राज्यसभा में आसान नहीं लोकपाल की राह

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Image caption लोकसभा में लोकपाल विधेयक तो पास हो गया लेकिन संविधान संशोधन पारित नहीं हो सका.

मंगलवार को लोकपाल विधेयक लोकसभा में कुछ संशोधनों के साथ ध्वनिमत से पारित हो गया. अब ये विधेयक राज्यसभा में बहस के लिए रखा जाएगा.

राज्य स्तर के संसदीय कार्य मंत्री नारायणसामी ने भारतीय टीवी चैनल एनडीटीवी को बताया है कि राज्य सभा में लोकपाल बिल पर बहस गुरुवार को होगी.

लेकिन राज्यसभा में यूपीए का बहुमत नहीं है और बाहर से समर्थन दे रही पार्टियों के लोकसभा से वॉकआउट के बाद राज्यसभा में इस बिल के पारित हो पाने पर संदेह जताया जा रहा है.

मंगलवार को लोकसभा में संविधान संशोधन बिल इसलिए पारित नहीं हो सका क्योंकि बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने सदन से वॉकआउट कर दिया. यही वजह है कि अब लोकपाल बिल के राज्यसभा में पारित होने पर सवाल उठ रहे हैं.

राज्यसभा में ज़ोरअज़माइश
कांग्रेस 71
तृणामूल कांग्रेस 6
एनसीपी 7
आरएलडी 1
डीएमके 7
राष्ट्रीय जनता दल 4
समाजवादी पार्टी 5
बीएसपी 18
भाजपा 51
शिवसेना 4
तेलुगू देसम 4
शिरोमणि अकाली दल 3
जनता दल(यू) 8
इनेलो 1
सीपीएम 13
सीपीआई 5
एआईएडीएमके 5
मनोनित सदस्य 8
स्वतंत्र सांसद 6

राज्य सभा में बुधवार को लोकपाल बिल पर बहस होने वाली है. और इस सदन में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों को बहुमत प्राप्त नहीं है.

राज्य सभा में 245 सदस्य होते हैं. वर्तमान में इस सदन में कांग्रेस, एनसीपी, डीएमके, तृणामूल कांग्रेस, एलजेपी और आरएलडी के कुल मिलाकर 93 सदस्य हैं.

आसान नहीं होगी राह

यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देने वाले दलों के पास भी कुल 27 ही सदस्य हैं. इनमें बीएसपी के 18, समाजवादी पार्टी के पांच और आरजेडी के चार सदस्य हैं.

इन्हीं तीन दलों ने लोकसभा में लोकपाल बिल पर मतदान से पहले वॉक आउट कर दिया था. इस वॉकआउट का लोकपाल बिल के पारित होने पर कोई असर नहीं पड़ा क्योंकि इसके लिए सिर्फ़ साधारण बहुमत की ज़रुरत थी. वैसे इसे आख़िर में ध्वनिमत से पास किया गया.

लेकिन इन दलों के 42 सांसदों के ग़ैर-मौजूदगी में संविधान संशोधन विधेयक पास नहीं हो सका क्योंकि उसके लिए दो-तिहाई बहुमत की ज़रुरत होती है.

अगर ये तीनों दल राज्यसभा में भी लोकसभा जैसा व्यवहार करते हैं तो ये सरकार के लिए बड़ी चिंता का कारण हो सकता है.

भाजपा का मत

लोकसभा में सरकार ने लोकपाल बिल कुछ ऐसे संशोधन किए हैं जिनसे भाजपा को ख़ुश होना चाहिए.

इन संशोधनों में लोकयुक्तों की नियुक्ति राज्यों के लिए वैकल्पिक बनाना, प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ शिकायत के लिए तीन-चौथाई सदस्यों की मंज़ूरी को दो-तिहाई करना, लोकसभा और राज्यसभा के अध्यक्षों के अधिकारों की सुरक्षा करना शामिल है.

लेकिन भाजपा राज्यसभा में क्या रुख़ अपनाती है ये देखना होगा. पार्टी ने अभी ये साफ़ नहीं किया है कि वो संशोधन चाहती है या लोकपाल बिल के वर्तमान स्वरुप से सहमत है.