भाजपा अपनी बात से मुकर गई: कांग्रेस

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Image caption राज्य सभा में लोकपाल को लेकर सारे दिन हंगामा रहा फिर भी विधेयक पास नहीं हो सका.

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री पवन बंसल ने आरोप लगाया है कि राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरूण जेटली ने प्रधानमंत्री के साथ एक बैठक के दौरान ख़ुद ही सुझाव दिया था कि लोकायुक्त का मुद्दा भी प्रस्तावित लोकपाल विधेयक में शामिल किया जाए.

उन्होंने कहा कि बाद में भारतीय जनता पार्टी अपनी बात से मुकर गई.

पवन बंसल ने शुक्रवार को दिल्ली में एक प्रेस कांफ्रेस के बाद मीडिया के सवालों के जवाब में कहा, "जब बाद में प्रधानमंत्री के कमरे में बैठक हुई थी तो अरूण जेटली वहां हाज़िर थे. उन्होंने क़ाग़ज़ पकड़कर ये तीनों प्वाइंट लिखकर दिए थे. उस वक़्त हम क्या अंदाज़ा लगाते. हमने तो ये सोचा था कि उन्होंने जो किया, उस पर वे आख़िर तक साथ रहेंगे. वे एक बड़ी पार्टी के नेता हैं."

ये बयान पवन बंसल ने इस सवाल के जवाब में दिया कि सरकार पूरे मामले को व्यवस्थित नहीं कर पाई.

संसदीय कार्य मंत्री का कहना था कि लोकपाल विधेयक को बजट सत्र में दोबारा राज्य सभा में पेश किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि राज्य सभा में विभिन्न दलों ने विधेयक में जिन संशोधनों का सुझाव दिया है, सरकार उसपर चर्चा करेगी और देखेगी कि उसमें कौन-कौन से संभव हो सकते हैं.

संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि गुरूवार को राज्य सभा में कुल मिलाकर 187 संशोधनों का प्रस्ताव आया था जिनमें से कई एक दूसरे के विरोधाभासी थे जिन्हें अगर पास किया जाता तो ये क़ानून "एक मज़ाक" बन जाता.

लोकसभा

उन्होंने बार-बार ये ज़ोर देकर कहा कि इन संशोधनो को मानने का अर्थ होता कि विधेयक को फिर से लोकसभा में भेजना पड़ता जिसका मतलब था कि पूरी

प्रक्रिया दोबारा से शुरू करनी होती.

उधर मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष नितिन गडकरी ने कहा कि जिस तरह से सरकार को इस मामले में पराजय का मूहं देखना पड़ा है उसके बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है.

नितिन गडकरी ने कहा, "नैतिकता के आधार पर मनमोहन सिंह और इस सरकार को तुरंत इस्तीफ़ा देना चाहिए और देश को मुक्त करना चाहिए."

बीजेपी नेता का कहना था कि प्रधानमंत्री की मौजूदगी में सदन में जिस तरह की घटना हुई "वो संसदीय लोकतंत्र को कलंकित करने वाली थी."

नितिन गडकरी का इशारा उस घटना की ओर था जिसमें राष्ट्रीय जनता दल के एक सांसद ने बिल के मसौदे को फाड़ कर फेक दिया था.

वादे से मुकरना

मीडिया से बात करते हुए पवन बंसल का कहना था कि 27 अगस्त को संसद ने जो प्रस्ताव पास किया था उसके मुताबिक़ साफ़ था कि जो क़ानून बनेगा उसमें राज्यों में लोकायुक्त के लिए भी प्रावधान होगा लेकिन अब बीजेपी इस बात से पीछे हट रही है.

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के बार-बार कहने के बावजूद विपक्षी दल ने राज्य सभा में बहस को 28 दिसंबर से शुरू करने से इंकार कर दिया और विधेयक पर चर्चा गुरूवार को ही शुरू हो पाई, सदस्य देर रात तक बोलते रहे, जिसकी वजह से किसी भी दूसरी चर्चा के लिए, यानि संशोधनो वगैरह पर बातचीत के लिए कोई समय ही नहीं बचा.

घंटे भर के लंबे चले प्रेस कांफ्रेस में, जो काफ़ी हंगामो से भरा रहा, पवन बंसल ने कभी सीधे तौर पर बीजेपी का नाम लेकर और कभी यूं ही कहा, "उनकी रणनीति है कि अन्ना हज़ारे का समर्थन करो लेकिन लोकपाल बिल को पास न होने दो."

इस सवाल के जवाब में कि सरकार तो अपने सहयोगी दल त्रिणमुल कांग्रेस को भी सहमत नहीं कर पाई संसदीय कार्य मंत्री का कहना था कि अगस्त में सदन ने दो प्रस्ताव पारित किया था सभी दल उसके हिस्सा थे.

राज्य के अधिकार

उनका कहना था कि देश में पहले से ही भ्रष्टाचार निरोधक क़ानून है, जो केंद्र और राज्य दोनों जगह के कर्मचारियों पर लागू होता है लेकिन किसी ने भी नहीं कहा कि वो राज्यों के अधिकार में दख़लअंदाज़ी है.

केंद्रीय मंत्री का कहना था कि सरकार को मालूम था कि उसे राज्य सभा में बहुमत हासिल नहीं है लेकिन ये स्थिति अचानक से पैदा नहीं हूई.

उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष और सहयोगियों दलों को इस बात को समझाने में कामयाब होगी कि वो जो क़ानून ला रही है वो किसी भी तरह से राज्य के अधिकारों में हस्तक्षेप नहीं है.

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