अमरीकी बीपीओ बिल का भारत में विरोध

कॉल सेंटर (फ़ाइल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption कॉल सेंटर भारत में रोज़गार का एक बहुत बड़ा स्रोत है.

भारतीय व्यपार और उद्योग ने अमरीकी कांग्रेस में पेश किए जाने वाले उस बिल का कड़ा विरोध किया है जिसमें विदेशों में कॉल सेंटर खोलने पर अमरीकी कंपनियों को सरकारी क़र्ज़ और सहायता नहीं दिए जाने का प्रस्ताव है.

रिपब्लिकन पार्टी के सांसद टून बिशप और डेविड मैकिंले ने अमरीकी 'कॉल सेंटर एंड कंज़्यूमर प्रोटेक्शन बिल' अमरीका की निचली सदन हॉउस ऑफ़ रिप्रेज़ेंटेटिव्स में पेश किया है.

इस बिल में यह प्रस्ताव दिया गया है कि अमरीका से बाहर कॉल सेंटर खोलने वाली किसी भी अमरीकी कंपनी को अमरीकी सरकार अगले पांच सालों तक कोई क़र्ज़ या वित्तीय सहायता नहीं देगी.

बिल में यह भी कहा गया है की अगर कोई अमरीकी कंपनी 60 दिनों के अन्दर विदेश में खोले गए कॉल सेंटर की जानकारी सरकार को नहीं देती है तो उसपर हर रोज़ दस हज़ार अमरीकी डॉलर का जुर्माना लगाया जाना चाहिए.

बिल के अनुसार कॉल सेंटर में ग्राहकों के फ़ोन का जवाब देने वालों को अपना नाम और शहर का नाम बताना अनिवार्य होगा.

अगर यह बिल पारित हो जाता है तो इससे 18 अरब डॉलर वाले भारतीय आईटी उद्योग पर भारी असर पड़ेगा.

फ़िक्की के पश्चिमी चेत्र के अध्यक्ष उद्योगपति सुशील जीवाराजका का कहना है कि यह बिल ग़लत संदेश भेजेगा.

उनका कहना है,"अमरीका के इस क़दम से दूसरे देश भी ऐसा कर सकते हैं जिससे भारतीय आईटी क्षेत्र को नुक़सान होगा.भारत सरकार को इसका विरोध करना चाहिए."

आईटी क्षेत्र के संगठन नैसकॉम ने भी इस बिल पर चिंता जताई है.

नैसकॉम ने एक लिखित बयान जारी किया है जिसमें इस क़दम की निंदा की गई है और इस बिल को मुक्त व्यापार की मूल भावना के ख़िलाफ़ बताया गया है.

पहले भी इस तरह की कोशिशें की गई हैं लेकिन इसमें कोई ख़ास कामयाबी नहीं मिली है.

विशेषज्ञ कहते हैं कि अगले साल अमरीका में राष्ट्रपति के चुनाव को देखते हुए यह बिल पेश किया गया है.

इस बिल के क़ानून में बदलने की संभावता कम है.

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