पंजाब में ‘गद्दाफ़ी’ और ‘सद्दाम’ से भी तुलना!

पंजाब
Image caption अपने चुनावी घोषणापत्र में सुखबीर बादल ने कहा कि प्रदेश में नौवीं के बाद की हर छात्रा को मुफ्त साइकिल दी जाएगी.

पंजाब में चल रही चुनावी जंग में दिनों-दिन वाक युद्ध तेज़ होता जा रहा है.

हालांकि जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल हो रहा है उससे लोग ख़ुश नहीं है.

दो महीने पहले कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने प्रकाश बादल की तुलना गद्दाफ़ी से कर दी थी तो अब सुखबीर बादल ने अमरिंदर की तुलना सद्दाम हुसैन से कर डाली है.

दरअसल चुनावों की घोषणा से पहले कांग्रेस नेता अमरिंदर सिंह ने आरोप लगाया था कि प्रकाश सिंह बादल की सरकार ने प्रदेश को लूटा है और लोग उन्हें लीबियाई तानाशाह गद्दाफ़ी की तरह बाहर निकाल फेकेंगे.

अब एक चुनावी सभा में उप-मुख्यमंत्री सुखबीर बादल ने अमरिंदर सिंह की तुलना सद्दाम हुसैन से कर दी.

सुखबीर ने कहा कि अमरिंदर अपने पार्टी के बाग़ियों को कत्ल-ए-आम की धमकी ऐसे दे रहे हैं मानो वो कोई 'सद्दाम हुसैन' हों. राजनीति में तल्ख़बयानी तो होती ही है लेकिन भाषा की गरिमा की अनदेखी लोगों को रास नहीं आ रही है.

बैंड बाजा और रिपोर्टिंग

पंजाब में लुधियाना के पास खन्ना कस्बे में पहुँच कर विधानसभा चुनावों की रिपोर्टिंग करने का आगाज़ मेरे लिए कुछ अनूठे ही अंदाज़ में हुआ.

एक तरफ़ रिपोर्ट लिखने के लिए राजनीतिक पार्टियों के सियासी जोड़-तोड़ के हिसाब में मेरा दिमाग़ लगा हुआ था तो दूसरी ओर पृष्ठभूमि में बजता कानफ़ोडू संगीत—कभी चिकनी चमेली, कभी ऊ ला ला और कभी कैरेक्टर ढीला है...

वो इसलिए क्योंकि मुझे खन्ना कस्बे के एक मैरिज पैलेस में ठहरना पड़ा. इस कस्बे में ज़्यादा होटल तो है नहीं और जो हैं वो चुनावों के कारण बुक हो चुके हैं.

लेकिन चुनावों के साथ-साथ पंजाब में शादियों का भी सीज़न है और मैरिज पैलेस सजे हुए हैं. सो मैरिज पैलेस में बात करने पर रात को रुकने का इंतज़ाम हो गया...

ढोल ढमाकों, बैंड बाजे के बीच पहली चुनावी रिपोर्ट लिखने का अनुभव कुछ अलग ही रहा. वैसे मैरिज पैलेस में अपने सामान के लिए ऊपर-नीचे जाते मुझे अपनी हालत कुछ-कुछ बिन बुलाए बाराती जैसी लग रही थी

ठंड में बढ़ा राजनीतिक पारा

ज़्यादातर पार्टियों का पहले यही अनुमान था कि शायद पंजाब विधानसभा चुनाव फ़रवरी में होंगे.

उस समय तक ठंड की मार भी कुछ कम हो जाती है. लेकिन जब मतदान की तारीख़ 30 जनवरी घोषित हुई तो सब पार्टियाँ थोड़ी हैरत में पड़ गई.

पिछले कुछ दिनों में पंजाब में कड़ाके की ठंड पड़ी है. शिमला में बर्फ़बारी के बाद तो सिहरन और बढ़ गई थी. बारिश के कारण कई नेताओं का प्रचार भी प्रभावित हुआ.

धुँध की मार के बीच ही नेताजी प्रचार करने को मजबूर हैं. सर्दी के कारण अगर लोग बाहर न आएँ तो नेताजी घर-घर जाकर अपने लिए वोट माँग रहे हैं.

ऐसे में नेता अब यही उम्मीद कर रहे हैं कि कम से कम मतदान के दिन मौसम मेहरबान रहे ताकि मतदाता ज़्यादा से ज़्यादा संख्या में निकल सकें.

वैसे पंजाब भले ही ठंड से ठिठुर रहा हो लेकिन चुनावी सरगर्मियों ने राजनीतिक पारा ज़रूर बढ़ाया हुआ है.

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