कोलकाता पुलिस ने ली 'कोलावेरी दी' की मदद

कोलावेरी डी.....गीत की दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती लोकप्रियता को भुनाने के मक़सद से कोलकाता पुलिस ने अब इसी की तर्ज़ पर एक अनूठा अभियान शुरु किया है. मक़सद है बिना हेलमेट के मोटरसाइकिल चलाने वालों में जागरुकता फैलाना.

इसकी कैचलाइन है व्हाई दिस हीरोगिरी, हीरोगिरी, हीरोगिरी डी? कोलकाता में जगह-जगह ऐसे होर्डिंग लगाए गए हैं. इन पर बिना हेलमेट के बाइक चलाते दो लोगों को दिखाया गया है जिनमें युवक किसी युवती को पीछे बैठा कर जा रहा है.

क्रिसमस के मौक़े पर कोलकाता में इस गीत के गायक धनुष के कार्यक्रम के दौरान युवाओं की भारी भीड़ उमड़ी थी.

लेकिन आख़िर पुलिस को यह ख़्याल कैसे आया? कोलकाता के पुलिस आयुक्त आरके पचनंदा कहते हैं, “साल के आख़िर और नए साल की शुरूआत में कई युवक बिना हेलमेट पहने बेहद लापरवाही से मोटरसाइकिल चलाते हैं. इन युवकों को हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित करने की ख़ातिर ही हमने शहर के तमाम व्यस्ततम चौराहों पर ऐसे होर्डिंग लगाए हैं.”

पचनंदा कहते हैं कि लोग ख़ुशियाँ मनाएँ लेकिन उन्हें सुरक्षा के नियमों का पालन भी करना चाहिए.

कितना असर ?

महानगर में लगे इन होर्डिंग्स पर गीत की तर्ज पर ही युवकों से सवाल किया गया है कि व्हाई दिस हीरोगिरी, हीरोगिरी, हीरोगिरी डी....(आख़िर बिना हेलमेट के मोटरसाइकिल चलाने की यह हीरोगिरी क्यों कर रहे हो....). होर्डिंग पर सबको हेलमेट पहनने की सलाह दी गई है.

कोलकाता पुलिस की ओर से शुरू इस अभियान को लगभग एक सप्ताह बीत चुका है. क्या युवकों पर इसका कोई असर पड़ा है?

एक कॉलेज छात्र मनीष मेहता कहते हैं, “कुछ असर तो पड़ा है. ट्रैफ़िक पुलिस के सिपाही ने जब बिना हेलमेट के बाइक चलाने के आरोप में मुझे रोका तो बड़ी शर्मिंदगी हुई. तब मेरी गर्लफ्रेंड भी साथ थी. इसलिए मैने आगे से बिना हेलमेट के घर से नहीं निकलने का फ़ैसला किया है.”

मनीष बताते हैं कि उसके कॉलेज के कई मित्रों ने भी अब हेलमेट लगा कर चलने का फ़ैसला किया है. वे कहते हैं कि यूं तो ज़्यादातर लोग हेलमेट पहनते हैं. लेकिन नए साल के स्वागत के दौरान अमूमन कुछ लोग मस्ती में बिना हेलमेट के ही बाहर निकल पड़ते हैं.

इस मुहिम पर पुलिस का क्या कहना है? महानगर के रवींद्र सदन इलाक़े के व्यस्ततम चौराहे पर तैनात ट्रैफ़िक पुलिस के एक अधिकारी मोहित सेन बताते हैं, “इस अभियान के शुरू होने के बाद एक सप्ताह के दौरान डेढ़ सौ से ज़्यादा लोगों का चलान किया गया है. यह अभियान शुरू होने के बाद पहली बार पकड़े जाने वालों का चलान नहीं किया जा रहा है. उनको सीधे वह होर्डिंग दिखा कर पूछा जा रहा है कि क्या आपने इसे पढ़ा है? अगर हां, तो हीरोगिरी क्यों कर रहे हैं.”

मोहित सेन कहते हैं, “ऐसे लोगों को यह भी समझाया जा रहा है कि हेलमेट आपकी सुरक्षा के लिए कितना ज़रूरी है. कई मामलों में तो युवकों के साथ पीछे बैठी उनकी महिला मित्र ही उनको हेलमेट पहनने के लिए प्रेरित कर रही हैं. दूसरी बार पकड़े जाने पर ऐसे मोटरसाइकिल सवारों को सौ रुपए का जुर्माना देना पड़ता है.”

गैर-सरकारी संगठन कंसर्न फ़ॉर कलकत्ता के संयोजक नारायण जैन ने पुलिस के इस अभियान की सराहना की है.

जैन कहते हैं, “युवा पीढ़ी में इस समय कोलावेरी दी गीत का भारी क्रेज़ है. ऐसे में पुलिस का यह अभियान युवकों को सुरक्षा नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करेगा.”

पुलिस के इस अभियान का असर तो और कुछ दिनों बाद साफ़ होगा. लेकिन फ़िलहाल तो कोलकाता ट्रैफ़िक पुलिस के अधिकारी व्हाई दिस हीरोगिरी...हीरोगिरी...हीरोगिरी डी...ही गुनगुना रहे हैं.