भारतीय कश्मीर में एक प्रदर्शनकारी की मौत

कश्मीर
Image caption भारत और पाकिस्तान की सीमा पर होने के कारण कश्मीर के उरी इलाक़े में सेना की भारी तैनाती होती है. (फ़ाईल फ़ोटो)

पुलिस के मुताबिक़ कश्मीर में नेशनल हाईड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन यानी एनएचपीसी के एक संयंत्र के सुरक्षाकर्मियों ने सोमवार को प्रदर्शनकारियों पर गोलियाँ चला दीं जिसमें एक युवक की मौत हो गई और चार अन्य घायल हो गए.

लोग राज्य में बिजली कटौतियों से तंग आकर प्रदर्शन कर रहे थे.

घटना श्रीनगर से 75 किलोमीटर दूर बारामुला ज़िले के उड़ी शहर की है. भारत और पाकिस्तान की सीमा पर बसे होने के कारण उड़ी में आम तौर पर सेना का भारी जमावड़ा रहता है.

सरकार के प्रवक्ता ने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा है कि केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जवान कश्मीर में चरमपंथियों के खिलाफ़ होने वाली कार्रवाई का हिस्सा नहीं हैं.

सरकार की ओर से जारी किए गए बयान में कहा गया, ''सीआईएसएफ़ राज्य सरकार के अधीन नहीं होता है और इस मामले के संदर्भ में केन्द्रीय गृह मंत्रालय से अपना विरोध जताया गया है.''

'बिजली की कमी'

सूत्रों के अनुसार घटना के बाद सीआईएसएफ़ के चार से ज़्यादा जवानों को स्थानीय पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया, उनके हथियार भी ज़ब्त कर लिए गए.

बिजली की कमी से जूझ रहे इस इलाक़े में घटना के बाद से ही तनाव बना हुआ है.

सूबे में पिछले ही महीने घोषणा की गई थी कि क़रीब 700 मेगावॉट बिजली की कमी के चलते बिजली आपूर्ति बाधित होगी.

बिजली की रोज़ाना होने वाली कटौतियों को लेकर लोगों में भारी आक्रोश है जिसके विरोध में कई गाँवों और शहरों में लोग सड़कों पर उतर रहे हैं.

व्यापारिक संगठनों ने भी माँग की है कि एनएचपीसी की रुकी बिजली परियोजनाओं को बहाल किया जाए. राज्य में एनएचपीसी 2100 मेगावॉट की कुल क्षमता की दस से ज़्यादा बिजली परियोजनाएं चलाती है.

एक प्रमुख व्यापारी संगठन के मुखिया ने कहा, ''जम्मू और कश्मीर राज्य की 21000 मेगावॉट बिजली बनाने की क्षमता है, लेकिन हम इसका दस फ़ीसदी ही बना पाते है, वो भी एनएचपीसी के ज़रिए.''

'बिजली चोरों के खिलाफ़ फ़तवा जारी करें'

अलगाववादी नेता मीरवायज़ उमर फ़ारुक़ ने भी जाड़े के मौसम में पर्याप्त बिजली नही दे पाने के लिए सरकार के ख़िलाफ़ बयानबाज़ी की थी.

इसके जवाब में राज्य के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''अलगाववादियों को बिजली चोरों और बिजली के बिल का भुगतान नहीं करने वालों के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी करना चाहिए.''

जम्मू और कश्मीर में विपक्षी दल पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के प्रवक्ता नईम अख़्तर ने कहा, ''उड़ी में हुई मौत सरकार की विफलता आम जनता पर मढ़ने का परिणाम है.''

अलगाववादी नेता मीरवायज़ उमर फ़ारूक़ ने कहा कि सेना और अर्धसैनिक बलों की इकाइयों पर बिजली के प्रयोग का क़रीब 700 करोड़ रुपया बकाया है लेकिन सरकार अपनी ग़ल्तियों के लिए आम लोगों को सज़ा दे रही है.

कश्मीर के राजनीतिक दलों के बीच बिजली का मुद्दा पिछले कई दशकों से ज्वलंत बना हुआ है. साल 1984 में बिजली के लिए प्रदर्शन कर रहे कम से कम पाँच लोग पुलिस कार्रवाई में मारे गए थे.

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