पूर्व इसरो अध्यक्ष पर लगी रोक

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Image caption जिस समय देवास और एंट्रिक्स के बीच ये समझौता हुआ था, तब माधवन नायर इसरो के अध्यक्ष थे

एंट्रिक्स और देवास के बीच साल 2005 में हुए क़रार से जुड़े विवाद में कड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने पूर्व इसरो अध्यक्ष जी माधवन नायर और तीन अन्य जाने-माने वैज्ञानिकों पर भविष्य में किसी भी प्रकार का सरकारी पद संभालने पर रोक लगा दी है.

पिछले साल विवादों के घेरे में आने के बाद देवास मल्टीमीडिया और इसरो की वाणिज्यिक शाखा एंट्रिक्स के बीच हुए समझौते को सरकार ने रद्द करने का फ़ैसला लिया था.

इस समझौते के तहत एंट्रिक्स ने 30 करोड़ डॉलर (यानी लगभग 1350 करोड़ रुपए) के बदले अपने दो सैटेलाइट्स के ट्रांसपोंडरों के 90 प्रतिशत अधिकार 12 वर्षों के लिए देवास को दे दिए थे.

इसरो की शाखा एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए समझौते में नियमों का उल्लंघन किया गया था और इस समझौते से सरकार को दो लाख करोड़ का घाटा होने की ख़बरें आई थीं.

मीडिया में आ रही ख़बरों के मुताबिक़ नायर के अलावा, इसरो के पूर्व वैज्ञानिक सचिव के. भास्करनारायण, एंटरिक्स के पूर्व प्रबंध निदेशक केआर श्री धर्ममूर्ति और इसरो अंतरिक्ष केंद्र के पूर्व निदेशक केएन शंकर को अंतरिक्ष विभाग ने इस मामले में दंडित किया है.

देवास और एंट्रिक्स के बीच हुए समझौते की जांच कर रही एक उच्च-स्तरीय समिति की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने ये फ़ैसला लिया है.

पिछले साल 31 मई के दिन प्रधानमंत्री ने पूर्व केंद्रिय सतर्कता कमिश्नर प्रत्युश सिन्हा की अगुवाई में एक पांच-सदस्सीय टीम का गठन किया था जिसने एंट्रिक्स और देवास के बीच हुए समझौते की बारीकियों की पड़ताल की थी.

जिस समय देवास और एंट्रिक्स के बीच ये समझौता हुआ था, तब माधवन नायर इसरो के अध्यक्ष थे.

चाँद पर भारत के पहला मानवरहित अभियान, चंद्रयान-1 की सफलता के पीछे माधवन नायर का ही योगदान काफ़ी चर्चा में हा था.

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