'सोवियत संघ को परीक्षण के बारे में बताया था'

इंदिरा गांधी
Image caption संदेश के मुताबिक़ परमाणु परीक्षण से पहले इंदिरा गांधी की राजनीतिक स्थिति कमज़ोर हो गई थी

हंगरी के 1974 के गोपनीय दस्तावेज़ों में दावा किया गया है कि भारत ने उस साल किए गए परमाणु परीक्षण की मंशा के बारे में सोवियत संघ को पहले से बता दिया था.

जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र में हंगरी के स्थाई कार्यालय ने 14 अगस्त 1974 को हंगरी के विदेश मंत्रालय को एक टेलिग्राम भेजा था.

उस संदेश के अनुसार, "निरस्त्रीकरण से जुड़े सोवियत संघ के एक अधिकारी ने बताया है कि भारत ने परमाणु परीक्षण की मंशा सोवियत संघ को पहले से बता दी थी."

अमरीका स्थित वुड्रो विल्सन इंटरनेशनल सेंटर फ़ॉर स्कॉलर्स की ओर से 'परमाणु प्रसार के अंतरराष्ट्रीय इतिहास' पर तैयार किए गए एक शोध पत्र में ये दस्तावेज़ शामिल किया गया है.

इसमें दावा है कि सोवियत संघ ने भारत पर दबाव भी बनाने की कोशिश की थी जिससे परमाणु परीक्षण टलवाए जा सकें.

हंगरी के विदेश मंत्रालय को भेजे गए उस टेलिग्राम में बताया गया था कि परमाणु परीक्षण से पहले तक भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी की राजनीतिक स्थिति कमज़ोर हो रही थी. दस्तावेज़ के अनुसार उस परमाणु परीक्षण के बाद इंदिरा गांधी की स्थिति फिर से मज़बूत हो गई.

भारत स्थित हंगरी के राजनयिकों ने उस समय ये भी दावा किया था कि भारत ने परमाणु परीक्षण के बाद आक्रामक रुख़ नहीं अख़्तियार करने के लिए समाजवादी देशों को धन्यवाद भी दिया था.

समाजवादी देश

दस्तावेज़ के अनुसार भारतीय विदेश मंत्रालय के एक सचिव ने 22 मई 1974 को जर्मनी के राजदूत से कहा कि भारत समाजवादी देशों के रवैये को लेकर काफ़ी संतुष्ट है.

भारत में हंगरी के दूतावास की ओर से हंगरी के विदेश मंत्रालय को 23 मई 1974 को भेजे गए एक टेलीग्राम में कहा गया, "भारतीय परमाणु परीक्षण को लेकर समाजवादी देशों के भारत में मौजूद राजदूतों ने एक दूसरे से चर्चा की और ये तय किया कि वे भारत की आधिकारिक घोषणा में विश्वास व्यक्त करेंगे, जिसके अनुसार ये परीक्षण शांतिपूर्ण उद्देश्यों के साथ किया गया है."

इस टेलिग्राम ने परीक्षण के बाद भारत के अमरीका और चीन के साथ संबंधों पर भी टिप्पणी की. संदेश के अनुसार, "हमारे साझा आकलन के अनुसार मौजूदा हालात में भारतीय परमाणु परीक्षण से भारत-अमरीका संबंधों में हो रहे सुधार में रुकावट आएगी और भारत-चीन संबंधों में तनाव बढ़ेगा."

इसके अलावा सोवियत संघ में स्थित हंगरी के दूतावास ने जून 1967 में कहा था कि भारत के परमाणु हथियार विकसित करने की राह में कोई तकनीकी रोड़ा नहीं है.

दूतावास के अनुसार, "भारतीय परमाणु उद्योग ऐसे मुक़ाम पर पहुँच गया है जहाँ अगर वह परमाणु हथियार विकसित करने का फ़ैसला करता है तो भारत 10 से 11 महीनों में ऐसा कर भी लेगा."