'शौचालय नहीं तो मैं चली मायके'

अनीता नारे इमेज कॉपीरइट BBC World Service
Image caption अनीता ने कहा कि वो बाकी के सदस्यों की तरह खुले में शौच नहीं जाएँगी क्योंकि ऐसा करना गलत बात है

मध्य प्रदेश के रतनपुर गाँव में एक मामला प्रकाश में आया है जिसमें एक महिला ने शादी के दो दिन बाद ही पति का घर इसलिए छोड़ दिया क्योंकि उसके यहाँ शौचालय नहीं था.

पिछले वर्ष 11 मई को बीए द्वितीय वर्ष की छात्रा अनीता नारे की शादी शिवराम से हुई थी, लेकिन दो दिनों के बाद ही वो मायके चली गईं.

आठ दिन बाद शौचालय बनने के बाद ही वो वापस आईं.

उनके इस कदम के लिए सुलभ इंटरनेशनल ने उन्हें पाँच लाख की धनराशि देने की घोषणा की है.

अनीता ने शिवराम से कहा था कि वो बाकी के सदस्यों की तरह खुले में शौच नहीं जाएँगी क्योंकि ऐसा करना गलत बात है. उन्होंने कहा कि जब तक शिवराम शौचालय तैयार नहीं करवाते, वो वापस नहीं आएँगी.

22-वर्षीय शिवराम मजदूरी करके घर का खर्चा चलाते हैं. उन्होंने बीबीसी से बातचीत में कहा कि अपनी पत्नी की बात सुनकर उन्हें ऐसा लगा कि उनमें एक नई जागृति आ गई है.

शिवराम कहते हैं, “हम शौचालय बनाने के बारे में हमेशा सोचते थे, लेकिन धन की कमी की वजह से ऐसा नहीं कर सके.”

शिवराम के पिता नहीं हैं और घर का खर्चा मुश्किल से चलता है.

लेकिन पत्नी के कदम की वजह से शिवराम ने ग्राम सरपंच का रुख किया. उन्हें 501 रुपए दिए गए. बाकी के 2,000 रुपए का घर से इंतज़ाम करके उन्होंने एक शौचालय बनवाया.

दूसरे गाँवों तक पहुँची कहानी

जल्द ही ये कहानी पास के गावों में भी पहुँच गई और दूसरे परिवारों ने भी शौचालय बनावाना शुरू किया.

अनीता कहती हैं कि उन्हें ये बात पता थी कि शिवराम के घर में शौचालय नहीं है लेकिन उन्हें लगा था कि शादी के बाद शिवराम उसे बनवा लेंगे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

अनीता कहती हैं, “बहू-बेटियों को बाहर शौचालय जाना अच्छा नहीं लगता है."

शादी के दो दिन तो जैसे तैसे गुज़रे लेकिन फिर अनीता से सहा नहीं गया और उन्होंने शिवराम से सीधे शब्दों में कह दिया – जब तक शौचालय नहीं बनेगा, तब तक घर वापस नहीं आउँगी.

अनीता के पिता ने भी उनका साथ दिया. उन्हें उम्मीद थी कि पंचायत वाले शौचालय बनाने में शिवराम की मदद करेंगे.

अनीता कहती हैं कि सुलभ की ओर से मिलने वाले धन से वो स्नानघर बनवाएँगी. स्नानघर नहीं होने की वजह से उन्हें नहाने में काफ़ी असुविधा होती है.

उधर सुलभ इंटरनेशनल के संस्थापक बिंदेश्वर पाठक ने बीबीसी को बताया कि ये अपने तरह का एक अनूठा मामला है जिसमें किसी महिला ने ऐसा कदम उठाने की हिम्मत दिखाई.

वो कहते हैं, "अगर सारे भारतवर्ष में लड़कियाँ ऐसा करने का निर्णय ले लें तो लोग शौचालय बनवाने को बाध्य हो जाएँगे. लड़कियाँ ससुराल से ऐसे नहीं लौटती. इसे अच्छा नहीं माना जाता. अनीता की हिम्मत सभी लोगों के लिए सीख है."

संबंधित समाचार