सोशल साइटों पर मुक़दमे को मंज़ूरी

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Image caption सोशल नेटवर्किंग कंपनियों के प्रतिनिधियों को आगामी 13 मार्च को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है

केंद्र सरकार ने गूगल, फ़ेसबुक सहित 21 और सोशल नेटवर्किंग साइटों पर आपत्तिजनक सामग्री को बढ़ावा देने के आरोप में मुक़दमा चलाए जाने की अनुमति दे दी है.

सरकार ने दिल्ली की एक अदालत को शुक्रवार को बताया कि सरकार के पास इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि 21 सोशल नेटवर्किंग साइट विभिन्न वर्गों के बीच दुश्मनी फैलाने और राष्ट्रीय एकता को हानि पहुँचाने का कार्य कर रहे हैं.

इन वेबसाइटों में याहू और माइक्रोसॉफ़्ट भी शामिल है. कुल 21 साइटों में से 10 विदेशी साइटें हैं.

इससे पहले अदालत ने इन कंपनियों को सम्मन जारी करके कहा था कि वे 13 मार्च को अदालत में पेश होने का आदेश दिया था.

सम्मन

इससे पहले दिल्ली के एक कोर्ट ने गूगल और फ़ेसबुक जैसी विभिन्न विदेशी सोशल नेटवर्किंग साइटों को सम्मन जारी कर कहा था कि वे अपनी साइटों पर आपत्तिजनक सामग्री को बढ़ावा देने के लिए आपराधिक मामले का सामना करें.

इन कंपनियों के प्रतिनिधियों को आगामी 13 मार्च को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया गया है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ कोर्ट ने विदेश मंत्रालय से कहा है कि वो 10 विदेशी कंपनियों को सम्मन जारी करवाए.

कोर्ट ने ये आदेश तब दिया जब ‘फ़ेसबुक इंडिया’ के वकील ने कहा कि 21 कंपनियों में से क़रीब 10 कंपनियां विदेशी हैं और कोर्ट को ये साफ़ करना होगा कि उन्हें सम्मन कैसे जारी किया जाएगा.

दरअसल पत्रकार विनोद राय ने फ़ेसबुक और गूगल जैसी सोशल नेटवर्किंग साइटों के ख़िलाफ़ कोर्ट में केस दर्ज किया था.

उनका आरोप है कि फ़ेसबुक, माइक्रोसॉफ़्ट, गूगल, याहू और यू-ट्यूब पर आपत्तिजनक सामग्री लगाई जाती है.

कंपनियों को फटकार

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Image caption कोर्ट ने विदेश मंत्रालय से कहा है कि वो इन कंपनियों को सम्मन जारी करवाए.

गुरूवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने सोशल नेटवर्किंग साइट फ़ेसबुक इंडिया और सर्च इंजन गूगल इंडिया को चेतावनी दी थी कि अगर ये वेबसाइट्स आपत्तिजनक सामग्रियों पर नियंत्रण और उन्हें हटाने की व्यवस्था नहीं करतीं, तो चीन की तरह भारत में इन पर रोक लगाई जा सकती है.

इन कंपनियों का कहना है कि सोशल नेटवर्किंग साइटों पर लगाई जाने वाली सामग्रियों पर इनका कोई नियंत्रण नहीं होता और वे उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकती.

लेकिन कोर्ट ने इन कंपनियों को फटकार लगाई और कहा कि कंपनियों को उनकी साइटों पर लगने वाली सामग्री पर नियंत्रण करना ही होगा, अन्यथा चीन की तरह भारत में भी इन साइटों पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा.

मैट्रोपोलिटन मैजिस्ट्रेट सुदेश कुमार ने कहा, “विदेशी कंपनियों को सम्मन जारी करने का काम विदेश मंत्रालय को विधिवत करने दीजिए.”

कोर्ट में सुनवाई के दौरान ‘फ़ेसबुक इंडिया’ के वकील सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि मामले को एक दिन के लिए स्थगित कर दिया जाए क्योंकि मामला अभी दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है.

उन्होंने कहा कि फ़ेसबुक के चेयरमेन इस समय अमरीका में है और उन्हें सम्मन जारी करने के लिए विदेश मंत्रालय को आदेश दिया जाना चाहिए.

पिछले साल मानव-संसाधन और दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा था कि अमरीकी इंटरनेट कंपनियाँ सोशल नेटवर्क वेबसाइटों से ‘अपमानजनक’ तस्वीरों और सामग्री को हटाने में सहयोग नहीं कर रही हैं.

सिब्बल ने कहा था कि उन्होंने याहू, गूगल और फ़ेसबुक जैसी कंपनियों के अधिकारियों से इस बारे में बार-बार बात की, लेकिन उनकी ओर से कहा गया कि जब तक इस बारे में अदालत का कोई फ़ैसला नहीं आता, वो इस बारे में कुछ नहीं कर सकते.

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