रुश्दी की वीडियो कांफ्रेंसिंग पर सवाल

 मंगलवार, 24 जनवरी, 2012 को 08:06 IST तक के समाचार

रुश्दी की पुस्तक द सैटेनिक वर्सेस पर 1988 में भारत में प्रतिबंध लगाया गया था

जयपुर साहित्य महोत्सव में सलमान रुश्दी को लेकर जारी विवाद थमने का नाम ही नहीं ले रहा है.

अब महोत्सव के आखिरी दिन रुश्दी के वीडियो लिंक को लेकर बवाल खड़ा हो गया है और राज्य सरकार का कहना है कि रुश्दी प्रतिबंधित पुस्तक के लेखक हैं और ये देखना होगा कि वीडियो लिंक पर वो क्या कहते हैं.

अभी ये साफ़ नहीं है कि वीडियो कांफ्रेंसिंग को लेकर नियम क्या हैं क्योंकि सलमान रुश्दी पर भारत में कोई प्रतिबंध नहीं है सिर्फ उनकी पुस्तक द सैटेनिक वर्सेस की खरीद बिक्री पर प्रतिबंध है.

रुश्दी मंगलवार की शाम 3.45 पर वीडियो कांफ्रेंसिंग के ज़रिए अपनी एक अन्य पुस्तक मिडनाइट्स चिल्ड्रेन के बारे में लोगों से बात करने वाले थे.

इस बीच रुश्दी के भारत आने का विरोध कर रहे मंचों ने विरोध को और आगे बढ़ाते हुए राजस्थान में उन चार लेखकों के ख़िलाफ़ मामले दायर किए हैं जिन्होंने रुश्दी की भारत में प्रतिबंधित पुस्तक द सैटेनिक वर्सेस के अंश जयपुर महोत्सव में पढ़े थे.

मुस्लिम गुटों ने जयपुर महोत्सव के आयोजकों के ख़िलाफ़ भी शिकायत की है.

इससे पहले रुश्दी के आने का विरोध दारुल उलूम देवबंद ने किया था जिसके बाद कथित रुप से रुश्दी की जान को खतरा बताया गया था.

इस संबंध में आगे चलकर रुश्दी ने राजस्थान पुलिस को आड़े हाथों लिया और कहा कि वो पुलिस ने झूठ कहा था.

जयपुर महोत्सव में सलमान रुश्दी आ तो नहीं सके लेकिन पूरे महोत्सव पर रुश्दी की छाया रही.

भारतीय जनता पार्टी ने कहा है कि सरकार की इस पूरे मामले में नीति अत्यंत ग़लत रही है और तुष्टिकरण की रही है. कांग्रेस ने इन आरोपों का खंडन किया है.

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 2007 में रुश्दी इस समारोह में शिरकत कर चुके हैं और तब उनके आने को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ था.

रुश्दी भारतीय मूल के लेखक हैं जो ब्रिटेन में रहते हैं और उन्हें पीआईओ कार्ड मिला हुआ है जिसका अर्थ है कि उन्हें भारत आने के लिए वीज़ा की ज़रुरत नहीं पड़ती है.

विशेषज्ञों का कहना है कि रुश्दी को लेकर सरकार का टालमटोल और उसके बाद खतरा बताने का रवैया एक ढुलमुल नीति का परिणाम है जो पाँच राज्यों में हो रहे चुनावों में मुसलिम वोटों को देखते हुए बनाई गई है.

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