साढ़ू भाई आमने-सामने

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Image caption रुद्रप्रयाग की सीट पर कांग्रेस ने हरक सिंह रावत को मैदान में उतारा है

उत्तराखंड की रुद्रप्रयाग विधानसभा सीट पर राज्य के दो दिग्गज आमने-सामने हैं. यहाँ से पाँच बार विधायक रह चुके भारतीय जनता पार्टी के क़द्दावर नेता और मौजूदा सरकार में समाज कल्याण और सिंचाई मंत्री मातबर सिंह कंडारी और विधान सभा में नेता प्रतिपक्ष कांग्रेस के हरक सिंह रावत एक दूसरे को चुनौती दे रहे हैं.

लेकिन इस राजनीतिक लड़ाई पर कई लोगों की निगाहें इसलिए टिकी हुई हैं क्योंकि ये दोनों नेता आपस में सगे साढ़ू भाई हैं.

हरक सिंह रावत डोईवाला से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला, फिर उन्होंने सहसपुर से कोशिश की लेकिन वहाँ भी उनकी दाल नहीं गली. आख़िर में पार्टी आलाकमान ने उन्हें रुद्रप्रयाग से चुनाव लड़ने का फ़रमान जारी कर दिया.

मरता क्या ना करता हरक सिंह रावत ने ये चुनौती स्वीकार कर ली.

इस समय हरक सिंह रावत विपक्ष के नेता हैं और जब 2002 में कांग्रेस की सरकार बनी थी तो कंडारी नेता प्रतिपक्ष थे. यानि कई मामलों में इन दोनों साढ़ू भाईयों के तार आपस में जुड़े हुए हैं.

कंडारी इस इलाक़े के स्थानीय नेता हैं और लगभग हर मौक़े पर अपने क्षेत्र में नज़र आते हैं जबकि हरक सिंह रावत को यहां बाहरी माना जा रहा है. इसके काट के लिए हरक सिंह रावत के समर्थक उन्हें अगले मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार के रूप में वोटरों के सामने पेश कर रहे हैं. जीत चाहे किसी की हो लेकिन इतना तो है कि वोटरों ने जिन्हें अपना प्यार ज़्यादा दिया उन्हें अपनी साली की नाराज़गी झेलनी पड़ेगी.

जानवरों का आतंक

Image caption अल्मोड़ा सहित कई ज़िलो में जंगली जानवर लोगों की समस्या बने हुए हैं

राज्य में कई पहाड़ी और कुछ मैदानी इलाक़ों में जंगली जानवर किसानों के लिए एक बड़ी समस्या बने हुए हैं. ये जंगली जानवर ना केवल किसानों की फ़सलों को बर्बाद कर रहें हैं बल्कि कई बार तो गांव वालों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है.

कुमाऊं में बंदर, भालू, लंगूर, सेही, बाघ, सुअर और हाथी जैसे जानवर किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं.

पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, चंपावत, रानीखेत, रामनगर आदि क्षेत्रों में ये बहुत बड़ी समस्या बन गई है. अल्मोड़ा में छावनी परिषद के पूर्व उपाध्यक्ष जंग बहादुर थापा कहते हैं कि पहले वो छह-आठ महीने तक खाने के लिए फ़सलें ख़ुद उगा लेते थे लेकिन जानवरों के आतंक के कारण उन्होंने इसे छोड़ दिया है.

कई क्षेत्रों में मतदाताओं ने फ़सलों को हो रही क्षति से निबटने के लिए दीर्घकालिक योजना बनाए जाने की मांग की है.

मतदाताओं ने सभी दल के प्रत्याशियों से फलदार और चौड़ी पत्ती प्रजाति के पौधों को लगाने और बर्बाद होने वाली फ़सलों को मुआवज़े के दायरे में लाने की मांग की है.

लेकिन जंग बहादुर थापा के मुताबिक बड़े अफ़सोस की बात है कि किसी भी पार्टी ने इस मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में शामिल नहीं किया.

मोबाइल टावर और मधुमक्खी

पूरे देश की तरह उत्तराखंड में भी पिछले कुछ वर्षो में मोबाइल सेवा में काफ़ी बढ़ोत्तरी हुई है. पूरे राज्य के आंकड़े तो मेरे पास नहीं है लेकिन सिर्फ़ अल्मोड़ा और उसके आस-पास के चार ज़िलों में हर महीने पांच करोड़ रुपए का मोबाइल रीचार्ज कराया जाता है.

इसके लिए अकेले बीएसएनएल ने अल्मोड़ा में 180 टावर लगाए हैं. ज़ाहिर है ये कोई परेशानी की वजह तो नहीं लगती लेकिन इन टावरों का संबंध मधुमक्खियों से है.

अल्मोड़ा के जंग बहादुर थापा कहते हैं इन टावरों की विशेष तरंगों के कारण इलाक़े में मधुमक्खियां कम हो रही हैं.

इसके कारण शहद के कारोबार में काफ़ी कमी आई है.

कुछ वर्ष पहले तक अल्मोड़ा और आस-पास के इलाक़ों में शहद का कारोबार कुटीर उद्योग का हिस्सा था लेकिन इन टावरों की वजह से ये व्यापार लगभग ख़त्म हो गया है.

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