सलमान रुश्दी नहीं आ रहे हैं जयपुर

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Image caption सलमान रुश्दी इससे पहले कई बार भारत आ चुके हैं लेकिन इस बार विवाद कुछ ज़्यादा बढ़ गया

एशिया-प्रशांत क्षेत्र का सबसे बड़ा साहित्यिक आयोजन माना जाने वाला जयपुर साहित्य महोत्सव शुक्रवार यानी 20 जनवरी से शुरू हो रहा है.

ये इस साहित्य महोत्सव का पांचवां संस्करण है.

दुनियाभर के 250 से ज़्यादा साहित्यकार इस बार इस साहित्य सम्मेलन में हिस्सा लेने जा रहे हैं.

साहित्य महोत्सव से पहले भारतीय मूल के अंग्रेजी लेखक सलमान रुश्दी के इस सम्मेलन में आने को लेकर जो विवाद था वो गुरुवार को भी बना हुआ था, लेकिन आयोजकों ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर ये साफ़ कर दिया है कि 20 जनवरी के उद्घाटन समारोह में सलमान रुश्दी नहीं आ रहे हैं और उनकी बातों से ये भी लगा कि आगे भी उनके आने की संभावना न के बराबर है.

सलमान रुश्दी के भारत आने का दारुल उलूम सहित कई मुस्लिम संगठनों ने विरोध किया है.

उनका कहना है कि सैटेनिक वर्सेस लिखने वाले लेखक को भारत नहीं आना चाहिए.

इसके बाद राजस्थान सरकार ने भी कह दिया था कि यदि सलमान रुश्दी जयपुर साहित्य महोत्सव में आए तो उनकी सुरक्षा को लेकर समस्या हो सकती है.

हालांकि लेखक और बुद्धिजीवी वर्ग ने सलमान रुश्दी के विरोध पर नाराज़गी ज़ाहिर की है.

'सवाल न किए जाएँ'

मीडिया के लोग कयास लगाए बैठे थे, अटकलों का बाज़ार गर्म था लेकिन विलियम डैलरिंपल और नमिता गोखले जो कि इस महोत्सव के मुख्य सह आयोजक हैं, उनकी मौजूदगी में आयोजक संजॉय रॉय ने कहा कि सलमान रुश्दी को भेजा गया निमंत्रण अभी भी बरकरार है लेकिन 20 तारीख़ को वो नहीं आ रहे हैं.

उन्होंने कहा, ‘‘सलमान ऱूश्दी के कार्यक्रम या आगमन को लेकर अभी भी निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता है. अगले कुछ दिनों में वो जयपुर नहीं आनेवाले हैं. हालांकि साहित्य महोत्सव उन्हें दिए गए निमंत्रण पर अभी भी क़ायम है. इसके अलावा हम और कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं हैं. हमसे इस बारे में और सवाल न किए जाएं.’’

उनका कहना था, "इस साहित्य सम्मेलन में 250 से ज़्यादा देशी विदेशी साहित्यकार हिस्सा लेने वाले हैं जो अपने-अपने क्षेत्र के बड़े नाम हैं, हमें सलमान रुश्दी के शामिल होने या न होने तक ही इस साहित्य सम्मेलन को सीमित नहीं रखना चाहिए क्योंकि इस आयोजन की उनके बिना भी एक पहचान है."

विवाद

ग़ौरतलब है कि मुस्लिम शिक्षण संस्थान दारूल उलूम देवबंद के कुलपति मौलाना अब्दुल क़ासिम नोमानी ने भारत सरकार से मांग की थी कि सलमान रुश्दी जब तक अपनी किताब ‘सैटनिक वर्सेज़’ में लिखी ईशनिंदा संबंधी बातों के लिए माफ़ी नहीं मांग लेते, उन्हें भारत न आने दिया जाए.

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Image caption साहित्य महोत्सव में दुनिया भर से साहित्यकार जमा हो रहे हैं

मौलाना नोमानी के बयान के बाद इस मामले पर ख़ासा बवाल मचा था और जयपुर समेत भारत के कई शहरों में मुस्लिम संगठनों ने प्रदर्शन भी किया था और कहा था कि अगर सलमान रुश्दी को आने की इजाज़त दी गई तो उनका सड़कों पर उतर कर विरोध किया जाएगा.

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मामले को लेकर सुरक्षा संबंधी चिंता जताई थी.

लेकिन भारत सरकार का कहना था कि वो सलमान रुश्दी को भारत आने से रोक नहीं सकती.

ये बात अलग है कि सलमान रुश्दी 2007 के जयपुर साहित्य महोत्सव में शिरकत कर चुके हैं और उस समय उनको लेकर कोई विवाद नहीं हुआ था.

इसके अलावा कई अन्य मौक़ों पर भी सलमान रुश्दी भारत या चुके हैं.

कई अहम कार्यक्रम

सलमान रुश्दी संबंधी स्पष्टीकरण देने के बाद आज के प्रेस कॉन्फ्रेंस में लेखिका नमिता गोखले और विलियम डैलरिंपल ने आनेवाले पांच दिनों में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी.

उन्होंने बताया कि इस बार के महोत्सव में मध्यकालीन भारतीय भक्ति साहित्य को नए नज़रिए से देखने की कोशिश की जा रही है. कबीर, दादू, मीरा की कविताएं जो कि आज भी हमारे लोक मानस का हिस्सा हैं उन्हें वर्तमान परिप्रेक्ष्य में देखने की कोशिश की जा रही है.

आयोजकों ने बताया कि इसके साथ ही भारत की क्षेत्रीय भाषाओं को भी इस बार काफ़ी महत्व दिया जा रहा है. कई क्षेत्रीय भाषाओं के साहित्यकार इस बार यहां हिस्सा ले रहे हैं. साथ ही सामाजिक मुद्दों को भी ख़ासा महत्व दिया जा रहा है.

उन्होंने जानकारी दी कि कई लोगों की जेल डायरियों पर एक पूरा सत्र केंद्रित है जिसमें इफ्तिखार गिलानी, अंजुम ज़मरूद हबीब, साहिल मक़बूल जैसे लोग अपनी जेल डायरियों के बारे में बताएंगे.

देशी विदेशी संगीत को भी इस बार खा़सी अहमियत दी गई है.

इसके अलावा जावेद अख़्तर, गुलज़ार, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त टीवी शख्सियत ओपरा विनफ्री भी इस बा़र समारोह में नज़र आएंगीं.

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