घट नहीं रहा असुरक्षित गर्भपात: डब्लयूएचओ

गर्भपात इमेज कॉपीरइट bbc
Image caption भारत में गर्भपात की स्थिति को लेकर चिंता जताई गई है

विश्व स्वास्थ्य संगठन यानि डब्लयूएचओ का कहना है कि वैश्विक स्तर पर गर्भपात के आंकड़े हर साल प्रति 1000 पर 28 पर स्थिर है लेकिन चिंता इस बात को लेकर उठाई गई है कि गैरप्रशिक्षित लोगों की मदद से हो रहे गर्भपात की दर में बढ़ोतरी हुई है.

डब्लयूएचओ के अनुसार साल 1995 में गैर प्रशिक्षित लोगों की मदद से हो रहे गर्भपात 44 फ़ीसदी थे, वहीं साल 2008 में ये संख्या बढ़कर 49 फ़ीसदी हो गई.

विज्ञान पत्रिका लेंसट ने इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है और इन आंकडों को बेहद चिंताजनक बताया है.

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया भर में गर्भवती महिलाओं की मौत का एक बड़ा कारण असुरक्षित गर्भपात है और इसकी वजह अस्पताल, क्लीनिकों के बाहर या फिर किसी चिकित्सक के निर्देशन में गर्भपात न होना शामिल है.

विकासशील देशों में मुख्यत: जहाँ गर्भपात को लेकर कड़े क़ानून है वहां भी असुरक्षित गर्भपात होते हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक अफ्रीका में 97 फ़ीसदी असुरक्षित गर्भपात होते है.

भारत में स्थिति चिंताजनक

विकसित देशों में गर्भपात के आंकडे में कमी आई है. जहां साल 1995 में ये 36 फ़ीसदी था तो वहीं साल 2008 में ये घटकर 26 फ़ीसदी हो गया है.

भारत में असुरक्षित गर्भपात की स्थिति और भी चिंताजनक है.

रिपोर्ट के अनुसार भारत में साल 2008 में 65 लाख गर्भपात हुए जिसमें से 66 फ़ीसदी या दो तिहाई असुरक्षित थे.

दक्षिण और मध्य एशिया में एक करोड़ पाँच लाख गर्भपात किए गए वहीं केवल भारत में ही 65 लाख गर्भपात हुए.

इस रिपोर्ट की प्रमुख लेखक गिल्दा सैग का कहना है, ''साल 1995 से 2003 के बीच प्रति हज़ार महिलाओ के गर्भपात के स्तर में 35 फ़ीसदी से 29 फ़ीसदी हुई है और ये दर स्थिर रही है और साल 2008 तक प्रति हज़ार के मुक़ाबले 28 गर्भपात की घटनाएं हुई है.''

सैग के अनुसार दक्षिण और मध्य एशिया में 13 फ़ीसदी गर्भवती महिलाओं की मौत असुरक्षित गर्भपात के कारण होती है.

जाने-माने गायनेकॉलॉजिस्ट और कन्याभ्रूण हत्या के ख़िलाफ़ मुहिम छेड़ने वाले डॉक्टर पुनीत बेदी कहते हैं कि भारत में असुरक्षित गर्भपात हमेशा से ही होते रहे हैं.

उनके मुताबिक,''ज़्यादातर लोग दाइयों के पास या ऐसे डॉक्टर के पास जाते है जो प्रशिक्षित नहीं होते है. अभी भी स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं किया गया है.''

डॉक्टर इस रिपोर्ट के आंकड़ों पर तो सवाल उठाते ही हैं साथ ही उनका कहना है,'' भारत में गर्भपात अवैध है लेकिन साल 1971 में मेडिकल टर्मिनेशन प्रीगनेंसी क़ानून बनाया गया जिसके तहत स्वास्थ्य कारणों या गर्भनिरोधक उपायों के असफल होने के कारण एक दंपति गर्भपात करवा सकता है. इस क़ानून की एक धारा का इस्तेमाल कर इसे वैध बताया जा रहा है.''

कन्याभ्रूण हत्या के कारण

डॉक्टर पुनीत बेदी गर्भपात का एक मुख्य कारण कन्याभ्रूण हत्या को भी बताते है.

उनका कहना है, ''क्योंकि भ्रूण के बारे में चौथे महीने में ही पता चल पाता है और इस प्रक्रिया में ही परिवारवाले अपना पैसा ख़र्च कर देते है. जब पता चलता है तो छिपाकर गर्भपात करवाया जाता है. ऐसे में परिवार वाले किसी भी क्लीनिक में चले जाते हैं जिससे असुरक्षित गर्भपात भी होता है और कई माताओं की मौत भी हो जाती है.''

डॉक्टर पुनीत का कहना है कि भारत में ऐसे कितने ही क्लिनिक मौजूद हैं जो गर्भपात कराते हैं और इस बारे में कोई रिकॉर्ड भी नहीं रखते हैं. ऐसे में कोई आंकडा नहीं है जिससे ये पता चल सके कि कितने गर्भपात हो रहे है.

ये आंकड़े साल 1995 से 2008 के बीच के हैं. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि साल 2008 के बाद स्थिति कितनी बदली होगी ये कहना मुशिकल है क्योंकि अभी तक स्वास्थ्य सेवाओं में जो सुधार लाया जाना चाहिए था वो नहीं किया गया है.