'अन्ना को मुसलमान संसद में भेजेंगे'

मौलाना आमिर रशादी
Image caption मौलाना आमिर रशादी का कहना है कि व्यवस्था में परिवर्तन बाहर बैठ कर नहीं किया जा सकता

आज़मगढ़ में साल 2008 के बटला हाउस कांड के बाद अस्तित्व में आई राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने अन्ना हज़ारे को न्योता दिया है कि वो आएँ और उनकी पार्टी से अगला लोक सभा का चुनाव लड़ें.

मौलाना आमिर रशादी ने आज़मगढ़ में बीबीसी से बात करते हुए कहा कि अगर हज़ारे उनका प्रस्ताव स्वीकार करें तो वो दावा करते हैं कि उत्तर प्रदेश की किसी भी मुस्लिम बहुल सीट जैसे आज़मगढ़ या बहराइच से जीता कर उन्हें संसद में भेजेंगे.

मौलाना रशादी ने कहा कि अन्ना हज़ारे को यह समझना होगा कि व्यवस्था में परिवर्तन बाहर से बैठ कर नहीं लाया जा सकता.

रशादी ने कहा, "अगर नदी में कोई डूब रहा हो और किनारे खड़े हो कर एक लाख लोग बचाओ बचाओ चिल्लाएं तो क्या वो आदमी बच जाएगा. उसे बचाने के लिए किसी को नदी में कूदना होगा."

रशादी किसी का नाम लिए बिना कहते हैं, "अन्ना हज़ारे खुद तो बड़े ही अच्छे आदमी हैं लेकिन उनके सलाहकार सब सही नहीं हैं कोई फ़ोर्ड फ़ाउंडेशन से पैसा लेता है, तो कोई अमरीका से."

चुनावी समर में मुस्लिम पार्टियाँ

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Image caption अन्ना हज़ारे ख़राब स्वास्थ्य के कारण उत्तर प्रदेश दौरा नहीं कर पा रहे हैं

उत्तर प्रदेश में चल रहे चुनावों में पहली बार दो ऐसी पार्टियां मैदान में कूदी हैं जिनके बारे में माना जा रहा है कि यह मुसलामानों की पार्टियां हैं. राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के अलावा उत्तर प्रदेश में पीस पार्टी भी मुसलमान वोटों को अपने साथ करने के लिए मेहनत कर रही है.

हालाँकि इन दोनों पार्टियों ने बड़ी तादात में हिंदू प्रत्याशियों को भी टिकट दिया है.

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में राजनीति शास्त्र के प्रोफ़ेसर डॉ. असमर बेग़ कहते हैं कि ये पार्टियां चुनावी माहौल में अपनी कोई बड़ी छाप छोड़े या ना छोड़ें, इनसे यह तो साबित होता ही है मुसलमान में आत्मविश्वास बढ़ा है.

आजमगढ़ के मशहूर शिबली नेशनल कॉलेज में इतिहास के प्रोफ़ेसर डॉ अलाउद्दीन ख़ान कहते हैं, "यह पार्टियां अपने प्रत्याशी विधान सभा में भेज पाएं ना भेज पाएं इनकी वजह से नतीजे प्रभावित होंगें और इन्हें बड़ी तादात में मुसलमानों का वोट मिलेगा."

डॉ. ख़ान का मानना है कि यह मुसलमानों के लिए अच्छा होगा क्योंकि इसकी वजह से समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी जैसे दलों को मुसलमानों को वोटों को अपनी तरफ़ बनाए रखने के लिए कुछ करना होगा.

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