रुश्दी 'औसत दर्जे के लेखक' हैं-काटजू

 गुरुवार, 26 जनवरी, 2012 को 02:30 IST तक के समाचार

जयपुर साहित्य समारोह में विवादास्पद लेखक सलमान रुश्दी का वीडियो संबोधन भी न हो पाने के एक दिन बाद भारतीय प्रेस परिषद के अध्यक्ष पूर्व न्यायाधीश मार्कडेय काटजू ने कहा है कि सलमान रुश्दी 'मामूली' और 'औसत दर्जे के लेखक' हैं.

मार्कडेय काटजू ने कहा कि अगर सलमान रुश्दी ने विवादास्पद पुस्तक 'द सैटेनिक वर्सेज़' न लिखी होती तो वह एक गुमनाम लेखक होते.

काटजू ने कहा, "मैंने रुश्दी की कुछ कृतियां पढ़ी हैं और मेरी राय में वह एक मामूली लेखक हैं यहां तक कि उनकी 'मिडनाइट्स चिल्ड्रेन' मुश्किल से महान साहित्य की श्रेणी में आती है.

उन्होंने कहा, ‘मैं धार्मिक रूढ़िग्रस्तता का पक्षधर नहीं हूं लेकिन मेरी इच्छा किसी निम्नस्तरीय लेखक को हीरो बनाने की नहीं है.’

औपनिवेशिक हीनभावना

कुछ समय पहले तक उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश रहे काटजू ने भारत में जन्मे और ब्रिटेन में रहने वाले रुश्दी के प्रशंसकों की आलोचना की.

मार्कडेय काटजू,

"मैंने रुश्दी की कुछ रचनाएं पढ़ी हैं और मेरी राय में वह एक मामूली लेखक हैं अगर सलमान रुश्दी ने विवादास्पद पुस्तक 'द सैटेनिक वर्सेज़' न लिखी होती तो वह एक गुमनाम लेखक होते. यहां तक कि उनकी 'मिडनाइट्स चिल्ड्रेन' मुश्किल से महान साहित्य की श्रेणी में आती है."

काटजू ने कहा कि वह औपनिवेशिक हीनभावना से ग्रस्त है कि विदेश में रहने वाला लेखक महान होता है.

काटजू ने कहा, ‘समस्या यह है कि आज भारत के शिक्षित लोग औपनिवेशिक हीनभावना से ग्रस्त है. इसलिए जो भी लंदन या न्यूयार्क में रहता है, वह महान लेखक है. जबकि भारत में रहने वाले लेखक निम्न स्तर के है.'

उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ने कहा, ‘कबीर और तुलसीदास इसलिए अच्छे नहीं हैं क्योंकि वे बनारस के घाट पर रहते थे. जबकि रूश्दी महान लेखक इसलिए हैं क्योंकि वह टेम्स नदी के घाट पर रहते हैं. यह हमारे बौद्धिक और साहित्यिक लोगों का सोचने का स्तर है.’

चर्चित बयान

इससे पहले भी जस्टिस मार्कंडेय काटजू के कई बयान बेहद चर्चा में रहे है बिग बॉस में हिस्सा लेने भारत आई अमरीकी पॉर्न स्टार सनी लियोन के लिए उन्होंने कहा था कि अतीत के लिए उनकी निंदा नहीं की जानी चाहिए.

भारत रत्न के मुद्दे पर उनका कहना था कि क्रिकेटरों और फ़िल्मी सितारों को भारत रत्न देना इस सम्मान का मज़ाक उड़ाना होगा क्योंकि इन लोगों का कोई 'सामाजिक सरोकार' नहीं होता.

यही नही, पत्रकारों के लिए उनकी टिप्पणी थी कि आमतौर पर पत्रकारों का बौद्विक स्तर कम होता है.

उनकी ये सारी टिप्पणियाँ बेहद चर्चित रही थीं और अब बारी सलमान रुश्दी की है.

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