लोकपाल वाकयुद्ध: किसने क्या कहा

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Image caption सुष्मा स्वराज ने बहस की शुरुआत में लोकपाल विधेयक को संविधान के ख़िलाफ़ बताया.

लोकपाल विधेयक के मसौदे को लेकर मंगलवार को लोकसभा में सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस और बयानबाज़ी हुई.

आइए जानते हैं कि इस बहस के दौरान किस दल ने लोकपाल से जुड़े किन मुद्दों पर अपनी राय रखी.

सुषमा स्वराज, भाजपा

“ये कहते हुए मुझे दुख हो रहा है कि मौजूदा बिल अधूरा है, इसमें बहुत सी खामियां हैं. हमने सरकार से उम्मीद की थी कि वो एक ऐसा कानून लाएगी, जो भ्रष्टाचार को मिटा पाए, लेकिन मौजूदा बिल भ्रष्टाचार से लड़ने की तमाम उम्मीदों पर पानी फेरता है. ये विधेयक संविधा के ख़िलाफ़ है. लोकपाल विधेयक में धर्म आधारित आरक्षण से सरकार देश में दोबारा बंटवारे की बीज बो रही है. संवैधानिक संस्थाओं में तो आरक्षण का सवाल ही पैदा नहीं होता. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री इसलिए नहीं हैं क्योंकि वो अल्पसंख्यक वर्ग से आते हैं बल्कि इसलिए क्योंकि इस पद के लिए वो सर्वश्रेष्ठ भारतीय हैं.”

कपिल सिब्बल, कांग्रेस

“अगर लोकपाल पारित हो जाता है तो ये इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा. अगस्त में संसद में जो प्रस्ताव पारित हुआ था उसमें निचले स्तर के सरकारी नौकर, लोकायुक्त और सिटिज़ेन्स् चार्टर को लोकपाल के अंदर शामिल किए जाने की बात कही गई थी. बीजेपी केंद्र में तो लोकपाल लाना चाहती है लेकिन भाजपा शासित राज्यों में लोकायुक्त नहीं लाना चाहती है. विपक्ष और ख़ासकर बीजेपी चाहती ही नहीं कि लोकपाल बिल पास हो. राजनीति अपनी जगह है लेकिन सरकार संविधान और लोकतांत्रिक प्रणाली को कमज़ोर करने की इजाज़त नही दे सकती. सरकार ये नहीं चाहती कि ऐसा लोकपाल बने जो किसी को भी जवाबदेह ना हो.”

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Image caption लालू प्रसाद यादव ने बहस के दौरान कहा कि मनमोहन सिंह को ही लोकपाल बना देना चाहिए.

मुलायम सिंह यादव, समाजवादी पार्टी

“लोकपाल विधेयक ने जनता को निराश किया है. लोकपाल विधेयक में संशोधन किया जाना चाहिए ताकि भ्रष्टाचार की जांच अदालत के देखरेख के तहत किए जाने का प्रावधान हो. लोकतंत्र की प्रणाली लोकपाल से ज़्यादा बड़ी है और संसद से ऊपर कुछ नहीं हो सकता. जो आरोप आज सीबीआई पर लगाए जा रहे हैं, वही आरोप कल लोकपाल पर भी लग सकते हैं.”

शरद यादव, जनता दल (युनाइटड)

“भ्रष्टाचार को लेकर जनता में बहुत गुस्सा है. सीबीआई का राजनीतिक इस्तेमाल किया गया है इसलिए लोकपाल बनाने से पहले सीबीआई को निष्पक्ष और स्वतंत्र बनाने की कोशिश की जानी चाहिए. सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में लोकपाल की वजह से इतने नए मामले आ जाएंगे जिनका समय रहते निपटारा नहीं हो पाएगा. ”

मनमोहन सिंह, प्रधानमंत्री

“भ्रष्टाचार से निपटने की कोशिश में हमें ये नहीं भूलना चाहिए कि इस प्रक्रिया में मौजूदा व्यवस्था के तंत्र ही कमज़ोर ना हो जाएं. सरकार का मत यही है कि सीबीआई को लोकपाल के तहत काम करने नहीं दिया जा सकता क्योंकि ये संसद के दायरे से बाहर होगा. इस देश में हर इकाई को संविधान के तहत ही काम करना होगा और संसद के प्रति जवाबदेह रहना होगा. केन्द्र की कई योजनाएं राज्यों द्वारा ही लागू की जाती हैं इसलिए इनमें भ्रष्टाचार रोकने के लिए दोनों स्तरों को जोड़ कर देखना ज़रूरी है. मैं सभी सांसदों से अपील करता हूं कि वे अपनी पार्टियों के हितों के बारे में नहीं ब्लकि देश के हित में सोचें और लोकपाल विधेयक को पारित करने में मदद करें.”

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Image caption लालू प्रसाद ने सीबीआई को लोकपाल के दायरे में लाने का विरोध किया.

लालू प्रसाद यादव, राष्ट्रीय जनता दल

“हम सब यहां पर सांसदों, विधायकों और सरकारी कर्मचरियों की मौत के वारंट पर हस्ताक्षर करने के लिए आए हैं. आपको (प्रधानमंत्री की ओर इशारा करते हुए) जल्द ही अपनी कुर्सी से हटना पड़ जाएगा. लोकपाल विधेयक प्रभावशाली बिल नही है. इसे स्थायी समिति में एक बार फिर वापस भेजिए. अनशन के ज़रिए पहले लोकपाल और फिर 'राइट टू रिजेक्ट' और 'राइट टू रिकॉल' को लाने का दबाव बनाया जाएगा. सीबीआई के मौजूदा तंत्र को छेड़ना सही नहीं है”

यश्वंत सिन्हा, भाजपा

“सरकार दरअसल खुद ही विधेयक पारित नहीं करवाना चाहती इसलिए विवादास्पद मुद्दे छेड़ रही है. सांसद चुने जाना बेहद मुश्किल है और उसकी ज़िम्मेदारी निभाना भी आसान नहीं है. ये दंतहीन लोकपाल है, इसकी प्रक्रिया और व्यवस्था बहुत जटिल है, इसलिए इसके मौजूदा स्वरूप में भाजपा इसका समर्थन नहीं करती.”

शशि थरूर, कांग्रेस

“सदन के सदस्यों को सरकार के इस विधेयक को लाने की अहमियत कम नहीं आंकनी चाहिए. लोकसभा में हुई इस चर्चा में मीन-मेख निकालने की कोशिश ज़्यादा की गई है. उत्तराखंड के लोकायुक्त विधेयक में भ्रष्टाचार के मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ कदम उठाना केन्द्रीय लोकपाल में प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ कदम उठाने से भी मुश्किल है. पार्टियों में असहमति के बावजूद लोकपाल क़ानून बनने दिया जाना चाहिए ताकि उस अनुभव से कुछ बेहतर किया जा सके.”

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