टीम अन्ना पर जूता फेंका गया

 शनिवार, 21 जनवरी, 2012 को 21:33 IST तक के समाचार
जूता फेंकने वाला उत्तराखण्ड

जूते फेंकने से पहले युवक ने भ्रष्टाचार मुर्दाबाद के नारे लगाए.

पुलिस ने देहरादून में एक युवक को गिरफ़्तार किया है जिसने उत्तराखण्ड में हो रहे विधानसभा चुनावों के दौरान 'जन-जागरण अभियान' चला रही टीम अन्ना पर एक सभा के दौरान जूता फेंका.

कई लोग इस अभियान को परोक्ष रूप से किया जा रहा चुनाव प्रचार बता रहे हैं.

शहर के पास स्थित प्रेमनगर के निवासी किशनलाल नाम के इस युवक ने टीम अन्ना के सदस्यों पर निशाना साधने से पहले 'भ्रष्टाचार मुर्दाबाद' के नारे लगाए और फिर निशाना साधकर जूता फेंक दिया.

पुलिस ने नौजवान को फ़ौरन गिरफ़्तार कर लिया. अभी तक ये स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उसका संबंध किसी राजनैतिक दल से है या नहीं.

पुलिस का कहना है कि हाव-भाव से लग रहा था कि वो आपे में नहीं था.

अभियान

टीम अन्ना, इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बैनर तले राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों में प्रेदश में कथित रूप से फैले भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन-जागरूकता अभियान चला रही है.

शक़ के दायरे में

"उत्तराखण्ड के कमजोर लोकायुक्त बिल पर जिस तरह से टीम अन्ना ने मुहर लगाई है उससे शक़ पैदा होता है क्योंकि वो केंद्र में कुछ और मांग करते हैं और यहां चुप्पी साध लेते हैं."

पी सी थपलियाल, प्रवक्ता, उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा

जन-जागरूकता अभियान के तहत टीम अन्ना के अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया, किरन बेदी और कुमार विस्वास जगह जगह सभाएं कर रहे हैं.

हांलाकि प्रत्यक्ष तौर पर ये किसी भी तरह सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के पक्ष में प्रचार नहीं नज़र आता लेकिन टीम अन्ना और भूवन सिंह खंडूरी सरकार के संबंधों के बारे में कई बार मीडिया में लिखा जा चुका है.

मुख्यमंत्री बनने के बाद टीम अन्ना की सलाह से ही मुख्यमंत्री खंडूरी ने आनन फ़ानन में लोकपाल विधेयक बनाया था.

प्रशंसा

अपने जारी दौरों में टीम अन्ना खंडूरी सरकार की भूरी-भूरी प्रशंसा करती रही है.

इस बाबत खंडूरी को आशीर्वाद देते हुए अन्ना हज़ारे के बड़े-बड़े पोस्टर पूरे राज्य में लगाए गए थे. विपक्षी दल कांग्रेस, प्रमुख क्षेत्रीय दल उत्तराखण्ड क्रांति दल, उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा और कई नागरिक संगठन टीम अन्ना को इस बात के लिए कटघरे में खड़ा करते रहे हैं कि आख़िर वो उत्तराखण्ड की बीजेपी सरकार के कथित घोटालों और भ्रष्टाचार पर सवाल क्यों नहीं उठाती.

इसे लेकर यहां के कई संगठनों ने अन्ना हज़ारे को पत्र लिखकर अपील भी की थी.

विश्वसनीयता

इस लिहाज़ से कई लोग टीम अन्ना की विश्वसनीयता पर सवाल भी खड़े करते हैं. वो अपने भाषणों में बीजेपी सरकार के कथित भ्रष्टाचार के मामले पर कुछ नहीं बोलते हैं. हालांकि टीम अन्ना का उत्तराखण्ड का दौरा भी विवादों में घिरा रहा है.

पहले वो हरिद्वार में रैली करना चाह रहे थे लेकिन प्रशासन ने इसकी इजाज़त नहीं दी फिर उन्होंने वहां मीटिंग की.

देहरादून में शनिवार की जूता फेंके जाने की घटना के पहले हरिद्वार में भी आज हुई उनकी सभा के दौरान विरोधी नारे लगे थे.

दोषी

गै़र सरकारी संस्था रूलक के अध्यक्ष अवधेश कौशल कहते हैं, "टीम अन्ना पर अगर जूता फेंका गया है तो इसके लिए वो शायद खुद ही दोषी हैं. अगर देखें तो इस राज्य में तो उनके मुताबिक़ लोकपाल क़ानून आ ही गया है फिर वो यहां क्या करने आए हैं."

दूसरी ओर उत्तराखण्ड रक्षा मोर्चा के प्रवक्ता पीसी थपलियाल ने कहा कि उत्तराखण्ड के कमज़ोर लोकायुक्त बिल पर जिस तरह से टीम अन्ना ने मुहर लगाई है उससे शक़ पैदा होता है क्योंकि वो केंद्र में कुछ और मांग करते हैं और यहां चुप्पी साध लेते हैं.

थपलियाल का कहना है कि अगर उन्होंने टीम अन्ना ने अपना रूख साफ़ नहीं किया तो कल हलद्वानी में भी उन्हें काले झंडे दिखाए जा सकते हैं.

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