शिक्षक के खाते में करोड़ों रुपए

पारिजात साहा
Image caption पारिजात साहा 35 हज़ार रुपए प्रतिमाह तनख़्वाह पाते हैं

पश्चिम बंगाल के उत्तरी शहर बालूरघाट के शिक्षक पारिजात साहा को नक़द पैसों की ज़रूरत पड़ी तो उन्होंने अपने रिकरिंग डिपॉजिट को तोड़ने का फ़ैसला किया.

पिछले दस महीनों से एक हज़ार रुपया महीने में वो जमा कर रहे थे.

वो राशि जमा हुई या नहीं, यही जानने के लिए साहा ने स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया की इंटरनेट बैंकिंग वेबसाइट को रविवार शाम को लॉग इन किया. और तभी ज़िंदगी का सबसे बड़ा झटका लगा उनको.

वे कहते हैं, "दस महीने में दस हज़ार से कुछ ज़्यादा जमा किए थे मैंने. जब ज़रूरत पड़ी तो जमा राशि को बचत खाते में डालने के लिए बैंक की वेबसाइट पर गया. अचानक दस हज़ार के बदले मुझे अपने खाते में 49,570 करोड़ रुपये जमा मिले."

महीने में पैंतीस हज़ार तनख़्वाह मिलने वाला कोई अगर अचानक करोड़पति बन जाता है तो ये ज़बर्दस्त झटका तो लगेगा ही.

पारिजात साहा से जब ये पूछा गया कि ज़ोर का झटका लगने के बाद कैसा महसूस कर रहे थे वो तो उनका कहना था, "इतनी बड़ी रक़म जमा होते देखकर तो कोई भी चौंक जाएगा. मैं तो कुल राशि को गिन भी नहीं पा रहा था. पता चल ही रहा था कि कहीं कोई गड़बड़ हुआ है. स्टेट बैंक में काम करने वाले एक मित्र को फ़ोन करके पूछा कि क्या उनके बैंक का पैसा ज़्यादा हो गया है."

पारिजात साहा करोड़पति तो बन गए थे, पर उस राशि को न तो वो छू सकते थे, न ही निकाल सकते थे. क्योंकि वो 'अनक्लियर्ड' राशि के हिसाब से दिखाया गया था.

पारिजात साहा को चैन तब मिला जब उनका अपना दस हज़ार उनके खाते में वापस आ गया और आज शाम को उनचास हज़ार करोड़ रुपये बैंक ने वापस ले लिए.

स्टेट बैंक की बालूरघाट शाखा के मैनेजर ने बीबीसी से कहा कि उन्हें इस विषय पर बात करने के लिए स्पष्ट रूप से मना किया गया है.

लेकिन बैंक के सूत्रों के अनुसार इस घटना की सूचना मिलते ही जांच शुरू हो गई है.

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