देशमुख को हाईकोर्ट की फटकार, घई को ज़मीन लौटाने का आदेश

विलासराव देशमुख (फ़ाइल फ़ोटो) इमेज कॉपीरइट Reuters
Image caption विलासराव देशमुख ने अन्ना के अनशन को समाप्त कराने में अहम भूमिका निभाई थी.

बंबई हाईकोर्ट ने जाने माने फ़िल्म निर्माता और निर्देशक सुभाष घई को आदेश दिया है कि वो उनके फ़िल्म संस्थान के लिए दी गई 20 एकड़ ज़मीन को महाराष्ट्र सरकार को लौटा दें.

गुरूवार को दिए गए फ़ैसले में बंबई हाई कोर्ट ने मौजूदा केंद्रीय मंत्री और उस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे विलासराव देशमुख को भी इसके लिए फटकार लगाई.

मुख्य न्यायाधीश मोहित शाह और जस्टिस गिरीश गोडबोले की खंडपीठ ने अपने फ़ैसले में देशमुख के ख़िलाफ़ कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख ने अपने 'सरकारी पद का दुरूपयोग' किया था.

लेकिन अदालत ने देशमुख को थोड़ी राहत देते हुए कहा कि इस पूरे मामले में ये साबित नहीं होता कि देशमुख ने अपने अभिनेता बेटे रितेश देशमुख को फ़िल्म उद्योग में स्थापित करने की नियत से सुभाष घई को कम क़ीमत पर ज़मीन दी थी इसलिए इस मामले को केंद्रीय जांच ब्योरो के हवाले किए जाने की ज़रूरत नहीं है.

एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने ये आदेश दिए थे.

'आबंटन ग़ैर-क़ानूनी'

मई 2000 में सुभाष घई की कंपनी मुक्ता आर्ट्स और महाराष्ट्र फ़िल्म विकास निगम एमएफ़एससीडीसी के बीच एक समझौता हुआ था जिसके तहत राज्य सरकार ने घई को काफ़ी सस्ते दामों पर फ़िल्म सीटी गोरेगावं के पास 20 एकड़ ज़मीन दी थी.

घई ने उस ज़मीन पर ह्विस्लिंग वुड्स नाम से एक फ़िल्म एंड टेलिविज़न इस्टीच्यूट खोला था. तत्कालीन मुख्यमंत्री विसासराव देशमुख समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के समय ख़ुद मौजूद थे और उन्होंने एक गवाह के रूप में दस्तख़त भी किए थे.

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा, ''विलासराव देशमुख ने साफ़ तौर पर एक मुख्यमंत्री की हैसियत से अपने सरकारी पद का दुरुपयोग किया था. ये बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है कि एक मुख्यमंत्री इस तरह के किसी समझौते पर ख़ुद हस्ताक्षर करे जो कि ग़ैर-क़ानूनी है. ये बिल्कुल स्पष्ट है कि विलासराव देशमुख ने घई की ह्विस्लिंग वुड्स को नाजायज़ तरीक़े से फ़ायदा पहुंचाया.''

देशमुख की बेक़सूर होने की दलील को ख़ारिज करते हुए अदालत ने कहा कि मुक्ता आर्ट्स और फ़िल्म विकास निगम के प्रबंध निदेशकों की हिम्मत इस कारण काफ़ी बढ़ गई थी क्योंकि उन्हें पता था कि इस मामले में उन्हें राज्य के सबसे उच्च अधिकारी का समर्थन हासिल है.

अदालत ने घई को वर्ष 2000 से अब तक हर साल के लिए पांच करोड़ तीस लाख का किराया भी अदा करने का आदेश दिया है.

अदालत ने कुल 20 एकड़ ज़मीन में से 14.5 एकड़ ज़मीन को फ़ौरन वापस करने के आदेश दिए हैं जबकि बाक़ी साढ़े पांच एकड़ ज़मीन जिस पर इस समय फ़िल्म इस्टीच्यूट बना हुआ है उसको जुलाई 2014 तक राज्य सरकार को वापस करने के लिए कहा है.

अदालत के अनुसार फ़िल्म इंस्टीच्यूट में इस समय चल रहे सारे कोर्स 2014 तक ख़त्म हो जाएंगे और किसी छात्र का नुक़सान नहीं होगा.

हाई कोर्ट के फ़ैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सुभाष घई ने कहा कि वो सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और उन्हें पूरी उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें इंसाफ़ मिलेगा.

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