'घाटे' के चलते लाइसेंस रद्द नहीं: अजित सिंह

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केंद्रीय उड्डयन मंत्री अजित सिंह ने कहा है कि ‘सुरक्षा संबंधी चिंताओं’ के चलते घाटा झेल रही हवाई सेवाओं का लाइसेंस रद्द् नहीं किया जाएगा.

भारतीय समाचार पत्र इकोनॉमिक टाइम्स को दिए साक्षात्कार में अजित सिंह ने कहा, ''आर्थिक घाटे के चलते सुरक्षा कारणों से हवाई सेवा को बंद करना तार्किक नहीं. इसके लिए एयरलाइंस को सुरक्षा नियमों के पालन की हिदायतें दी जा सकती हैं.''

ग़ौरतलब है कि गुरुवार को नागरिक उड्डयन निदेशालय ने कहा था कि किंगफ़िशर और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी एयरलाइंस निदेशालय को आश्वस्त करें कि उनके आर्थिक घाटे का असर ‘सुरक्षा’ पर नहीं पड़ेगा.

उड्डयन निदेशालय ने यह भी कहा था कि एयरलाइंस आर्थिक घाटे संबंधी मामलों को सुलझाने के लिए एक निश्चित समय सीमा तय करें.

दिसंबर माह में केंद्रीय उड्डयन मंत्री का पद संभालने वाले अजित सिंह ने कहा कि दुनियाभर में हवाई सेवाएं आर्थिक घाटे का असर झेल रही हैं और ऐसे में उड्डयन क्षेत्र को बचाए रखने के लिए हवाई सेवाओं को मदद दिए जाने की ज़रूरत है.

बढ़ती मुश्किलें

ये मामला उड्डयन निदेशालय की एक आंतरिक रिपोर्ट से जुड़ा है जिसके मुताबिक किंगफ़िशर और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी एयरलाइंस में बढ़ रहे आर्थिक घाटे ने सुरक्षा संबंधी चिंताओं को बढ़ा दिया है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक जांच के दौरान किंगफ़िशर और एयर इंडिया एक्सप्रेस सुरक्षा मानकों पर ख़री नहीं उतरीं. हालांकि किंगफ़िशर एयरलाइंस का कहना है कि उसकी उड़ाने पूरी तरह सुरक्षित हैं और सुरक्षा नियमों के साथ कोई रियायत नहीं बरती जा रही है.

उड्डयन निदेशालय की इस ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक आर्थिक चिंताओं के बीच कई अन्य एयरलाइंस में भी इस तरह के सवाल उठ रहे हैं.

भारतीय उड्डयन क्षेत्र के एक मुश्किल दौर की शुरुआत का संकेत देते हुए कुछ समय पहले उद्दोगपति विजय माल्या की किंगफ़िशर एयरलाइंस ने घाटे की घोषणा की थी.

आंकड़ों के मुताबिक भारत की छह प्रमुख एयरलाइंस में से पांच घाटे में हैं और इसका सबसे बड़ा कारण ईंधन के लगातार बढ़ते दाम हैं.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक मार्च 2011-2012 के वर्षांत तक भारतीय एयरलाइन क्षेत्र में घाटा बढ़कर 20 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा. इसकी वजह ईंधन की बढ़ती कीमतें, सरकार की ओर से लगाए गए कर और प्रतिस्पर्धा के चलते टिकटों के घटते दाम हैं.

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