भ्रष्टाचार के ख़ात्मे की शुरुआत करेंगे: अमरिंदर

 गुरुवार, 26 जनवरी, 2012 को 16:44 IST तक के समाचार

पंजाब में कांग्रेस और अकाली दल चुनावी जंग में जुटे हैं, जहाँ 30 जनवरी को मतदान है. कांग्रेस की अगुआई पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह कर रहे हैं.

पटियाला राजघराने से तालुल्क रखने वाले अमरिंदर सिंह ने भारतीय फ़ौज से होते हुए राजनीति का सफ़र तय किया है. पंजाब चुनाव से पहले बीबीसी ने अमरिंदर सिंह से विशेष बातचीत की.

आपने पंजाब विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची निकाली है, उसका आधार क्या है ?

चुनाव में 100 फ़ीसदी चुनाव जीतने की योग्यता को ही टिकट देने का आधार बनाया गया है. जो जीत सकता है उसे टिकट दिया गया है. विधानसभा में तो संख्या का ही खेल है. पंजाब कांग्रेस के जितने ज़्यादा उम्मीदवार जीतेंगे, हमारी सरकार उतनी ही मज़बूत होगी.

अकाली दल पर परिवारवाद के आरोप लगाए जा रहे हैं. आपके विरोधी यही आरोप आप पर भी लगा रहे हैं. आपने अपने बेटे रनिंदर को टिकट दिलवाया और भी कई उम्मीदवार हैं जो किसी न किसी नेता के रिश्तेदार हैं.

मेरा बेटा रनिंदर कोई पहली बार राजनीति में नहीं आया है. पिछले लोकसभा चुनाव के समय उसे भटिंडा से चुनाव लड़वाया गया था क्योंकि कोई भी बादल से लड़ने को तैयार नहीं था. कांग्रेस को ज़रूरत थी कि बादल को हम उसी क्षेत्र में उलझाए रखें ताकि वे बाक़ी क्षेत्रों में चुनाव प्रचार न कर सके. रनिंदर ने ये मकसद पूरा किया. इस बार जब पंजाब चुनाव की बारी आई तो कांग्रेस अध्यक्ष ने सोचा कि रनिंदर ने पार्टी के लिए काफ़ी कुछ किया है और उसे भी विधानसभा में मौक़ा मिलना चाहिए.

लोगों ने पाँच साल तक पंजाब में अकाली दल सरकार का राज देखा है. कांग्रेस किन मुद्दों को लेकर लोगों के सामने जा रही है?

अकाली दल के राज में पंजाब दिवालिया हो गया है. हमें पंजाब को नई दिशा देनी है, जिसके लिए व्यवस्थित रूप से विकास करने की ज़रूरत है. पंजाब में कृषि की हालत सुधारनी होगी, प्रगतिशील नीतियों के ज़रिए उद्योग लाने होंगे. 47 लाख बेरोज़गार हैं, उन्हें रोज़गार दिलाना है. ये सब होगा तभी पंजाब की अर्थव्यवस्था बदलेगी.

आप बादल सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते रहे हैं, लेकिन केंद्र में कांग्रेस सरकार के रहते 2-जी का मामला हुआ, राष्ट्रमंडल खेलों को लेकर घोटाला हुआ. इसका असर पंजाब में कांग्रेस पर नहीं पड़ेगा.

मुझे नहीं लगता कि 2-जी या राष्ट्रमंडल खेलों के कांड का पंजाब चुनाव पर असर पड़ेगा. इन मामलों में जो भी अभियुक्त हैं वो तो तिहाड़ जेल में बंद हैं. केंद्र सरकार ने क़दम उठाए हैं. लेकिन पंजाब में तो दोषियों को कोई पूछना वाला नहीं है. यहाँ कोई भी काम बिना पैसा दिए नहीं होता. पंजाब में खनन, शराब से लेकर केबल टीवी के कॉन्ट्रेक्ट बादल परिवार के पास हैं.

अगर कांग्रेस की सरकार बनती है, तो आप ये वादा कर सकते हैं कि लोगों को भ्रष्टाचार मुक्त सरकार मिलेगी?

देखिए अगर मैं ये कहूँ कि सत्ता में आते ही सब ठीक हो जाएगा तो ये ग़लत बात है. हम कुछ क़दम ज़रूर उठाएँगे. हम विधानसभा में राज्य लोकपाल एक्ट लेकर आएँगे जिसमें उन्हें खुली छूट दी जाएगी. साथ ही हम विजिलेंस कमीशन बनाएँगे. ऐसा नहीं होगा कि हम अपने विरोधियों के ख़िलाफ़ मामले शुरू कर देंगे. ये कमीशन सरकार के अंदर भ्रष्टाचार को देखेगा.

पंजाब में इस बार तीसरा मोर्चा भी है. मनप्रीत बादल का नए दल पीपीपी मैदान में है. टीकाकार कह रहे हैं कि ये मोर्चा कांग्रेस के वोटबैंक में सेंध लगा सकता है.

मनप्रीत बादल को अभी अपने समय का इंतज़ार करना पड़ेगा. इस बार के चुनाव में तो अगर मनप्रीत किसी को नुकसान पहुँचाएगा तो अकाली दल को पहुँचाएगा. उसका कारण ये है कि मनप्रीत प्रकाश सिंह बादल के परिवार के सदस्य हैं और पूरी उम्र अकाली दल में रहे हैं. अगर फूट पड़ेगी तो अकाली समर्थकों में पड़ेगी. इसका कांग्रेस पर कोई असर नहीं पड़ेगा. हमारे समर्थक हमारे साथ हैं.

कृषि और उद्योग को लेकर आपकी क्या सोच है?

कृषि में एफ़डीआई की ज़रूरत है पर गठबंधन की मजबूरियों की वजह से कांग्रेस सरकार वो विधेयक ला नहीं पाई. उगाए जाने वाली फ़सलों में विविधिकरण करना होगा. बिना उद्योग के तो पंजाब का विकास हो ही सकता.

2002 में कांग्रेस सत्ता में थी लेकिन 2007 में लोगों ने उसे मौका नहीं दिया. आपको लगता है कि मुख्यमंत्री रहते हुए कुछ कमी रह गई थी.

पिछले चुनाव में अकाली दल और कांग्रेस का वोटबैंक तकरीबन बराबर था. लेकिन शहरी इलाक़ों में हमें कम वोट मिले जो हमारा गढ़ रहा है. शायद ऐसी छवि बन गई थी कि हम केवल गाँवों में ही काम कर रहे हैं. पर इस बार गाँव और शहर दोनों हमारे साथ हैं.

भारत के सेनाध्यक्ष की उम्र को लेकर विवाद है. सेनाध्यक्ष का समर्थन करते हुए आपकी एक चिट्ठी सामने आई है जो आपने रक्षा मंत्री को लिखी है. कहीं आपकी नज़र पंजाब में पूर्व फ़ौजियों के वोटों पर तो नहीं.

अगर वोटों पर नज़र होती तो मैं ये चिट्ठी ख़ुद प्रेस को देता. ये चिट्ठी रक्षा मंत्रालय से लीक हुई है. वे बोल रहे हैं कि उनका जन्म 1951 में हुआ है. मेरा सिर्फ़ इतना कहना है कि आप अपने सेनाध्यक्ष की ज़बान को ही नहीं मान रहे. आप उनकी निष्ठा पर सवाल उठा रहे हैं. मेरे जैसे पूर्व फ़ौजियों को ये बात अच्छी नहीं लगी.

पंजाब में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार कौन हैं?

ये तो कांग्रेस अध्यक्ष तय करेंगी. अगर हम जीत जाएँगे तो बैठक में वही तय करेंगी. कांग्रेस में ऐसा ही होता है.

इसी विषय पर और पढ़ें

BBC © 2014 बाहरी वेबसाइटों की विषय सामग्री के लिए बीबीसी ज़िम्मेदार नहीं है.

यदि आप अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करते हुए इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरूप कर लें तो आप इस पेज को ठीक तरह से देख सकेंगे. अपने मौजूदा ब्राउज़र की मदद से यदि आप इस पेज की सामग्री देख भी पा रहे हैं तो भी इस पेज को पूरा नहीं देख सकेंगे. कृपया अपने वेब ब्राउज़र को अपडेट करने या फिर संभव हो तो इसे स्टाइल शीट (सीएसएस) के अनुरुप बनाने पर विचार करें.