आंदोलन को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश: टीम अन्ना

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Image caption केजरीवाल ने आंदोलन की धर्मनिरपेक्षता पर ज़ोर डालने के लिए अलग-अलग समुदायों के नेताओं से मुलाक़ात की.

टीम अन्ना पर आरएसएस का एजेंट होने के आरोप का दोबारा खंडन करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि कुछ राजनीतिक नेता और भ्रष्ट तत्व उनके आंदोलन को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं.

कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने रविवार को कहा था कि अन्ना हज़ारे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस से जुड़े रहे हैं.

टीम अन्ना ने पहले भी कांग्रेस के ऐसे आरोपों का खंडन किया है. सोमवार को टीम अन्ना के मुख्य सदस्य अरविंद केजरीवाल ने अलग-अलग समुदायों के नेताओं से मुलाक़ात की और उन्हें विश्वास दिलाने की कोशिश की कि उनका आंदोलन किसी भी समुदाय के पक्ष या विपक्ष में नहीं है.

केजरीवाल का कहना था, “सरकार और कुछ अन्य तत्व हमारे ख़िलाफ़ एक दुष्प्रचार कर रहे हैं. वे बेबुनियाद आरोप लगा रहे हैं कि हमारा आंदोलन आरएसएस ने प्रायोजित किया है और ये दलितों और मुसलमानों के ख़िलाफ़ है. ये सब आरोप ग़लत हैं. भ्रष्टाचार का कोई धर्म नहीं होता. कुछ भ्रष्ट लोग हमें बाँटना चाहते हैं.”

दिग्विजय सिंह ने अपने आरोप को बल देने के लिए एक अख़बार में छपी उस तस्वीर का ज़िक्र किया था जिसमें अन्ना हज़ारे आरएसएस के प्रमुख नेता नानाजी देशमुख के साथ देखे जा सकते हैं.

इस आरोप पर ट्विटर पर प्रतिक्रिया देते हुए टीम अन्ना की सदस्य किरण बेदी ने कहा, “क्या किसी के साथ एक ही स्टेज पर बैठ जाने से कोई किसी का एजेंट हो जाता है?”

दिग्विजय सिंह के आरोप का खंडन करते हुए टीम अन्ना ने कुछ तस्वीरें जारी कीं, जिनमें दिग्विजय सिंह के अलावा कई और नेताओं को भी नानाजी देशमुख के साथ एक ही स्टेज पर देखा जा सकता है.

‘भ्रष्टाचारी प्रवृत्ति’

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Image caption अन्ना हज़ारे अपने तीन दिवसीय अनशन के लिए सोमवार रात मुंबई पहुंचने वाले हैं.

इस बीच मंगलवार को होने वाले तीन दिवसीय अनशन के लिए अन्ना हज़ारे रालेगण सिद्धी से मुंबई के लिए रवाना हो गए हैं.

रवाना होने से पहले उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “कांग्रेस को अगर लगता है कि ये आंदोलन उनकी ही पार्टी विशेष के ख़िलाफ़ हो रहा है, तो वो ये बताए कि आज़ादी के 64 साल बाद भी भ्रष्टाचार पर ब्रेक लगाने वाला ऐसा कौन सा क़ानून बनाया आपने? ये आंदोलन किसी पक्ष, पार्टी या व्यक्ति के विरोध में नहीं बल्कि भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति के विरोध में है.”

अन्ना हज़ारे ने घोषणा की है कि अगर संसद में बहस के बाद भी सशक्त लोकपाल का मसौदा सामने नहीं आता है, तो मुंबई में तीन दिन के अनशन के बाद 30 तारीख़ को वह दिल्ली में सोनिया गांधी के घर के बाहर धरना करेंगें.

उसी दिन अन्ना के समर्थक शांतिपूर्ण तरीके से पुलिस को अपनी ग़िरफ़्तारियां देंगे.

इसके अलावा टीम अन्ना के सदस्य और वकील प्रशांत भूषण ने दिल्ली में पत्रकारों को बताया कि दिल्ली के रामलीला मैदान में भी अन्ना के कुछ समर्थक अनशन पर बैठेंगे.

सरकार की मंशा पर आशंका व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, “सरकार हमारी कई बातें मान ले और फिर बोल दे कि लोकपाल तो सरकार ही नियुक्त करेगी, या ये बोल दें कि लोकपाल को हटाने का अधिकार भी सरकार के पास ही होगा, या फिर लोकपाल के पास कोई जांच संस्था नहीं होगी और जांच सरकार से ही करवाई जाएगी. ऐसे में लोकपाल का कोई मतलब नहीं रह जाता.”

उधर किरण बेदी ने सरकार से मांग की है कि वो सीबीआई को राजनीतिक शिकंजों से मुक्त करे.

‘अन्ना सब्र रखें’

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Image caption कांग्रेस नेता वीरप्पा मोइली का कहना है कि सरकार ने पहले से मज़बूत लोकपाल विधेयक बनाया है.

टीम अन्ना के तीखे तेवरों के बीच संसद को मंगलवार को होने वाली बहस से पहले राजनीतिक दलों की बयानबाज़ी शुरू हो गई है.

भारतीय जनता पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज़ हुसैन ने कहा, “कांग्रेस लोकपाल बिल पर दो क़दम आगे चलती है और फिर चार क़दम पीछे हट जाती है. कांग्रेस की नीति और नीयत, दोनों में खोट है. भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ वो एक मज़बूत और सशक्त लोकपाल लाने से डर रहे हैं.”

दूसरी ओर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी नेता सीताराम येचुरी ने कहा, “जो लोग संविधान में दिए गए क़ानूनों का इस्तेमाल कर धरने और विरोध प्रदर्शन करते हैं, उन्हें ये भी समझना चाहिए कि वे उस क़ानून का उल्लंघन नहीं कर सकते, जिसमें ये लिखा है कि क़ानून और विधेयक केवल संसद में ही बनाए जा सकते हैं. ऐसे लोगों को दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना भी आना चाहिए.”

वामपंथी दलों और भाजपा का कहना है कि वे मंगलवार को संसद में लोकपाल बिल पर चर्चा के दौरान उसमें कुछ संशोधन के लिए प्रस्ताव लाएंगे.

उधर कांग्रेस नेताओं ने दोहराया है कि टीम अन्ना को थोड़ा सब्र करना चाहिए और संसद की कार्यवाही पर भरोसा रखना चाहिए.

कंपनी मामलों के मंत्री वीरप्पा मोइली ने कहा, “हमने लोकपाल विधेयक के मसौदे को और मज़बूत बनाया है. सभी सुझावों को ध्यान में रखा गया है. मुझे यक़ीन है कि संसद की बुद्धिमत्ता इस विधेयक को ज़रूर पारित करवाएगी.”

मंगलवार को संसद में लोकपाल विधेयक के मसौदे पर चर्चा की जाएगी. सरकारी मसौदे में कुछ प्रावधानों को लेकर टीम अन्ना और सरकार के बीच मतभेद जारी हैं.

इस मसौदे में सबसे बड़ा मुद्दा है सीबीआई का. अन्ना और उनके समर्थक सीबीआई को पूरी तरह लोकपाल के दायरे में चाहते हैं लेकिन सरकार को ये मंज़ूर नहीं.

इसके अलावा टीम अन्ना चाहती है कि सीबीआई के निदेशक की नियुक्ति में सरकार का दख़ल ना हो. जबकि सरकार कह रही है कि पीएम, नेता विपक्ष और मुख्य न्यायाधीश नियुक्ति करें.

टीम अन्ना की मांग है कि भ्रष्टाचार के मामले की पूरी जांच का अधिकार लोकपाल के पास होना चाहिए, जबकि सरकारी बिल सिर्फ़ शुरुआती जांच की बात कहता है.

इसके अलावा उनकी मांग है कि लोकपाल की नियुक्ति चुने हुए पैनल द्वारा आम सहमति से होनी चाहिए और लोकपाल या लोकायुक्त के दायरे में 'सी' और 'डी' श्रेणी के सरकारी कर्मचारियों को भी लाया जाना चाहिए.

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