सेनाध्यक्ष की याचिका पर सरकार की अर्ज़ी

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Image caption इस पर भी अटकलें लग रही हैं कि क्या जनरल वीके सिंह के खिलाफ़ सरकार कोई कार्यवाही कर सकती है.

सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह का जन्मतिथि विवाद उच्चतम न्यायालय पहुँचा तो बहस छिड़ गई है कि क्या फौज की छवि को इससे झटका लगा है.

उधर सरकार ने उच्चतम न्यायालय में 'केवियट' (आपत्ति सूचना) की अर्जी दायर की है ताकि कोई भी फ़ैसला सुनाने से पहले अदालत सरकार का पक्ष भी सुने.

समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार मंगलवार को रक्षा मंत्री एके एंटनी इस मामले पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिले हालांकि यह पता नहीं चल पाया कि मुलाकात में क्या हुआ.

सेना के कई पूर्व अफ़सरों और वरिष्ठ वकीलों ने सेनाध्यक्ष के कदम को अफ़सोसनाक बताया है. एक अभूतपूर्व क़दम उठाते हुए जनरल वीके सिंह ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की है.

वो पहले सेनाध्यक्ष हैं जिन्होंने किसी भी मुद्दे पर अदालत में अपील की है. ये याचिका अभी अदालत में दाखिल नहीं हुई है.

पूर्व मेजर जनरल अशोक मेहता ने बीबीसी से बातचीत में कहा कि वो अगर जनरल वीके सिंह की जगह होते तो अदालत जाने से पहले इस्तीफा दे देते.

उन्होंने कहा, ''हमारे देश की सेना पूरे विश्व में सही कारणों के लिए प्रसिद्ध है. सेनाध्यक्ष का कदम दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है.''

ऐसा नहीं है कि जनरल वीके सिंह को उच्चतम न्यायालय जाने का अधिकार नहीं है. लेकिन पूर्व मेजर जनरल मेहता कहते हैं कि ऐसा करना सेनाध्यक्ष के पद पर बैठे अफ़सर के लिए 'अनैतिक' है.

उच्चतम न्यायालय के जाने-माने वकील केटीएस तुलसी का मानना है कि यह कदम एक सेनाध्यक्ष को शोभा नहीं देता.

उन्होंने कहा, ''भारत में सेना का बहुत आदर है. लेकिन सेना को नागरिक सरकार के अनुशासन के तहत काम करना पड़ता है.''

क्या होगा अदालत में

हालांकि केटीएस तुलसी का मानना है कि उच्चतम न्यायालय इस तरह के मामलों में आम तौर पर दख़ल नहीं देता.

उन्होंने कहा, ''इस तरह के मामलों को नौकरी के दो सालों में निपट जाना चाहिए. अगर याचिकाकर्ता सेवानिवृत्ति के करीब होता है तो अदालत इस तरह के मुक़दमों को कम ही सुनती है.''

ये पूछे जाने पर कि क्या ऐसे मामलों को उच्चतम न्यायालय 'आर्मड फोरसिस ट्राइब्यूनल' को भेज सकता है, तो उन्होंने कहा कि यह एक नौकरी से जुड़ा साधारण मामला है और इस तरह के मामले उच्चतम न्यायालय में अक्सर आते रहते हैं.

सरकार की रणनीति

ऐसी भी अटकलें लग रही हैं कि क्या जनरल वीके सिंह के खिलाफ़ सरकार कोई कार्यवाही कर सकती है. और क्या सरकार उनसे इस्तीफा माँगेगी?

पूर्व मेजर जनरल मेहता हैरान हैं कि सरकार इस मामले पर इतनी 'बैकफुट' पर क्यों है.

जनरल वीके सिंह ने कई बार सार्वजनिक रूप में ये बयान दिया था कि उनका इस मुद्दे पर रक्षा मंत्रालय के साथ कोई मतभेद नहीं है.

उनका यह कदम इसलिए भी हैरान करने वाला है.

उत्तराधिकारी

सेनाध्यक्ष की उम्र पर चल रहे विवाद का महत्व यह है कि इससे ये तय होगा कि जनरल वीके सिंह कब रिटायर होंगे और अगला सेनाध्यक्ष कौन होगा.

सर्विस रिकॉर्ड्स के मुताबिक़ जनरल वीके सिंह की जन्मतिथि 10 मई 1950 है, जिसके मुताबिक़ उन्हें इस साल मई में रिटायर होना है.

इसके बाद सबसे वरिष्ठ अधिकारी जनरल बिक्रम सिंह को सेनाध्यक्ष बनना है.

लेकिन अगर वह मई से पहले ही इस्तीफ़ा दे देते हैं या उनका कार्यकाल बढ़ता है तो इससे वरिष्ठता पर असर पडे़गा.

एक पूर्व सेना अधिकारी का कहना है कि जिस अधिकारी को भी इस मामले में नुकसान पहुँचेगा, वह भी अदालत जा सकता है.

जनरल वीके सिंह का कहना है उनकी सही जन्मतिथि 10 मई 1951 है जैसा कि उनके मैट्रिक प्रमाणपत्र में बताई गई है. लेकिन सेना में प्रवेश के लिए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के फ़ॉर्म में उनकी जन्मतिथि 10 मई 1950 है.

पिछले साल रक्षा मंत्रालय ने उनकी जन्मतिथि 10 मई 1950 मानी थी और इस तरह जनरल वीके सिंह को इस साल मई में रिटायर होना है.

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