बारूदी सुरंगों में मारे जा रहे हैं भारतीय सैनिक

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Image caption भारत उन कुछ देशों में से है जिन्होंने बारूदी सुरंगों पर प्रतिबंध लगाने से मना किया है

एक अंतरराष्ट्रीय संगठन का कहना है कि बारुदी सुरंग से बड़ी संख्या में भारतीय सैनिकों की मौत हो रही है.

ये तब हो रहा है जब भारत की सीमाओं पर शांति है. संगठन के अनुसार ज़्यादातर भारतीय सैनिक बारूदी सुरंगों को हटाने के दौरान मारे जा रहे हैं.

बारूदी सुरंगों पर प्रतिबंध के लिए चलाई जा रही अंतरराष्ट्रीय मुहिम (आईसीबीएल) की ओर से कहा गया है कि अक्तूबर 2002 से अब तक 793 भारतीय सैनिक हताहत हुए हैं, जिनमें से 411 की मृत्यु हो गई.

ग़ौरतलब है कि भारत उन कुछ देशों में से है जिन्होंने बारूदी सुरंगों पर प्रतिबंध लगाने से मना किया है.

आईसीबीएल के एक वरिष्ठ अधिकारी येशुआ मोज़र पुआंगसुवान का कहना है कि उनकी संस्था ने भारतीय सेना से बार-बार कहा कि वो बारूदी सुरंगों को हटाने के दौरान अंतरराष्ट्रीय तरीकों का पालन नहीं कर रहे हैं.

येशुआ के अनुसार बारूदी सुरंगों से मारे जाने वाले भारतीय सैनिकों की तादाद अंगोला, मोज़ांबिक, बोस्निया और क्रोएशिया में हो रही मौतों से ज़्यादा है.

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ सालों में भारत से सैनिकों की मौतों की कई रिपोर्टें सामने आई हैं.

येशुआ ने कहा, “हमने बारूदी सुरंग से हताहत हुए 365 भारतीय सैनिकों के मामले इकट्ठा किए हैं. इनमें से ज़्यादातर सैनिक बारूदी सुरंगों को हटाने का काम कर रहे थे. इसका मतलब है कि ये सैनिक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और तरीक़ों का पालन नहीं कर रहे थे.”

येशुआ कंबोडिया और दूसरे देशों में बारूदी सुरंगों को हटाने को लेकर चल रहे आंदोलनों से जुड़े रहे हैं.

भारतीय सोच

उधर भारतीय सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) शंकर प्रसाद का कहना है कि भारत में बारूदी सुरंगों से मौतें होती ज़रूर हैं लेकिन इतनी नहीं जितनी चर्चा की जाती है.

बारूदी सुरंगों को लेकर सबसे बड़ी समस्या उनके खिसकने के कारण होती है.

आँधी, तूफ़ान, बारिश जैसे कारणों से सालों से दबी बारूदी सुरंगें एक जगह से खिसककर दूसरी जगह चली जाती हैं. भूस्सखलन के कारण भी कई बार ये बारूदी सुरंगे ज़मीन के ऊपर आ जाती हैं, जिनके कारण आम लोग या सैनिक मारे जाते हैं.

बारूदी सुरंगों के प्रयोग के बाद उनका रिकॉर्ड बरकरार रखना बहुत ज़रूरी होता है और भारतीय अधिकारियों कहते हैं कि भारत में उनका रिकॉर्ड रखा जाता है.

भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे इलाकों में बड़ी तादाद में बारूदी सुरंगों का प्रयोग किया जाता है. तो फिर समस्या का हल क्या है?

लेफ़्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) शंकर प्रसाद हालात के अनुसार जब तक दुनिया में परंपरागत युद्ध जारी रहेंगे, तब तक बारूदी सुरंगों का प्रयोग जारी रहेगा और उन्हें पूरे तौर पर ख़त्म नहीं किया जा सकता.

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