ये खंडूरी का असली चेहरा नहीं: सुबोधकांत

सुबोधकांत सहाय
Image caption सुबोधकांत सहाय के आरोपों पर भाजपा ने सख्त आपत्ति दर्ज की है.

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दा है और हर पार्टी और प्रत्याशी खुद को ईमानदार और जवाबदेह और दूसरे को भ्रष्ट साबित करने पर आमादा है.

जहां भाजपा केंद्र में कॉंग्रेस के कथित घोटालों को मुद्दा बना रही है और खंडूरी की ईमानदार छवि को भुनाने में लगी है वहीं कॉंग्रेस अब तक निशंक राज के कथित घोटालों पर ही सवाल उठा रही थी.

लेकिन शुक्रवार को केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने मुख्यमंत्री भुवनचंद खंडूरी के कमोबेश अब तक के पाक- साफ दामन पर अंगुली रख दी.

एक तीर से दो शिकार करने की कोशिश करते हुए सुबोधकांत सहाय ने आरोप लगाया कि खंडूरी के पिछले कार्यकाल में बाबा रामदेव से 2 करोड़ रूपये रिश्वत ली गई थी और रामदेव ने पैसा देकर अपने फूड पार्क के लिये खेतिहर जमीन का लैंड यूज चेंज करवाया.

सुबोध कांत सहाय ने कहा, “खंडूरी ये बताएं कि पैसा कहां रखा ,पार्टी फंड में दिया या अपने पास रखा .रामदेव भी ये बताएं कि उन्होंने पैसा किसके अकाउंट में दिया.”

सुबोधकांत सहाय का कहना था, “एक भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने वाले रामदेव महात्मा हैं तो दूसरे खंडूरी हैं जिनकी ईमानदार छवि का प्रचार किया जा रहा है. दरअसल खंडूरी का ये असली चेहरा नहीं है.”

सुबोधकांत सहाय ने अपने आरोप के प्रमाण में कुछ कागज़ात भी पेश किये.

उन्होंने ये आरोप तब लगाए हैं जब दो दिन पहले ही रामदेव ने देहरादून में कॉंग्रेस के ख़िलाफ़ जमकर बयानबाज़ी की और भाजपा को वोट देने की अपील की .साथ ही भाजपा को भ्रष्टाचार के विरूद्ध प्रतिबद्ध पार्टी का तमगा दिया .

शायद इसीलिये सुबोधकांत सहाय के ज़रिये कॉंग्रेस ने दोनों को ही कटघरे में खड़ा करने की ये कोशिश की है और एक तरह से भाजपा के ‘खंडूरीगान’ के ख़िलाफ़ एक बड़ा दांव चला है.

मीडिया में ऐसी भी खबरें आती रही हैं कि रामदेव के योग और आयुर्वेद के कारोबार में सुबोधकांत सहाय की भी हिस्सेदारी है लेकिन उन्होंने इस बात से साफ़ तौर पर इनकार किया और कहा कि ‘मैं उनका बिज़नेस पार्टनर नहीं’.

भाजपा का जवाब

बहरहाल सुबोधकांत सहाय के इन आरोपों पर भाजपा ने सख्त आपत्ति दर्ज की है.

भाजपा की प्रदेश प्रवक्ता दीप्ति रावत ने कहा, “कॉंग्रेस के पास खंडूरीजी की तरह कोई ईमानदार व्यक्ति नहीं है और आज जब हमें खंडूरीजी के नाम पर वोट मिल रहे हैं तो कॉंग्रेस उनपर निजी हमला कर रही है.”

उन्होने कहा, “ये बाबा रामदेव को ही स्पष्ट करना चाहिये कि उनसे किसने पैसा मांगा और उन्होंने किसे दिया लेकिन इस बात में कोई तथ्य नहीं कि खंडूरीजी ने उनसे पैसा लिया.”

रामदेव ने पिछले वर्ष निशंक के मुख्यमंत्री रहते हुए खंडूरी सरकार की ओर संकेत करते हुए आरोप लगाया था कि उनसे 2 करोड़ की रिश्वत मांगी गई थी.

रामदेव के इस बयान के बाद भाजपा में बवाल मच गया था और उसके बाद रामदेव बैकफुट पर आ गये थे.

इस घटना के बाद रामदेव से कई अवसरों पर ये सवाल पूछा जाता रहा है कि वो रिश्वत लेनेवाले मंत्री का नाम बताएं लेकिन इस मसले पर वो अपना मुंह बंद ही रखते हैं.

लेकिन सुबोधकांत सहाय ने बोतल में बंद हो चुके इस जिन्न को दोबारा खोल दिया है .

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