चुनाव आयोग का फ़ैसला ग़लत: बसपा

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Image caption चुनाव आयोग का तर्क है कि सभी पार्टियों को चुनाव के लिए समान ज़मीन तैयार करके दिए जाने के लिए ये क़दम ज़रूरी था.

उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री मायावती और उनके चुनाव चिह्न हाथी की प्रतिमाओं को ढँकने के चुनाव आयोग के आदेश को ग़लत ठहराते हुए बहुजन समाज पार्टी ने कहा है कि ये फ़ैसला एक तरफ़ा है और संविधान के 14वें अनुच्छेद का उल्लंघन है.

मुख्य चुनाव आयुक्त वाईएस कुरैशी ने चुनाव आचार-संहिता के तहत राज्य में लगी मायावती और हाथियों की सभी मूर्तियों को ढकने का निर्देश दिया था.

उत्तर प्रदेश के चुनाव आयोग के मुताबिक़ मुख्यमंत्री मायावती और बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी को ढँकने का काम बुधवार को निर्धारित समय में पूरा कर लिया गया था.

इस फ़ैसले का विरोध करते हुए बसपा के महासचिव सतीश चंद्र मिश्र ने कहा है कि ये फ़ैसला समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के इशारे पर लिया गया है और दलिज समाज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है.

मायूसी

उन्होंने कहा, ''चुनाव आयोग का ये फ़ैसला संविधान के 14वें अनुच्छेद का उल्लंघन है जिसमें सभी को समानता का अधिकार दिया गया है. चुनाव आयोग को इस तरह का फ़ैसला बाकी दलों के लिए भी लेना चाहिए.''

सतीश चंद्र मिश्र के मुताबिक इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ बसपा के कई समर्थक और पार्टी कार्यकर्ता सड़कों पर उतरने वाले थे लेकिन बसपा प्रमुख मायावती ने उन्हें इन बातों से विचलित न होने और कानून व्यवस्था बनाए रखने की सख्त हिदायत दी है.

बसपा का कहना है कि उसे राज्य में निष्पक्ष चुनावों की उम्मीद है लेकिन इस फ़ैसले ने पार्टी को वाकई मायूस कर दिया है.

सतीश चंद्र मिश्र के मुताबिक़, "उत्तर प्रदेश में पार्कों, सार्वजनिक जगहों और दफ़्तरों पर बनी हाथी की मूर्तियों और बसपा के पार्टी चिन्ह में समानता नहीं है. इन जगहों पर बनी मूर्तियों में स्वागत-प्रतीक के रुप में हाथी की सूंड ऊपर की ओर उठी हुई है जबकि बसपा के पार्टी चिन्ह हाथी की सूंड लटकी हुई है.’’

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार सतीश चंद्र मिश्र के हवाले से कहा कि चुनाव आयोग को अगली कार्रवाई के रुप में समाजवादी पार्टी के चुनाव चिन्ह साइकिल, भाजपा के चुनाव चिन्ह कमल और हैंडपंप पर भी रोक लगानी चाहिए.

याचिका ख़ारिज

इससे पहले मूर्तिया ढँकें जाने के विरोध में इलाहाबाद हाई कोर्ट में दाखिल की गई एक जनहित याचिका को अदालत ने तकनिकी खामियों के चलते खारिज कर दिया.

अदालत ने याचिकाकर्ता से कहा कि वो चाहें तो याचिका दुबारा नये सिरे से फाइल कर अपनी बात कोर्ट के सामने रख सकते है.

याचिकाकर्ता धीरेन्द्र प्रताप सिंह ने कोर्ट से अपील की थी चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में बहुजन समाज पार्टी के चुनाव चिन्ह हाथी को ढंकने का जो आदेश दिया था वो बेतुका है और हाथी हिन्दुओं के आराध्य गणेश का रूप होने के चलते आस्था से जुड़ा है.

उनका कहना है कि संविधान की धारा 25 के तहत मिली धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन होता है लिहाजा आयोग के आदेश पर रोक लगाई जाए.

इस मामले में सुनवाई के दौरान बसपा की तरफ से भी अर्ज़ी दाखिल की गई जिसमें कहा गया कि याचिका का बसपा से कोई ताल्लुक नही है.

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