यूपी के बंटवारे का प्रस्ताव केंद्र ने वापस भेजा

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Image caption मायावती इस आरोप का खंडन करती हैं कि ये कोई चुनावी शिगूफ़ा है

उत्तर प्रदेश को चार राज्यों में विभाजित करने के प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को कई स्पष्टीकरण मांगते हुए वापस भिजवा दिया है.

इनमें नए राज्यों की सीमाएँ, उनकी राजधानियों और वर्तमान राज्य पर कर्ज़ का मामला शामिल है.

दिल्ली में केंद्रीय गृहसचिव आरके सिंह ने पत्रकारों से कहा, "हमने उत्तर प्रदेश का बँटवारे का प्रस्ताव वापस भिजवा दिया है. हमने उनसे आठ से नौ सवालों के जवाब देने को कहा है."

उत्तर प्रदेश की मायावती सरकार ने विधानसभा में राज्य को चार हिस्सों में विभाजित करने का एक प्रस्ताव 21 नवंबर को पारित किया था.

इसके अनुसार उत्तर प्रदेश को अवध प्रदेश, पूर्वांचल, बुंदेलखंड औ पश्चिम प्रदेश में बाँटने का प्रस्ताव था.

मायावती के विरोधियों ने इसे अगले साल होने वाले चुनावों को ध्यान में रखकर छोड़ा गया चुनावी शिगूफ़ा कहा था.

सवाल

केंद्रीय गृहमंत्रालय ने उत्तर प्रदेश सरकार से स्पष्ट करने को कहा है कि नए राज्यों की सीमाएँ कैसी होंगीं, उनकी राजधानियाँ कहाँ बनेंगीं और भारतीय सेवा के जो अधिकारी इस समय उत्तर प्रदेश में काम कर रहे हैं, उनका बँटवारा उन चार राज्यों में किस तरह से होगा.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सबसे अहम सवाल केंद्र सरकार ने ये पूछा है कि देश के सबसे अधिक आबादी वाले प्रदेश पर जो भारी भरकम कर्ज़ है, उसका बँटवारा किस तरह होगा.

अनुमान है कि इस समय उत्तर प्रदेश सरकार पर वर्ष 2011-12 में कर्ज़ दो लाख चार हज़ार करोड़ तक पहुँच जाएगा, जो कि पिछले साल यानी 2010-11 में एक लाख 80 हज़ार करोड़ था.

केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से ये भी पूछा है कि वह वेतन के बोझ को किस तरह से बाँटना चाहेगी.

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