कांग्रेस का घोषणापत्र जारी, बड़े नेता नदारद

कांग्रेस उत्तराखंड
Image caption कांग्रेस के घोषणापत्र के जारी होते समय वहां से अधिकतर बड़े नेता नदारद थे.

कांग्रेस ने उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के लिए अपना चुनावी घोषणापत्र शनिवार को एक साथ दो जगहों - देहरादून और हल्द्वानी में जारी किया.

भ्रष्टाचार मुक्त पारदर्शी सरकार के वायदे के अलावा घोषणापत्र में खेती और किसानी को पुनर्जीवित करने, बिजली उत्पादन, सड़क पानी के इंतज़ाम को दुरुस्त करने, मनरेगा में दिहाड़ी बढ़ाने और ठेका मजदूरी ख़त्म करने की बात भी कही गई है.

साथ ही कांग्रेस ने सरकार बनाने की सूरत में अल्पसंख्यकों के लिए एक अलग विभाग बनाने का एलान भी किया है.

कांग्रेस के प्रभारी वीरेंद्र चौधरी ने टिहरी के सांसद विजय बहुगुणा के साथ देहरादून में मीडिया की गहमागहमी के बीच पार्टी का घोषणापत्र जारी किया.

हल्द्वानी में कमान संभाली पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य और हल्द्वानी से पार्टी उम्मीदवार इंदिरा हृदयेश ने.

लेकिन घोषणापत्र को जारी किए जाते समय प्रदेश के बड़े कांग्रेस नेता वहां उपस्थित नहीं थे.

भ्रष्टाचार

भ्रष्टाचार मिटाने के उपाय के तौर पर कांग्रेस का वायदा है कि हर साल मंत्री विधायक और अधिकारी अपनी आमदनी का ब्यौरा सार्वजनिक करेंगे.

चौधरी वीरेंद्र सिंह ने कहा, "हाल के दिनों में सबसे चर्चित मुद्दा रहा है भ्रष्टाचार का और कांग्रेस एक ईमानदार और पारदर्शी प्रशासन तंत्र विकसित करेगी."

घोषणापत्र में कहा गया है कि कांग्रेस अगर सत्ता में आती है तो बेरोज़गारों का प्रति माह भत्ता बढ़ाकर 1500 रूपया कर दिया जाएगा, बेरोज़गार महिलाओं के लिये ये 2200 रूपये होगा.

कहा गया है कि महिलाओं को सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा.

किसानों औऱ उद्योगों के लिये 24 घंटे बिजली की आपूर्ति होगी और राज्य की दोनों प्रमुख बोलियों गढ़वाली और कुमांऊनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में दर्ज कराया जाएगा.

Image caption घोषणापत्र में गढ़वाली और कुमांऊनी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करवाने का वायदा शामिल है.

किसानी और खेती बाड़ी को बचाने की चिंता की बात भले ही कांग्रेस पार्टी कर रही हो लेकिन इसके लिए वो शॉर्टकट रास्ता सूझा रही है.

वीरेंद्र सिंह का कहना है उनकी सरकार बनने की सूरत में पंजाब औऱ हरियाणा की उत्तराखंड में भी मंड़ी एक्ट लागू किया जाएगा जिससे किसानों को कोई लूट नहीं पाएगा और उन्हें अपने फसल की पूरी क़ीमत मिल पाएगी.

गुटबाज़ी

लेकिन घोषणापत्र के जारी होने के मौक़े पर पार्टी के बड़े नेताओं - हरीश रावत, हरक सिंह रावत, सतपाल महाराज और यहां तक कि उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री रहे नारायण दत्त तिवारी की ग़ैरमौजूदगी ने कई तरह की चर्चाओं को जन्म दिया.

हालांकि आधिकारिक सफ़ाई के तौर पर कहा गया कि ये सभी चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं.

उत्तराखंड की 70 विधानसभा सीटों में कांग्रेस के 21 विधायक हैं.

पार्टी का दावा है कि भारतीय जनता पार्टी सरकार के ख़िलाफ़ सत्ता विरोधी लहर है जिससे उसका रास्ता आसान हो जाएगा.

लेकिन राज्य में पार्टी ख़ुद ही कम से कम पांच ख़ेमों में बंटी है और छह से अधिक सीटों पर उसे बाग़ी प्रत्याशियों से चुनौती मिल रही है.

कांग्रेस के घोषणापत्र में किए गए वायदे 2014 के आम चुनाव की तैयारी की झलक भी दिखाते हैं और हर मुद्दे पर बीजेपी सरकार के कामकाज का मूल्यांकन कर पार्टी का वायदा चार्ट बनाया गया है.

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