गढ़वा ज़िला परिषद अध्यक्ष रिहा

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Image caption माओवादियों ने अंगरक्षक की रिहाई के लिए कई शर्तें रखी हैं

माओवादियों नें दावा किया है कि उन्होंने गढ़वा ज़िला परिषद की अध्यक्ष सुषमा मेहता और उनके दो सहयोगियों को रिहा कर दिया है. लेकिन उन्होंने मेहता के सरकारी अंगरक्षक को 'युद्ध बंदी' बनाकर अपने पास ही रख रखा है.

माओवादियों के कोयल शंख कमेटी के प्रवक्ता सुधीर का कहना है कि मेहता के अंगरक्षक उमेश राम को भी वह कोई नुकसान नहीं पहुंचाएंगे.

माओवादियों का कहना है कि उन्होंने मेहता और उनके सहयोगियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया है. मगर सूचना मिल रही है कि अभी तक मेहता और उनके सहयोगियों की वापसी नहीं हुई है.

इससे पहले संगठन ने बीबीसी को फ़ोन पर बताया कि शनिवार को झारखंड के गढ़वा ज़िले में बारूदी सुरंग के विस्फोट के बाद चार लापता लोगों में से उन्होंने पुलिस के जवान को 'युद्ध बंदी' बनाया है.

उनका कहना था कि उन्होंने ज़िला परिषद की अध्यक्ष और उनके दो अन्य सहयोगियों का अपहरण नहीं किया है.

संगठन का कहना था कि ज़िला परिषद की अध्यक्ष सुषमा मेहता, उनके संगठन के सहयोगी अख्तर अंसार और चालक को वह 'सुरक्षा कारणों' से अपने साथ ले गए थे.

शर्तें

माओवादियों ने यह भी भरोसा दिलाया था कि सभी चार लोग उनके पास सुरक्षित हैं और वह उनमे से तीन लोगों को जल्द 'सुरक्षित स्थान' तक पहुंचा देंगे. बीबीसी से संपर्क कर संगठन की कोएल शंख क्षेत्रीय कमेटी के प्रवक्ता, जिन्होंने अपना नाम सुधीर बताया, कहा कि उन्होंने सुषमा मेहता के अंगरक्षक की रिहाई के लिए कुछ शर्तें झारखण्ड सरकार के सामने रखीं हैं.

इन शर्तों में लातेहार जिले के सरयू, ओद्या और कोण में स्थापित किये कए सुरक्षा बलों को कैंपों को हटाने और ऑपरेशन 'ग्रीन हंट' बंद करने की मांग प्रमुख है.

संगठन के प्रवक्ता का कहना है कि पकड़े गए पुलिस जवान को उन्होंने 'युद्ध बंदी' का दर्जा दिया है जिसके तहत उनको सारी सुविधाएं संगठन उपलब्ध करा रहा है जैसे कि चिकित्सा, भोजन आदि.

इस मामले पर झारखण्ड की पुलिस की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है.

हलाकि सुधीर का मानना है कि सुषमा मेहता सहित चारों लोग जो उनके पास हैं, उनमें से उनका संगठन कोई भी अपना 'वर्ग शत्रु' नहीं मानता.

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