सलमान ख़ुर्शीद मामला: चुनाव आयोग की राष्ट्रपति से गुहार

सलमान ख़ुर्शीद और एसवाई क़ुरैशी इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption चुनाव आयोग ने आचार संहिता के उल्लंघन पर सलमान ख़ुर्शीद की आलोचना की थी

केंद्रीय क़ानून मंत्री सलमान ख़ुर्शीद और चुनाव आयोग के बीच चल रही तकरार अब राष्ट्रपति भवन तक पहुँच गई है. मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई क़ुरैशी ने राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल को पत्र लिखकर मामले में हस्तक्षेप की अपील की है.

पिछले दिनों आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में चुनाव आयोग ने सलमान ख़ुर्शीद को फटकार भी लगाई थी.

लेकिन एक चुनावी सभा के दौरान सलमान ख़ुर्शीद ने यह कह दिया था कि चुनाव आयोग चाहे उन पर पाबंदी लगाए या फिर उन्हें फांसी दे दे, लेकिन वह पिछड़े मुसलमानों को उनका हक़ दिलाकर रहेंगे.

समाचार चैनलों पर दिखाए जा रहे सलमान ख़ुर्शीद के बयान से नाराज़ और निराश होकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने राष्ट्रपति भवन का दरवाज़ा खटखटाया है.

एसवाई क़ुरैशी ने अपने पत्र में लिखा है कि वे बड़ी निराशा और मामले का महत्व देखते हुए उन्हें पत्र लिख रहे हैं और अपील करते हैं कि उत्तर प्रदेश में चल रही चुनावी प्रक्रिया के बीच राष्ट्रपति इस मामले में दखल दें.

राष्ट्रपति ने चुनाव आयोग की शिकायत पर 'उचित कार्रवाई' के लिए यह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय को सैंप दिया है.

घटनाक्रम

मुख्य चुनाव आयुक्त ने अपने पत्र में इसका क्रमवार ब्यौरा दिया है कि कैसे सलमान ख़ुर्शीद ने एक चुनावी सभा के दौरान मुसलमानों को अन्य पिछड़ी जातियों के 27 प्रतिशत आरक्षण में से नौ फ़ीसदी आरक्षण अल्पसंख्यकों को देने की घोषणा की थी और इसके भी संकेत दिए थे कि अच्छी-ख़ासी आबादी वाले मुसलमानों को इससे फ़ायदा भी होगा.

एसवाई क़ुरैशी ने लिखा है कि एक राजनीतिक दल की शिकायत पर चुनाव आयोग ने इस मामले में सुनवाई की और नौ फ़रवरी को आदेश जारी किया कि सलमान ख़ुर्शीद ने आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन किया है.

उन्होंने पत्र में लिखा है कि आदेश के बावजूद 11 फरवरी को उन्होंने सलमान ख़ुर्शीद को टेलीविज़न मीडिया पर ये बयान देते हुए देखा है कि चुनाव आयोग का निर्देशों जो भी हो, वे अपनी पहली वाली लाइन पर क़ायम रहेंगे.

मुख्य चुनाव आयुक्त ने ये भी लिखा है कि केंद्रीय क़ानून मंत्री की भाषा और अंदाज़ आयोग के क़ानूनी निर्देशों के प्रति उपेक्षापूर्ण और अपमानजनक है. इसके अलावा उनका बयान चुनाव में सभी को समान अवसर दिए जाने के सिद्धांत को नुक़सान पहुँचा रहा है.

एक केंद्रीय मंत्री और वो भी क़ानून मंत्री की आयोग के फ़ैसले पर प्रतिक्रिया ने एक परेशान करने वाली स्थिति खड़ी कर दी है.

चिंता

एसवाई क़ुरैशी ने लिखा है कि आयोग इस बात पर चकित है कि आचार संहिता के उल्लंघन पर पश्चाताप करने की बजाए, मंत्री ने विद्रोही और आक्रामक रास्ता चुना है. आदर्श आचार संहिता को लेकर सभी राजनीतिक पार्टियों में सहमति है और सुप्रीम कोर्ट भी इसे मान्यता देता है.

उन्होंने आगे लिखा है कि ये अभूतपूर्व है. मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया है कि इस मामले पर आयोग के सभी सदस्यों की आपात बैठक बुलाई गई थी और इस पर विचार किया है.

आयोग इस बात पर तो चिंतित है ही कि सलमान ख़ुर्शीद के इस क़दम से उत्तर प्रदेश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव पर बुरा असर पड़ सकता है.

लेकिन आयोग इससे भी चिंतित है कि उसके संवैधानिक दायित्वों को कमज़ोर करने का क़दम क़ानून मंत्री की ओर से उठाया जा रहा है, जो चुनाव आयोग को मज़बूत करने और उसे बनाए रखने के लिए सीधे तौर पर ज़िम्मेदार हैं.

आख़िर में राष्ट्रपति को संबोधित इस पत्र में उन्होंने लिखा है कि चुनाव आयोग इसे ज़रूरी मानता है कि वो इस मामले में आपके दखल की मांग करे और वो इस स्थिति को टाल नहीं सकता.

एसवाई क़ुरैशी ने राष्ट्रपति से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की है ताकि उत्तर प्रदेश में चुनाव कराए जा सके और चुनाव आयोग संविधान और क़ानून के तहत अपना काम कर सके.

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