तलवार दंपति पर मुक़दमा चले: सुप्रीम कोर्ट

तलवार दंपत्ती
Image caption मामले का संज्ञान लेते हुए मजिस्ट्रेट ने 9 फ़रवरी 2011 को तलवार दंपत्ती के खिलाफ़ सम्मन जारी किया था

आरुषी हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आरुषी के पिता राजेश तलवार और मां नूपुर तलवार पर मुक़दमा चलाए जाने का आदेश दिया है.

साल 2008 में राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा में 14 वर्षीया आरुषी तलवार और नौकर हेमराज की हत्या कर दी गई थी.

इसी मामले में राजेश और नूपुर तलवार ने अदालत में अपने ख़िलाफ़ आपराधिक मामला नहीं चलाए जाने की अर्ज़ी दी थी, लेकिन जज एके गांगुली और जेएस खेहर ने अर्ज़ी ख़ारिज करते हुए दंपति के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला चलाए जाने का रास्ता खोल दिया है.

माना जा रहा है कि इस फ़ैसले के बाद तलवार दंपति की गिरफ़्तारी की संभावना बढ़ गई है.

खंडपीठ ने कहा कि मजिस्ट्रेट के दंपति के ख़िलाफ़ मुक़दमा चलाए जाने के आदेश में कुछ भी ग़लत नही है.

इस मामले में सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट को ख़ारिज करने के निचली अदालत के फ़ैसले में दख़ल देने से इनकार करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट ने सोच-समझ कर आदेश सुनाया है.

तलवार दंपति की पुत्री आरुषी तलवार की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी. आरुषी का शव उनके पारिवारिक निवास में 15-16 मई 2008 की रात पाया गया था. इसी के एक दिन बाद नौकर हेमराज का भी शव घर की छत पर पाया गया था.

जाँच

इस मामले में प्रारंभिक जाँच उत्तर प्रदेश की पुलिस ने की, जिसने 23 मई साल 2008 को राजेश तलवार को गिरफ़्तार कर लिया.

इसी के बाद मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी गई और ग़ाज़ियाबाद की एक अदालत ने 11 जुलाई 2008 को राजेश तलवार को ज़मानत पर रिहा कर दिया.

ढाई साल तक जांच करने के बाद अंतिम रिपोर्ट में सीबीआई ने कहा कि उन्हें इस मामले में तलवार दंपति के ख़िलाफ़ कोई साक्ष्य नहीं मिले.

हालांकि ग़ाज़ियाबाद की अदालत ने सीबीआई की इस अंतिम रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया था और कहा था कि आरुषी की हत्या के मामले में दंपति के खिलाफ़ मुक़दमा चलाए जाने के लिए प्रथम दृष्या साक्ष्य काफ़ी हैं.

इस मामले का संज्ञान लेते हुए मजिस्ट्रेट ने नौ फ़रवरी 2011 को तलवार दंपति के ख़िलाफ़ सम्मन जारी किया था.

सम्मन के ख़िलाफ़ तलवार दंपति इलाहाबाद हाई कोर्ट भी गए जहाँ उनकी अर्जी ख़ारिज़ कर दी गई.

इसी के बाद वे सुप्रीम कोर्ट पहुँचे थे जिसने पिछले साल 19 मार्च को उनके ख़िलाफ़ इस मुक़दमे पर रोक लगा दी थी.

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