राज्यसभा में लोकपाल बिल पर बहस शुरू

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Image caption सोमवार को लोकपाल विधेयक कुछ संशोधनों के साथ और हंगामे के बीच लोकसभा में पारित हुआ था.

तमाम विवादों के बीच लोकसभा में लोकपाल बिल पारित होने के बाद अब सबकी निगाहें राज्यसभा पर लगी हुई हैं.

गुरूवार को संसदीय कार्यमंत्री नारायणसामी ने राज्यसभा में बहस की शुरुआत की.

पहले बुधवार को ही राज्यसभा में लोकपाल बिल पेश करने और उस पर बहस कराने की बात थी लेकिन ऐसा नहीं हो सका.

बहस की शुरूआत करते हुए नारायणसामी ने कहा कि बिल बनाते वक़्त सरकार ने सभी पक्षों की मांग का ख़्याल रखा है.

लेकिन विपक्षी दलों और ख़ासकर प्रमुख दल भारतीय जनता पार्टी ने इतने महत्वपूर्ण बिल पेश किए जाने के समय प्रधानमंत्री की ग़ैरमौजूदगी पर आपत्ति जताई.

भाजपा ने प्रधानमंत्री को सदन में बुलाने की मांग की.

उसके बाद राज्यसभा के सभापति हामिद अंसारी ने सदन को सूचित किया कि प्रधानमंत्री कुछ ही देर में सदन में पहुंचेगें.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उम्मीद जताई है कि सरकार राज्यसभा में लोकपाल बिल को पास कराने में सफल होगी.

लेकिन 245 सदस्यों वाली राज्य सभा में यूपीए सरकार के 100 से भी कम सांसद हैं जिस कारण लोकपाल बिल के पारित होने को लेकर संदेह बना हुआ है.

कांग्रेस, एनसीपी, डीएमके, तृणामूल कांग्रेस, एलजेपी और आरएलडी के कुल मिलाकर 93 सदस्य हैं. यूपीए सरकार को बाहर से समर्थन देने वाले दलों के पास भी कुल 27 ही सदस्य हैं. इनमें बीएसपी के 18, समाजवादी पार्टी के पांच और आरजेडी के चार सदस्य हैं.

राज्य सभा में स्थिति
कांग्रेस 71
भाजपा 51
बीएसपी 18
सीपीएम 13
जनता दल यू 8
मनोनित सदस्य 8
एनसीपी 7
डीएमके 7
स्वतंत्र सांसद 6
समाजवादी पार्टी 5
एआईएडीएमके 5
सीपीआई 5
राष्ट्रीय जनता दल 4
आरएलडी 1
इनोलो 1

कांग्रेस को सहयोगी पार्टियों का पूर्ण समर्थन भी हासिल नहीं है. बुधवार को वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने तृणमूल कांग्रेस नेतृत्व से मुलाक़ात की थी. तृणमूल बिल में राज्यों में लोकायुक्त बनाने के प्रावधान से नाख़ुश है.

समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के रुख़ पर भी काफ़ी कुछ निर्भर करेगा.

अगर राज्यसभा ऐसे किसी संशोधन को मंज़ूर कर लेती है जिसे लोकसभा ने मंज़ूर नहीं किया है तो बिल को फिर से लोकसभा के पास भेजना होगा. अगर लोकसभा ये संशोधन नामंज़ूर कर देती है तो केवल संयुक्त सत्र में ही बिल पारित हो सकता है. अन्यथा ये एक बार फिर ठंडे बस्ते में जा सकता है.

लोकसभा में पारित

मंगलवार को 10-12 घंटों तक चली बहस के बाद लोकपाल बिल कुछ संशोधनों के साथ लोकसभा में पारित हो गया था हालांकि इसे संवैधानिक दर्जा नहीं मिल पाया है.

उधर अन्ना हज़ारे ने अपना तीन दिन का अनशन दूसरे दिन ही बुधवार को मुंबई में ख़त्म कर दिया. साथ ही उन्होंने जेल भरो आंदोलन भी फ़िलहाल रोक दिया है.

अन्ना के सहयोगी अरविंद केजरीवाल के मुताबिक़ इसका कारण अन्ना हज़ारे की बिगड़ती तबियत और लोकसभा का “कमज़ोर” लोकपाल विधेयक पास करना है.

विपक्ष ने मंगलवार को लोकपाल बिल में कई संशोधनों के प्रस्ताव रखे थे जैसे कॉरपोरेट, मीडिया और एनजीओ को भी इसके दायरे में लाना लेकिन ये माने नहीं गए. वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने वॉकआउट किया था.

लोकपाल बिल पर चर्चा करने के लिए संसद के शीतकालीन सत्र को ख़ासतौर पर तीन दिनों के लिए बढ़ाया गया है.

सबसे पहली बार वर्ष 1968 में लोकपाल बिल पेश किया गया था लेकिन वो पास नहीं हो सका. उसके बाद भी कई बार ये बिल पेश किया गया था लेकिन पास नहीं हो पाया था.

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