सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले से पीएमओ को झटका

सुब्रमनियन स्वामी
Image caption याचिका पर आए फ़ैसले को सरकार के लिए बड़ा धक्का बताया जा रहा है

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार को किसी भी लोकसेवक के विरूद्ध क़ानूनी कार्यवाही की इजाज़त की अर्जी पर चार माह के भीतर निर्णय करना होगा. ऐसा ना होने की स्थिति में ये माना जाएगा कि कार्यवाही की अनुमति मिल गई है.

जनता पार्टी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की एक याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर हुकुमत को उक्त मामले में अटार्नी जनरल की सलाह लेने की ज़रूरत हो तब ये अवधि माह भर के लिए बढ़ाई जा सकती है, यानी उस सूरत में कार्रवाई की अनुमति चार माह के भीतर दी जा सकती है.

सुब्रमण्यम स्वामी ने याचिका दायर करके अदालत से आग्रह किया था कि वो ये तय करे कि क्या किसी लोकसेवक के ख़िलाफ़ कार्रवाई की इजाज़त देने वाला संबंधित अधिकारी मामले को अनिश्चित काल के लिए टाल सकता है?

क़ानूनी अधिकार

जनता पार्टी नेता की याचिका की सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा कि सुब्रमण्यम स्वामी को पूरा अधिकार था कि वो पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा के ख़िलाफ़ मुक़दमे के लिए प्रधानमंत्री से संपर्क करें.

Image caption सुप्रीम कोर्ट ने संसद से इस संबंध में क़ानून बनाने को भी कहा है

न्यायधीश एके गांगुली ने कहा कि अगर संबंधित अधिकारी क़ानूनी कार्रवाई किए जाने की इजाज़त चार माह के भीतर नहीं देते हैं तो समझा जाएगा कि मामला आगे जारी रखने का आदेश मिल गया है.

अदालत ने कहा कि भ्रष्टाचार विरोधी क़ानून के भीतर किसी भी लोकसेवक के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करने का हक़ एक क़ानूनी अधिकार है.

अदालत ने आदेश दिया है कि संसद में संशोधन लाकर ये तय कर दिया जाना चाहिए कि अगर संबंधित अधिकारी क़ानूनी कार्रवाई किए जाने की इजाज़त चार महीने के भीतर नहीं देते हैं तो समझा जाएगा कि आज्ञा दे दी गई है.

मामला

जनता पार्टी के प्रमुख ही 2जी घोटाले के मामले में अहम मुक़दमों को अदालत में ले गए हैं.

उन्होंने कहा था कि उन्होंने स्पेक्ट्रम घोटाले के बारे में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को चिट्ठी लिखकर आगाह किया था और पूर्व टेलीकॉम मंत्री ए राजा के ख़िलाफ़ मामला दाख़िल करने की इजाज़त मांगी थी लेकिन उन्हें लंबे समय तक कोई जवाब नहीं मिला.

उनका कहना है कि उन्होंने मनमोहन सिंह को ये ख़त 29 नवंबर, 2008 को लिखा था लेकिन उन्हें इसका जवाब 19 मार्च, 2010 में मिला जिसमें उनकी अर्ज़ी को "समय पूर्व" बताया गया.

प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से कहा गया था कि इस मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी छानबीन कर रही है.

बाद में इसी मामले में ए राजा की गिरफ़्तारी हुई और वो फ़िलहाल दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद हैं.

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