भारत ने की अमरीका और यूरोपीय संघ की अनसुनी

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Image caption भारत को पहले भी ईरान को भुगतान करने में दिक्क़तों का सामना करना पड़ा था.

भारत ने कहा है कि अमरीका और यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बावजूद वो ईरान से कच्चे तेल के व्यापार पर रोक नहीं लगाएगा.

अमरीका के दौरे पर गए भारतीय वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने शिकागो में कहा, "भारत के लिए ईरान से होने वाले तेल आयात में बड़ी कटौती का फ़ैसला लेना संभव नहीं है, क्योंकि जो देश तेज़ी से बढ़ रही अर्थव्यवस्थाओं की ज़रूरतों को पूरा कर सकते हैं, ईरान उनमें से एक अहम मुल्क है."

प्रणव मुखर्जी दो दिनों की यात्रा पर अमरीका में थे और रविवार के दिन उन्होंने शिकागो के एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया जहां उन्होंने ये बयान मिडिया के सामने दिया.

अमरीका और यूरोपीय संघ ने ईरान के परमाणु कार्यक्रमों के चलते उसके ख़िलाफ़ कई तरह के आर्थिक प्रतिबंध लगा रखे हैं और उनकी ताज़ा कड़ी में दोनों ने ये फ़ैसला लिया है कि ईरान से तेल आयात को मुश्किल बना दिया जाएगा.

फ़ैसला

अमरीका के ज़रिए दिसंबर में लिए गए एक फ़ैसले के तहत किसी भी उस वित्तीय संस्था को दण्डित किया जा सकता है जो ईरान के केंद्रीय बैंक के साथ लेन-देन करेगा.

यूरोपीय संघ ने इस फ़ैसले पर हाल में ही हामी भरी है.

समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार भारत ईरान से अपने कुल कच्चे तेल आयात का 12 प्रतिशत ख़रीदता है, और इसलिए वो ईरान से आयात पर काफ़ी हद तक निर्भर है; लेकिन अमरीकी प्रतिबंधों के चलते उसके लिए ईरान को पैसे की अदाएगी करने में मुश्किल पेश आएगी.

भारत चीन के बाद ईरान का सबसे बड़ा तेल निर्यातक है और ईरान से व्यापार प्रतिबंध के कारण उन्हें आर्थिक दिक्क़तों का सामना करना पड़ सकता है.

ख़बरें

इस बीच भारत के सामरिक मामलों के कुछ जानकारों के हवाले से समाचारों में कहा जा रहा है कि भारत और चीन के लिए ईरान से कच्चे तेल के आयात को बंद करने का भारी असर पड़ेगा.

कहा जा रहा है कि अमरीका ईरान से आयात पर उतना निर्भर नहीं जितना की चीन और भारत हैं इसलिए वो इस प्रतिबंध के लिए आसानी से राज़ी नहीं होंगे.

कई जगहों पर कहा जा रहा है कि प्रतिबंधों के चलते भूगतान में आने वाली दिक्क़त से निपटने के लिए भारत आयात का भुगतान सोने में कर सकता है लेकिन इसकी कोई पुष्टि नहीं हो पाई है.

हालांकि भारत सरकार ने अभी तक इन ख़बरों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.

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