मणिपुर: मतदान में हिंसा, तीन की मौत

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Image caption मणिपुर में मतदान का काम धीमी गति से चल रहा है.

मणिपुर में चुनाव आयोग के कंट्रोल रूम के अनुसार तांगपी में चुनावी हिंसी की ख़बर है जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई है.

मारे जाने वालों में अर्धसैनिक बल का एक जवान, एक चुनाव अधिकारी और एक महिला हैं.

हालांकि घटना से जुड़ी तफ़सील अभी इम्फ़ाल स्थित केंद्र तक नहीं पहुंच पाई है.

कंट्रोल रूम में मौजूद अधिकारी का कहना था कि सेनापति ज़िले में बुथ पर क़ब्ज़े की कोशिश की गई थी लेकिन वो कामयाब नहीं हो पाई.

हालांकि उनका कहना था कि राज्य की 60 विधानसभा सीटों के लिए मतदान का काम धीमी गति से चल रहा है और दिन के एक बजे तक 47.62 प्रतिशत मत ही डाले जा सके थे.

क़ब्ज़ा

राजधानी इम्फ़ाल से स्थानीय पत्रकार युमनाम रूपचंद्र सिहं ने बीबीसी को बताया कि सेनापति ज़िले के दो मतदान केंद्रों - टाडुबी और मखानखुलेन, पर भारी भीड़ इकठ्ठा हो गई जिसके हिसंक होने का डर था, इसलिए पुलिस को उसे नियंत्रण करने के लिए हवाई फ़ायर करना पड़ा.

युमनाम रूपचंद्र सिहं ने बताया कि लेकिन अब हालात क़ाबू में हैं.

हालांकि भीड़ के नाराज़ होने के कारणों का पता नहीं लग पाया है.

चुराचानपुर ज़िले में भी दो पोलिंग बूथ पर हंगामा हुआ और वहां मतदान का काम रोक दिया गया है.

तिपाईमुख और साईटू में कुछ लोगों ने जमा होकर मतदान केंद्र पर हंगामा शुरू करने की कोशिश की थी.

अधिकाशंतर केंद्रों पर मतदान के काम के धीमे होने की वजह चुनाव आयोग के नए निर्देश को बताया जा रहा है जिसके तहत वोट डालने वाले सभी लोगों की तस्वीरे मतदान करने के बाद उंगली पर लगाई गई स्याही के साथ खींची जानी है.

इन सभी तस्वीरों को बाद में वोटिंग लिस्ट के साथ मिलाया जाएगा.

क़तारें

इसी वजह से मतदान केंद्रों के सामने कतारें लंबी होती जा रही हैं.

हालांकि चुनाव अधिकारियों ने लोगों को आश्वसन दिया है कि जितने लोग वोटिंग का समय समाप्त होने के बाद, यानी तीन बजे दिन के बाद भी, मतदान केंद्रों के आसपास बनाई गई रूकावटों के भीतर मौजूद होंगे उन्हें बाद में भी वोट करने दिया जाएगा.

चुनाव अधिकारी हर तरह की सावधानी और चौकसी बरत रहे हैं और दो-दो घंटे के अंतराल के बाद पहले से सुनिश्चित एक टेलीफ़ोन पर मोबाइल संदेश के ज़रिए हालात की जानकारी दे रहे हैं.

मणिपुर में कुल 17 लाख चालीस हज़ार मतदाता हैं जिन्हें कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, वामपंथियों और त्रिणमुल के बीच अपने विधानसभा सदस्य को चुनना है.

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