कश्मीर में गैस वितरण पर नियंत्रण

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Image caption आम जनता को 15 किलो के बजाय केवल पांच किलो गैस ही वितरित की जा रही है

भारत प्रशासित कश्मीर में अधिकारियों ने आम लोगों को दी जाने वाली गैस की सप्लाई पर नियंत्रण करने का फ़ैसला किया है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़ गत एक जनवरी से भारत प्रशासित कश्मीर में खाना बनाने के काम आने वाली गैस की 50 प्रतिशत कमी दर्ज की गई है.

ऐसे में राज्य सरकार ने गैस की सप्लाई को नियंत्रित कर लोगों को 15 किलो के बजाय केवल पांच किलो गैस ही वितरित करने का फ़ैसला किया है.

हालांकि सरकार का कहना है कि ऐसे कठोर क़दम केवल कुछ ही दिनों के लिए उठाए गए हैं और राज्य में जल्द ही पड़ोसी राज्य पंजाब से 750 किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन के ज़रिए गैस आयात की जाएगी.

अधिकारियों का कहना है कि इस गैस पाइपलाइन से दशकों पुरानी गैस की समस्या ख़त्म हो जाएगी.

भारी बर्फ़बारी के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग बंद पड़ा है, जिसके कारण वहां ज़रूरी सामग्रियों की सप्लाई भी रुक गई है.

जम्मू-कश्मीर राष्ट्रीय राजमार्ग ही एकमात्र सड़क है, जो कश्मीर को भारत से जोड़ता है.

सालाना समस्या

हर साल जाड़ों के महीनों में कश्मीर में गैस की आपूर्ति की समस्या हो जाती है, हालांकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि सर्दियों के मौसम से पहले ही विभिन्न सामग्रियों का भंडारण किया जाता है.

भारत प्रशासित कश्मीर के खाद्य सप्लाई मंत्री क़मर अली अखून ने बीबीसी को बताया, “हमारे पास अनाज और अन्य चीज़ों का पर्याप्त भंडार है, लेकिन गैस की समस्या बनी हुई है. पंजाब से आने वाली गैस पाइपलाइन परियोजना को भारत सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय से हरी झंडी मिल गई है. इसी साल हम इस परियोजना को पूरा कर लेंगें.”

खाना बनाने वाली गैस की कमी की समस्या को अधिकारी ज़्यादा तूल देते नहीं दिख रहे हैं, लेकिन वितरित की जाने वाली गैस की मात्रा घटा दी गई है.

खाद्य सप्लाई मंत्री क़मर अली अखून का कहना है कि ऐसा क़दम केवल एक ‘अपातकाल रणनीति’ है ताकि ज़्यादा से ज़्यादा मांग की आपूर्ति की जा सके.

उन्होंने बीबीसी को बताया कि पिछले चार दिनों से गैस सिलेंडर से भरे 130 ट्रक राजमार्ग पर फंसे हुए हैं.

सिलेंडर की काला बाज़ारी

Image caption जम्मू-श्रीनगर हाईवे बर्फ़बारी के कारण पिछले कई दिनों से जाम पड़ा हुआ है

उनका कहना था, “जैसे ही मौसम सुधरता है, राजमार्ग पर फंसे सिलेंडर एक-दो दिनों में श्रीनगर पहुंच जाएंगें.”

लेकिन एक उच्च अधिकारी का कहना है कि कश्मीर में हर दिन एलपीजी के 30,000 सिलेंडर की ज़रूरत पड़ती है, लेकिन फ़िलहाल केवल 12,000 सिलेंडरों में ही गैस भरी जा रही है.

ठंड की परिस्थितियों में जब तापमान शून्य से काफ़ी नीचे गिर जाता है, तो कश्मीर में न केवल गैस की कमी हो जाती है, बल्कि महंगाई भी बढ़ जाती है.

श्रीनगर के फ़तेह कादेल इलाक़े के अब्दुल क़यूम शाह ने कहा, “मैं ब्लैक में एक सिलेंडर 700 रुपए में ख़रीदता हूं.”

अब्दुल क़यूम के इस बयान से पता चलता है कि श्रीनगर में गैस की समस्या कितनी बड़ी है.

ऐसे में उमर अब्दुल्लाह सरकार की चौतरफ़ा आलोचना हो रही है. विपक्षी पार्टी पीडीपी का कहना है कि राज्य सरकार जम्मू और कश्मीर के बीच भेदभाव कर रही है.

लेकिन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने इन आरोपों का खंडन करते हुए अपने विधायकों को कश्मीर में तैनात रहने के आदेश दिए हैं. आमतौर पर ठंड के महीनों में सरकारी कर्मचारी जम्मू की ओर चले जाते हैं.

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