सैम पेट्रोडा कांग्रेस के नए ओबीसी नेता ?

Image caption सैम पिट्रोडा नॉलेज कमीशन के अध्यक्ष रह चुके हैं

लखनऊ में जब सैम पिट्रोडा ने कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी किया तो कई लोगों का ध्यान बरबस उनकी तरफ़ चला गया. सफ़ेद बुर्राक बालों के मालिक और सूट-बूट में बैठे सैम आख़िर कांग्रेस के समारोह में क्या कर रहे थे ?

‘मैं एक बढ़ई का पुत्र हूँ और मुझे इस पर गर्व है.’ यह शब्द हैं भारत में टेलिकॉम क्राँति के जनक और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के तकनीकी सलाहकार सत्यनारायण गंगाराम पिट्रोडा उर्फ़ सैम पेट्रोडा के.

सैम अभी तक औपचारिक रूप से कांग्रेस के सदस्य नहीं बने हैं लेकिन जब से राहुल गाँधी ने उन्हें पिछड़ी जाति के एक ऐसे इंसान के रूप में पेश किया है जो अपनी मेहनत के बल पर इस ऊँचाई पर पहुँचा है, उनकी पूछ कांग्रेस हल्कों में बढ़ गई है.

कांग्रेस अपने प्रतिद्वंदियों के जाति विशेष चेहरों का मुकाबला करने के लिए सैम जैसे लोगों को आगे ला रही है ताकि वह कह सके कि उसके पास हर जाति, समुदाय और पेशेवर पृष्ठभूमि के नेता हैं.

सैम पिट्रोडा का जन्म 1942 में उड़ीसा के तीतलागढ़ ज़िले में हुआ था. वडोदरा विश्वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी करने के बाद उन्होंने इलिनॉय इंजीनयरिंग कॉलेज से इलेक्ट्रिकल इंजीनयरिंग की डिग्री ली थी.

1984 में राजीव गाँधी के कहने पर वह भारत वापस लौटे थे और सीडॉट की स्थापना कर गली-गली मे टेलिफ़ोनों का जाल बिछा दिया था.

पिछले दिनों जब पिट्रोडा ने कानपुर में कांग्रेस का दृष्टि पत्र जारी किया था तो उन्होंने वहाँ मौजूद लोगों से कहा था,’अगर पिट्रोडा कुछ कर सकता है तो आप भी कर सकते हैं और दूसरे लोग भी कर सकते हैं. भारत के चेहरे को बदलने के लिए पहले हमें इसके दिल को बदलना होगा. शरीर दिल को पीछे नहीं छोड़ सकता.’

पिछड़ी जातियों के पोस्टर ब्वॉय

पिछड़ी जातियों को लुभाने के कांग्रेस अभियान में उनके पोस्टर ब्वॉय बने पिट्रोडा अपने आप को इस भूमिका में सहज पाते हैं.

पिट्रोडा इस बात को छिपाते नहीं कि वह विश्वकर्मा समुदाय से हैं और गाँधी परिवार से उनकी काफ़ी नज़दीकियाँ हैं लेकिन वह इस बात के ज्यादा तूल नहीं देना चाहते कि कांग्रेस ने जान बूझ कर उनकी जाति बता कर पिछड़ी जातियों को अपनी तरफ़ करने की कोशिश की है ताकि उन्हें उमा भारती और बाबू राम कुशवाहा के ख़िलाफ़ टृंप कार्ड के तौर पर इस्तेमाल किया जा सके.

उनका कहना है कि जाति से ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं मौके, "अगर मैं मेरे रास्ते में आने वाले मौकों का इस्तेमाल कर यहाँ तक पहुँच सकता हूँ तो दूसरे लोग क्यों नहीं ?"

सैम के इस नए अवतार पर कई लोगों की आपत्ति थी कि एक सरकारी व्यक्ति होने के नाते वह एक पार्टी के मंच पर क्यों मौजूद हैं ? कांग्रेस का कहना है कि सैम की कांग्रेस के लिए सहानुभूति ज़रूर है लेकिन वह सरकार के सदस्य नहीं हैं.

सैम कांग्रेस के पक्ष में पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में कई रैलियों को संबोधित करेंगे.चूंकि वह ख़ुद नीचे से ऊपर की तरफ़ आए हैं वह न सिर्फ़ अंग्रेज़ी समझने वाले लोगों बल्कि आम लोगों को भी समझा सकते हैं कि बड़ा सोचने का मतलब क्या है.