अंडमान 'ह्यूमन सफारी':ब्रिटेन की संसद में प्रस्ताव

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Image caption जारवों का बाहरी दुनिया से बहुत कम संपर्क है

भारत में अंडमान निकोबार द्वीप समूह में जारवा जनजाति से साथ 'ह्यूमन सफारी' की तरह व्यवहार किए जाने पर ब्रिटेन की संसद में एक प्रस्ताव पेश किया जाएगा.

इस 'अर्ली डे' प्रस्ताव में भारत सरकार से आग्रह किया गया है कि वह इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू करते हुए उस गैर-कानूनी सड़क को बंद करे जो इस जनजातीय जगह से गुज़रती है.

'अर्ली डे' प्रस्ताव ऐसे प्रस्ताव होते हैं जिनसे सांसद किसी मुद्द या घटना की तरफ ध्यान आकर्षित करते हैं हालांकि इनमें से कम ही बहस के लिए आगे बढ़ते हैं.

ब्रिटेन के समाचार पत्रों ने ऐसे वीडियो हासिल किए हैं जिनमें जारवा जनजाति के लोगों को उत्सुक सैलानियों के लिए ह्यूमन सफ़ारी की तरह इस्तेमाल किया गया है.

जारवा जनजाति का बाहरी दुनिया से बहुत कम ही संपर्क है.

एक अंतरराष्ट्रीय संगठन 'सरवाइवल इंटरनेश्नल' का कहना है कि इस प्रस्तावों को सासंद एंड्रयू जॉर्ज और डैन रॉजरसन का समर्थन प्राप्त है.

प्रस्ताव में कहा गया है, "ये सदन इस बात से चिंतित है कि भारत के अंडमान द्वीप समूह में सैलानी जारवा जनजाति के लोगों को इस तरह से इस्तेमाल कर रहे हैं जैसे 'ह्यूमन सफारी पार्क' में आकर्षित करने वाली चीज़ों को किया जाता है.

'बंद करो सड़क'

प्रस्ताव में कहा गया है कि इस सड़क के गैर-कानूनी इस्तेमाल की वजह से हो रहे नुकसान का काफी सबूत है. प्रस्ताब में भारत से आग्रह किया गया है कि सुप्रीम कोर्ट के साल 2002 के आदेश का पालन करते हुए इस सड़क को बंद किया जाए.

ब्रितानी अख़बार 'ऑब्ज़र्वर' और 'गार्डियन' ने अंडमान निकोबार द्वीप समूह ने कुछ वीडियो हासिल किए थे. इनमें दो वीडियो जारी किए गए थे जिनमें जारवा जनजाति की महिलाओं के अर्धनग्न रूप को नाचते दिखाया गया था.

माना जा रहा है कि ये वीडियो इस मामले में कथित तौर पर सुरक्षाकर्मियों के लिप्त होने के सबूत हैं.

इस वीडियो में जारवा युवतियों को कथित तौर पर पुलिस अधिकारियों के सामने नाचते हुए दिखाया गया है. साथ ही सुरक्षाकर्मियों की कुछ टिप्पणियां भी इस वीडियो का हिस्सा हैं.

हालांकि पुलिस अधिकारियों ने ऐसे आरोपों को खारिज़ किया है.

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