रुश्दी की वीडियो वार्ता भी रद्द

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Image caption रुश्दी की पुस्तक द सैटेनिक वर्सेस पर 1988 में भारत में प्रतिबंध लगाया गया था

जाने माने लेखक और साहित्यकार सलमान रुश्दी मंगलवार को वीडियो लिकं के ज़रिए भी जयपुर साहित्य सम्मलेन से नहीं जुड़ पाए.

जयपुर में सम्मलेन स्थल 'दिग्गी पैलेस' के मालिक राम प्रताप सिंह ने कहा कि पुलिस की सलाह पर उन्होंने रुश्दी की वीडियो वार्ता के आयोजन को रद्द करने का फैसला किया है.

सिंह का यह भी कहना था "कई रूश्दी विरोधी लोग इस आयोजन स्थल के भीतर भी आ गए हैं और बहुत सारे लोग आस पास एकत्र हो रहे हैं. इन लोगों ने हिंसा की धमकी भी दी है. इसलिए इस होटल की मेरे बच्चों की और यहाँ मौजूद सभी लोगों की सुरक्षा के लिए यह आयोजन रद्द करना ज़रूरी है."

'सारे रास्ते ख़त्म'

सम्मलेन के आयोजक संजोय रॉय ने कहा, " तीन सप्ताह की इस मूर्खतापूर्ण परिस्थिति के बाद हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की इस लड़ाई में, लिखने की लड़ाई में और अपनी कहानियाँ कह सकने की लड़ाई में पीछे हट रहे हैं."

रॉय ने कहा "यह ऐसा निर्णय नहीं है जिसका हम समर्थन करते हैं लेकिन हमारे लिए कोई विकल्प नहीं छोड़ा गया."

इसके पहले सम्मलेन के आयोजकों और मुस्लिम धार्मिक संगठनों के बीच चली लंबी बातचीत का कोई नतीजा नहीं निकला था.

दूसरी तरफ राज्य सभा में विपक्ष के नेता अरुण जेटली ने रुश्दी को बोलने से रोके जाने के प्रयासों और इसके बारे में सरकार के रुख़ की निंदा की है. जेटली ने कहा कि कट्टरपंथियों के सामने झुकना किसी भी सरकार के लिए ठीक नहीं है.

कई मुस्लिम संगठन रूश्दी के जयपुर साहित्य सम्मलेन को वीडियो लिंक के ज़रिये संबोधित करने के प्रयासों के भी ख़िलाफ़ थे.

मंगलवार को सुबह रुश्दी के वीडिओ लिंक के ज़रिये सम्मेलन को संबोधित करने की योजना का विरोध कर रहे कई मुस्लिम संगठनों के कार्यकर्ताओं ने जयपुर के दिग्गी पैलेस में जबरन घुसने की कोशिश की थी.

विवाद की जड़

दरअसल सारा विवाद जनवरी की नौ तारिख को शुरू हुआ था जब भारत के सबसे प्रसिद्ध मदरसों में से एक दारुल उलूम देवबंद के मोहतमिम या कुलपति मौलाना अब्दुल कासिम नौमानी ने सलमान रुश्दी के भारत आने पर कड़ी आपत्ति जताई थी.

मौलाना नौमानी ने कहा था कि अपनी किताब सैटेनिक वर्सेज़ में रुश्दी ने जिस तरह से मुसलमानों का दिल दुखाया है उसके बाद उनको भारत आने देना बहुत ही ग़लत बात होगी.

मौलाना अब्दुल क़ासिम नौमानी ने बीबीसी से बात करते हुए कहा था कि, "हमने अखबार में यह ख़बर पढ़ी कि 21 जनवरी को सलमान रश्दी को जयपुर में होने वाले लेखकों के सम्मलेन में बुलाया गया है तो हमने मीडिया माध्यम से प्रधानमंत्री और विदेशमंत्री से गुजारिश की है कि रुश्दी को भारत का वीज़ा ना दिया जाए."

रुश्दी की 1988 में एक किताब आई थी 'सैटेनिक वर्सेज़' यानी 'शैतान की आयतें'. यह किताब खासी विवादित साबित हुई.

इसी किताब की वजह से रुश्दी के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी हुआ और भारत सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया.

अब लेखकों का एक वर्ग इस प्रतिबंध को चुनौती देने की बात कर रहा है.

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