बीबीसी पत्रकार की पिटाई

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Image caption अमरनाथ तिवारी पर कई लोगों ने मिलकर हमला किया

बीबीसी वेबसाइट के लिए लिखने वाले पटना स्थित पत्रकार अमरनाथ तिवारी की पिछले महीने कुछ लोगों ने उनके घर पर जमकर पिटाई कर दी जिसमें उन्हें काफ़ी चोटें आई.

तिवारी का कहना है कि ये हमला स्थानीय पार्टी के सदस्यों ने करवाया है. इस मामले में पुलिस की तहक़ीक़ात आगे नहीं बढ़ पाई है और हमलावरों का मकसद भी ठीक से पता नहीं चल सका है.

इस घटना की दास्तान बता रहे हैं खुद अमरनाथ तिवारी.

आप सोचते होंगे कि बिहार में बीबीसी का संवाददाता होने के वास्ते मुझपर हमला किसी बहुत बड़ी गड़ब़ड़ी को उजागर करने पर किया गया होगा. लेकिन अगर पुलिस की बात मानें, तो ये हमला बहुत छोटी सी बात की वजह से हुआ.

मुझपर हमला इसलिए हुआ क्योंकि मैं जिन फ्लैट्स में रहता हूँ मैनें वहां के मैनेजमेंट की निंदा की थी.

ये सच हो सकता है, लेकिन पुलिस जो कहना भूल गई है वो ये कि मैनें जिनकी निंदा की है वो भारतीय जनता पार्टी के बड़े स्थानीय नेता भी हैं.

कड़ी सज़ा

दो हफ़्ते पहले मैं पटना स्थित अपने घर के बगीचे में पौधों को पानी दे रहा था. रात का वक्त था और मैं ये देखने में देर कर बैठा कि कुछ लोगों नें मुझे घेर लिया है. कुछ के पास हथियार थे और कुछ लोगों के हाथों में बल्ले थे.

तुरंत ही उन लोगों ने मुझे घेर कर पीटना शुरु कर दिया. मेरे चेहरे पर, सीने में और टांगों में चोटें आई.

मुझे कोई शक नहीं था कि ये हमला किसने करवाया है. इसके पीछे एक स्थानीय नेता थी जो फ्लैट मैनेजमेंट की शिकायत के अलावा मेरे रिपोर्टिंग से भी नाखुश रहती थी.

हमारे देश में जो लोग राजनितिज्ञों से उलझते हैं उन्हें ऐसे ही, या इससे भी खतरनाक ढंग से मारा पीटा जाता रहा है.

लेकिन मैं इस हमले से घबराया नहीं हूं. मुझे खुद को लगी चोट से ज़्यादा तो उन गमलों औऱ पौधों की चिंता हो रही है जिन्हें नकसान पंहुचा था.

Image caption नीतिश कुमार को बिहार में कानून का राज स्थापित करने का गौरव दिया जाता है

पुलिस कि तहक़ीक़ात कहीं नहीं पंहुची है.

मुझे लगता है कि ऐसा इसलिए हो रहा होगा क्योंकि मैं जिसे इस हमले का दोषी मानता हूं वो महत्वपूर्ण भाजपा सदस्य हैं और भाजपा बिहार की साझा सरकार में भी शामिल है.

हालांकि उस व्यक्ति ने इस हमले में हाथ होने से इंकार किया है.

ढीली पुलिस

इस पूरे मामले में पुलिस का रवैया बेहद ढीला रहा है.

उन्होंने मेरे घर पड़ताल करने के लिए अफ़सर भेजने में 12 दिन का समय लिया और मुझे डराने धमकाने के कारनामों पर भी नज़र नहीं डाल रही है.

मेरे इलाक़े में उस नेता के लोग लगातार चक्कर लगा रहे हैं ताकि मुझे मामले को रफ़ा दफ़ा करने के लिए डराया जा सके.

लेकिन इन सबके बीच अच्छी खबर भी है.

इस मामले का मीडिया में खूब उछाला गया है और खुद मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने भी इस पर कदम उठाने की घोषणा की है.

नीतिश कुमार ने बिहार में कानून राज़ स्थापित करने में बड़ी भूमिका निभाई है और इसके लिए उनकी खूब तारीफ़ हुई है.

मुख्यमंत्री बिहार का सुनहरा और गौरवशाली इतिहास वापस लाना चाहते हैं लेकिन उसके लिए उन्हें पहले इस तरह के हिंसक वारदातों पर काबू पाना होगा.

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