बाद यह यूपीए सरकार की दूसरी बड़ी पहल है.

कांग्रेस ने 2009 के कांग्रेस के चुनाव घोषणा पत्र में इस क़ानून को लाने का वादा किया था. राष्ट्रपति ने भी जून, 2009 में संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए इसकी घोषणा की थी.

क्या है खाद्य सुरक्षा बिल

खाद्य सुरक्षा विधेयक के प्रावधान

भारत खेती
  • 63.5 प्रतिशत आबादी को सस्ते दामों में अनाज प्रदान करने का प्रावधान.
  • खाद्य सुरक्षा विधेयक का बजट पिछले वित्तीय वर्ष के 63,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 95,000 करोड़ रुपए करने का प्रस्ताव.
  • कृषि उत्पाद बढ़ाने के लिए 1,10,000 करोड़ रुपए का निवेश करने का प्रस्ताव.
  • ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत आबादी को इस विधेयक का लाभ दिया जाएगा.
  • शहरी इलाकों में कुल आबादी के 50 फ़ीसदी लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान की जाएगी.
  • गर्भवती महिलाओं, बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं, आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों और बूढ़े लोगों को पका हुआ खाना मुहैया करवाया जाएगा.
  • स्तनपान कराने वाली महिलाओं को महीने के 1,000 रुपए भी दिए जाएंगें.
  • नया क़ानून लागू होने पर इससे कम दाम में गेहूं और चावल पाना निर्धन लोगों का क़ानूनी अधिकार बन जाएगा.


खाद्य सुरक्षा बिल की ख़ास बात यह है कि खाद्य सुरक्षा कानून बनने से देश की दो तिहाई आबादी को सस्ता अनाज मिलेगा.

प्रस्तावित विधेयक में लाभ प्राप्त करने वालों को प्राथमिकता वाले परिवार और सामान्य परिवारों में बांटा गया है.

प्राथमिकता वाले परिवारों में गरीबी रेखा से नीचे गुजर बसर करने वाले और सामान्य कोटि में गरीबी रेखा से उपर के परिवारों को रखे जाने की बात कही गई है.

ग्रामीण क्षेत्र में इस विधेयक के दायरे में 75 प्रतिशत आबादी आयेगी जबकि शहरी क्षेत्र में इस विधेयक के दायरे में 50 प्रतिशत आबादी आयेगी.

विधेयक में प्रत्येक प्राथमिकता वाले परिवारों को तीन रूपये प्रति किलोग्राम की दर से चावल और दो रूपये प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं उपलब्ध कराने की बात कही गई है.

खाद्य सुरक्षा विधेयक के मसौदे के प्रावधानों के तहत देश की 63.5 प्रतिशत जनता को खाद्य सुरक्षा प्रदान की जाएगी.

खाद्य सुरक्षा विधेयक का बजट पिछले वित्तीय वर्ष के 63,000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 95,000 करोड़ रुपए कर दिया जाएगा.

इस विधेयक के क़ानून में बदल जाने के बाद अनाज की मांग 5.5 करोड़ मैट्रिक टन से बढ़ कर 6.1 मैट्रिक टन हो जाएगी.

दो श्रेणियां

इस योजना के लाभभोगियों को दो भागों में बांटा गया है – प्राथमिकता वाले परिवार (जैसे कि बीपीएल या ग़रीबी रेखा से नीचे आने वाले लोग) और सामान्य परिवार (जैसे कि एपीएल या ग़रीबी रेखा से ऊपर आने वाले लोग).

इस विधेयक के तहत सरकार प्राथमिकता श्रेणी वाले प्रत्येक व्यक्ति को सात किलो चावल और गेहूं देगी. चावल का दाम तीन रुपए और गेहूं दो रुपए प्रति किलो के हिसाब से दिया जाएगा.

जबकि सामान्य श्रेणी के लोगों को कम से कम तीन किलो अनाज न्यूनतम समर्थन मूल्य के आधे दाम पर दिया जाएगा.

ग्रामीण क्षेत्रों में 75 प्रतिशत आबादी को इस विधेयक का लाभ दिया जाएगा, जिसमें से कम से कम 46 प्रतिशत प्राथमिकता श्रेणी के लोगों को दिया जाएगा.

शहरी इलाकों में कुल आबादी के 50 फ़ीसदी लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान की जाएगी और इसमें से कम से कम 28 प्रतिशत प्राथमिकता श्रेणी के लोगों को दिया जाएगा.

नए प्रावधान

एक हफ़्ते पहले खाद्य मंत्री के वी थॉमस ने इस विधेयक के बारे में कहा था, “राष्ट्रीय सलाहकार परिषद और प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद से चर्चा के बाद 2009 में बनाए गए विधेयक के मसौदे में कुछ और प्रावधान जोड़े गए हैं.”

संशोधिक मसौदे में गर्भवती महिलाओं, बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं, आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले बच्चों और बूढ़े लोगों को पका हुआ खाना मुहैया करवाया जाएगा.

खाद्य मंत्री के मुताबिक स्तनपान कराने वाली महिलाओं को महीने के 1,000 रुपए भी दिए जाएंगें.

इस विधेयक में ऐसा भी प्रावधान है जिसके तहत अगर सरकार प्राकृतिक आपदा के कारण लोगों को खाद्य सुरक्षा प्रदान नहीं कर पाती है, तो योजना के लाभभोगियों को उसके बदले पैसा दिया जाएगा.

महत्वपूर्ण है कि जन-वितरण प्रणाली के तहत सरकार हर महीने 6 करोड़ 52 लाख बीपीएल परिवारों को 35 किलो गेहूं और चावल प्रदान करती है. इस योजना के तहत गेहूं 4.15 रुपए में दिया जाता है, जबकि चावल का दाम 5.65 रूपए है.

एपीएल की श्रेणी वाले 11.5 करोड़ परिवारों को 6.10 रुपए में 15 किलो गेहूं और 8.30 रुपए में 35 किलो चावल दिए जाते हैं.

नया क़ानून लागू होने के बाद इससे कम दाम में गेहूं और चावल पाना निर्धन लोगों का क़ानूनी अधिकार बन जाएगा.

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