अब 'सैटेनिक वर्सेज़' के अंश पढ़ने पर विवाद

 शनिवार, 21 जनवरी, 2012 को 02:03 IST तक के समाचार
सलमान रूश्दी

किताब के अंश पढ़े जाने के बाद आयोजकों ने इसे लेखकों का अपना निर्णय बताया है

जयपुर साहित्य महोत्सव और सलमान रूश्दी का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है.

सलमान रूश्दी ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर कहा कि उनकी जान को ख़तरा है इसलिए वो जयपुर नहीं आएंगे, लेकिन साहित्य सम्मेलन में शिरकत कर रहे दो लेखकों ने समारोह के सत्र के बीच सलमान रूश्दी की प्रतिबंधित किताब 'सैटनिक वर्सेज़' के कुछ अंश पढ़कर एक नया विवाद पैदा कर दिया.

शाम सवा पांच बजे से सवा छह बजे तक दिग्गी पैलेस के दरबार हॉल में चल रहे ''ऑफ़ गॉड्स एंड मैन'' नामक सत्र में लेखक हरि कुंजरू और अमिताभ कुमार ने सैटनिक वर्सेज़ के कुछ अंश पढ़कर सुनाए.

हरि कुंज़रू ने कहा कि सलमान रूश्दी कुछ लोगों के विरोध की वजह से जयपुर साहित्य समारोह में नहीं आ पा रहे हैं, ये साहित्य के लिए अच्छी बात नहीं और वो इस पूरे प्रसंग का विरोध करते हैं, इसीलिए सैटनिक वर्सेज़ के कुछ अंश पढ़कर वो अपना विरोध जताना चाहते हैं.

बवाल

हालांकि सैटनिक वर्सेज़ का अंश पढ़े जाने के बाद ही इस मामले को लेकर बवाल पैदा हो गया.

तमाम मीडिया चैनलों में ख़बर दिखाए जाने के बाद आयोजकों ने मीडिया संस्थानों को एक ईमेल लिख कर स्पष्टीकरण दिया कि हरि कुंज़रू और अमिताभ कुमार ने जो कुछ भी किया उसमें समारोह के आयोजकों की कोई सहमति नहीं है और इस पूरे कृत्य के लिए दोनों लेखक स्वयं ज़िम्मेदार हैं.

मामले के तूल पकड़ने पर दिल्ली में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा है, ''प्रतिबंधित किताब सैटनिक वर्सेज़ के अंश पढ़कर या तो लेखक सस्ती लोकप्रियता बटोरना चाह रहे थे या फिर बिना वजह एक विवाद खड़ा करना चाह रहे थे. क़ानून को इसपर अपना काम करना चाहिए.''

उल्लेखनीय है कि सलमान रूश्दी की किताब 'सैटेनिक वर्सेज़' पर भारत में प्रतिबंध है.

मुस्लिम संगठनों का कहना है कि इसमें इस्लाम की भावना को ठेस पहुँचाने वाली बातें लिखी गई हैं.

रुश्दी के जयपुर साहित्य सम्मेलन में आने का विरोध करने के पीछे भी दारुल उलूम और अन्य मुस्लिम संगठनों का तर्क यही था कि 'सैटेनिक वर्सेज़' लिखने के लिए माफ़ी मांगे बिना रुश्दी को भारत नहीं आने देना चाहिए.

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