विस्फोट के बाद लापता लोगों का सुराग नहीं

झारखंड के गढ़वा ज़िले के भंडरिया में शनिवार को हुए बारूदी सुरंग के विस्फोट के बाद ज़िला परिषद् की अध्यक्ष सहित चार लापता लोगों का अभी तक कोई सुराग पुलिस के हाथ नहीं लगा है.

आशंका व्यक्त की जा रही थी मगर अब इस बात की पुष्टि हो चुकी है कि घटना को अंजाम देने के बाद माओवादी छापामार ज़िला परिषद् की अध्यक्ष सुषमा मेहता, उनके अंगरक्षक और दो सहयोगियों को अपने साथ ले गए हैं.

माओवादी छापामारों नें शिवार की दोपहर बारूदी सुरंग का तब विस्फोट किया जब मेहता का काफ़िला बरगढ़ के इलाके से गुज़़र रहा था.

भंडरिया में एक चिकित्सा केंद्र खोलने को लेकर कुछ विवाद चल रहा था. इस विवाद के दौरान पुलिस ने वहां के मुखिया राम दास मिंज को गिरफ्तार किया था.

विरोध

गिरफ्तारी के विरोध में स्थानीय लोगों के सड़क को जाम कर दिया था. इसी को लेकर लोगों से बात करने मेहता और वहां के प्रखंड विकास अधिकारी वहां जा रहे थे.

मगर बरगढ़ से तीन किलोमीटर पहले हे मेहता और प्रखंड विकास अधिकारी के वाहन पुलिया पर से गुज़र गए. उनके पीछे चल रहे पुलिस का एक बारूदी सुरंग निरोधक विस्फोट की चपेट में आ गया. इस वाहन में 15 पुलिसकर्मी सवार थे.

विस्फोट इतना ज़ोरदार था कि इसकी आवाज़ कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई. घटना में भंडरिया थाने के प्रभारी रामबली चौधरी सहित 13 पुलिस कर्मी मारे गए.

पुलिस का कहना है कि विस्फोट के बाद माओवादियों नें जमकर गोलीबारी की. बरगढ़ का यह इलाका झारखण्ड छत्तीसगढ़ की सीमा से महज़ पांच किलोमीटर की दूरी पर है. प्रत्यक्ष दर्शियों नें बताया कि विस्फोट के बाद माओवादियों नें पुलिस के वाहन में आग भी लगा दी.

यह सबकुछ यहीं ख़त्म नहीं हुआ, कुछ घायल जवानों नें जब बचकर भागने की कोशिश की तो माओवादियों नें उन्हें जलती हुई गाड़ी में फ़ेंक दिया. ऐसे जवानों की संख्या चार बताई जाती है.

मगर माओवादियों ने दो घायल जवानों का खुद उपचार भी किया है ऐसी सूचना मिल रही है.

जबकि प्रखंड विकास अधिकारी वहां से बच निकलने में सफल रहे, मेहता और उनकी गाड़ी में सवार लोगों को माओवादी जबरन अपने साथ ले गए. मेहता के सहयोगी और जिला परिषद् के पार्षद संजय तिवारी नें बीबीसी से बात करते हुए कहा कि इस बात की पुष्टि हो गयी है कि सुषमा मेहता को माओवादी अपने साथ ले गए हैं.

तिवाटी कहते हैं :"हमलोग घटना स्थल पर शाम 6 बजे पहुंचे. उनकी गाड़ी वहीँ खड़ी थी. कुछ प्रत्यक्षदर्शियों नें बताया कि माओवादियों नें सुषमा मेहता के अंगरक्षक के हाथ बंद दिए थे और उसकी पिस्तौल भी चीन ली थी. उस प्रत्यक्षदर्शी नें हमें बताया कि सभी को माओवादी छत्तीसगढ़ से लगे सालो के जंगल की तरफ पैदल ही ले गए."

बंद का आह्वान

सुषमा मेहता भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की नेता हैं. उनके साथ उन्ही के संगठन की ज़िला कमिटी के सदस्य अख्तर अंसारी भी माओवादियों के कब्ज़े में है. तिवारी का कहना है कि अभी तक माओवादियों ने मेहता या अंसारी या फिर उनके संगठन से कोई संपर्क नहीं साधा है.

इससे पहले झारखंड पुलिस के महानिरीक्षक राज कुमार मालिक नें बीबीसी से बात करते हुए कहा था कि हो सकता है कि घटना के बाद मेहता और उनके सहयोगियों नें कहीं गाँव में शरण ली हो.

उन्होंने भी माओवादियों द्वारा उनके अपहरण की आशंका जताई थी. बहरहाल घटना के विरोध में मेहता के संगठन नें मंगलवार को गढ़वा जिले के बंद का आव्हान किया है.