बुनकरों के धागों में फँसे बाहुबली मुख़्तार

मुख़्तार अंसारी इमेज कॉपीरइट pti
Image caption मुख़्तार अंसारी इस समय जेल में हैं और वहीं से चुनाव लड़ रहे हैं

उत्तर प्रदेश में कानपुर वालों की ही तरह मऊनाथ भंजन के लोग भी अपने छोटे से शहर को 'पूरब का मैनचेस्टर' कहना पसंद करते हैं.

उनके पास अपने कारण भी हैं. इस शहर के अस्तूपुरा, क्यारीटोला, रौज़ा चौक, मिर्ज़ा हदिपुरा चौक एक के बाद एक किसी भी मोहल्ले में चले जाइए, हर घर से आपको बस एक ही आवाज़ सुनाई देगी.

शहर की एक बस्ती में दानिशगाह पब्लिक स्कूल चलाने वाले मास्टर इज़हार कहते हैं, "मुसलमानों में जब बच्चा होता है, तो ऐसा माना जाता है कि उसे कान में सबसे पहले अज़ान सुनाई जाए. यहाँ मुसलमान के घर बच्चा पैदा होता है, तो उसके कान में सबसे पहले पावरलूम की खटपट सुनाई देती है. इसलिए यहाँ का आदमी बुनाई से अपना पीछा नहीं छुड़ा पा रहा है."

लेकिन इन दिनों मऊनाथ भंजन को इस शहर के बाहर इसलिए जानते हैं, क्योंकि जेल में बंद माफ़िया डॉन कहे जाने वाले बाहुबली नेता मुख़्तार अंसारी इस शहर से विधायक हैं.

समर्थन

मुख़्तार का यहाँ से लगातर तीसरा चुनाव है. पहली बार वो बहुजन समाज पार्टी के टिकट से लड़े थे, दूसरा चुनाव अंसारी ने समाजवादी पार्टी के टिकट पर लड़ा और पिछ्ला चुनाव उन्होंने समाजवादी पार्टी के समर्थन से लड़ा.

बीते लोक सभा चुनावों में उन्होंने बसपा के टिकट पर बनारस से चुनाव लड़ा और मुरली मनोहर जोशी को कड़ी टक्कर दी.

इस समय अंसारी आगरा जेल में पूर्व भाजपा विधायक कृष्णा नन्द राय की हत्या के आरोप में बंद हैं और वहीं से चुनाव लड़ रहे हैं.

लेकिन लोग जेल में बंद किसी नेता को जिता क्यों रहे हैं? टाटा इंडिकॉम में काम करने वाले एक स्थानीय निवासी का कहना है, "मुख़्तार ग़रीब परवर हैं. अगर कोई ग़रीब उनके पास आगरा जेल में पहुँच जाए बेटी की शादी के लिए मदद मांगने तो वो मदद करते हैं."

लेकिन हमेशा किसी ना किसी पार्टी के समर्थन पर राजनीति करने वाले मुख़्तार इस बार मुश्किल में हैं और अपनी ख़ुद की पार्टी कौमी एकता दल बना कर चुनाव लड़ रहे हैं.

मुश्किल

Image caption इलाक़े के बुनकर को बिजली की समस्या से जूझना पड़ रहा है

पेशे से बुनकर उस्मान अंसारी कहते हैं, "मऊ में पिछले एक साल में पांच बुनकरों ने ग़रीबी की वजह से आत्महत्या की है. बिना बिजली के पवार लूम नहीं चल सकता और बिना पावरलूम के बुनकर."

एक दूसरे बुनकर इम्तियाज़ आलम स्वीकार करते हैं कि उन्होंने ख़ुद मुख़्तार अंसारी को तीन बार वोट दिया है लेकिन इस बार उनकी मंशा अलग है.

वे पूर्व में अपने वोट देने के पीछे के कारणों को बयान करते हुए कहते हैं, "पहली बार इसलिए दिया कि मुसलमान थे दबंग थे. लगा काम करेगें. दूसरी तीसरी बार उन्हें समाजवादी पार्टी के समर्थन का फ़ायदा हुआ. लेकिन अब नहीं. अब कोई ऐसा आदमी चाहिए, जो सामने तो हो."

यानी इस बार मुख़्तार अंसारी के लिए मऊनाथ भंजन में बुनकरों के ताने-बाने से निकलना आसान नहीं होगा.

एक तरफ, चुनाव आयोग की सख़्ती, दूसरी तरफ़ उनके परेशानहाल मतदाता.

बिजली की कटौती से जूझ रहे मऊनाथ भंजन के लोगों के ग़ुस्से का करंट कहीं मुख़्तार को लग ना जाये. मुख़्तार पुराने खिलाड़ी हैं, लेकिन इस बार कैसे इन फंदों से पार पाते हैं देखना होगा.

संबंधित समाचार